भूखंड की खुदाई करते समय मिलने वाले सामान से शुभ एवं अशुभ भूमि की पहचान ।।

भूखंड की खुदाई करते समय मिलने वाले सामान से शुभ एवं अशुभ भूमि की पहचान ।। Bhu-Khand Khudayi Se Prapt Samagri Se Shubh-Ashubh Bhumi Janna.

हैल्लो फ्रेंड्सzzzzz.

मित्रों, यदि भवन निर्माण हेतु आपने नया भूमि खरीद लिया है, तो वास्तु विशेषज्ञों द्वारा भूमि परिक्षण अवश्य करवायें । वैसे हमारे शास्त्रों में भूमि परिक्षण के बहुत से उपाय बताये गए हैं, जिन्हें मैं आपलोगों को बता चूका हूँ ।।

अब आज मैं आपलोगों को बताता हूँ, भवन निर्माण से पहले भूमि की खुदाई से निकलने वाले सामान से भूमि की शुभता-अशुभता की पहचान कैसे करें ?।।


१.भूखंड की खुदाई करते समय यदि कँकड़-पत्थर मिले तो यह शुभ संकेत हैं । इससे वहाँ रहने वाले को दीर्घायु, धन प्राप्त करने व स्वस्थ रहने में सहायता मिलती है ।।

२.पकी हुई साबूत ईंट व खपरे मिलें तो यह भी उत्तम एवं सदैव लाभकारी है ।।

३.भूखंड की खुदाई करते समय यदि सोने-चाँदी आदि के सिक्के व अन्य बहुमूल्य धातुएँ मिलें तो आर्थिक समृद्धि के संकेत करती हैं । इस प्रकार की भूमि को शुभ एवं उत्तम माना गया है ।।

४.खुदाई करते समय मानव खोपड़ी या हड्ड़ियों के टुकड़ें आदि प्राप्त हो तो इसे अशुभ एवं हानिकारक माना जाता है । इससे भू-स्वामी को कठिनाइयों एवं दुःखों का सामना करना पड़ता है ।।

५.भूखंड में यदि खुदाई के दौरान दीमक, चींटी, सर्प के घर (बामी) या बिल प्राप्त हो तो इसे अत्यंत अशुभ माना जाता है ऐसे भूखंड निवास की दृष्टि से उचित नहीं माए गए हैं ।।

६.सूखी घास, अंडे, कपड़ों के टुकड़े आदि प्राप्त हो तो भू-स्वामी को अकाल मृत्यु, पत्नी, पुत्र व धन हानि की आशंका रहती है । ऐसे भूखंड को हमारे शास्त्रों में अत्यंत अशुभ कहा गया है ।।

७.भूखंड की खुदाई के दौरान यदि जले हुए कपड़े, लकड़ी व अन्य वस्तुओं के अवशेष प्राप्त हो तो आपदाएँ व मुसीबतें उसमें निवास करने वाले का पीछा नहीं छोड़ती, ऐसे भूखंड प्रायः अशुभ ही होते हैं ।।

८.भू-खुदाई के दौरान यदि बाल, मृत हुए जीव व अन्य बेकार की वस्तुएँ प्राप्त हों तो यह भी शुभ संकेत नहीं हैं । ऐसे भूखंड रोग, धनहीनता व अपमृत्यु की ओर इशारा करते हैं ।।

९.नमीयुक्त व दलदल स्थिति वाला भूखण्ड़ भी निवास के लिहाज से उत्तम नहीं माना जाता है । इससे विकास कार्यों में अवरोध उत्पन्न होते हैं, ऐसा हमारे शास्त्रों का कहना है ।।

१०.भूखण्ड का सही होना भू-चयन का मुख्य उद्देश्य होता है । जिससे परिवार का समग्र विकास एवं बच्चों का पढ़ाई में अच्छे से मन लगने लगता है और आपसी प्रेम का विकास होता है ।।

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।।। नारायण नारायण ।।।

 

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