लालकिताब, शुक्र ग्रह एवं इन्सान के जीवन में भोग-विलास कि स्थिति ।।

लालकिताब, शुक्र ग्रह एवं इन्सान के जीवन में भोग-विलास कि स्थिति ।। Lalkitab, Shukra Grah And Jivan Me Bhog-Vilas.

 

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

 

मित्रों, एक सिद्धान्त ज्योतिष में आजकल कुछ ज्यादा ही प्रचलन में है । मुझे भी उस किताब को पढ़ने का मौका मिला परन्तु कुछ ख़ास नहीं लगा । उसे लालकिताब कहते हैं, उस लालकिताब के अन्दर मुझे तीन सिद्धान्त कुछ खास लगा । पहला यह कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है और सभी ग्रह-नक्षत्र-तारे भी उसी की सत्ता के आधीन हैं ।।

 

जो नव ग्रह हैं वो भी ईश्वर की ही देन है, और उन नौ ग्रहों की सत्ता के आधिकार भी अलग-अलग निर्धारित हैं । उसमें से आज हम शुक्र के विषय में विस्तृत बात करेंगे । शुक्र जब गोचर में होता है तो मनुष्य के जीवन पर उसका क्या प्रभाव पड़ता है ? किस भाव में बैठकर क्या फल जातक को देता है शुक्र इस विषय में चर्चा करेंगे ।।

 

मित्रों, गोचर में शुक्र जन्म या नाम राशि से अगर 1, 2, 3, 4, 5, 8, 9, 11 और 12वें स्थान पर हो तो शुभ फल देता है । बाकी के 6, 7 और 10वें स्थान में शुक्र का भ्रमण अथवा उसकी उपस्थिति अशुभ फलदायी होता है । जन्मकालीन चन्द्रमा से प्रथम स्थान पर शुक्र का गोचर जातक को हर प्रकार का सुख एवं धन का लाभ करवाता है । ये शुक्र शिक्षा में सफलता, विवाह, आमोद-प्रमोद तथा जातक के व्यापार में भी अकल्पनीय वृद्धि करवाता है ।।

 

जन्म कुण्डली में जहाँ चन्द्रमा हो वहाँ से दूसरे स्थान पर यदि शुक्र गोचर में आये तो जातक को नवीन वस्त्राभूषण, गीत संगीत में रूचि, परिवार सहित मनोरंजन का सुख, धनलाभ एवं राज्य के तरफ से भी सुख की प्राप्ति होती है । तीसरे स्थान पर शुक्र का गोचर हो तो मित्र लाभ, शत्रु की पराजय, साहस की वृद्धि, शुभ समाचार की प्राप्ति, भाग्योदय, भाइयों और बहनों से सुख की प्राप्ति एवं सरकार से सहयोग मिलता है ।।

 

मित्रों, चौथे स्थान में शुक्र के गोचर से किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति करवाता है । यह समय जातक को धन लाभ, वाहन लाभ, आवास लाभ, सम्बन्धियों से मिलन, जन संपर्क तथा मानसिक बल में वृद्धि होती है । पांचवें स्थान पर  शुक्र के गोचर से संतान सुख, परीक्षा में सफलता, मनोरंजन, प्रेमी या प्रेमिका से मिलन, सट्टा-लाटरी से लाभ होता है ।।

 

छठे घर में शुक्र के गोचर से जातक के शत्रुओं कि वृद्धि, रोग भय, दुर्घटना, स्त्री से झगडा या उससे कष्ट होता है । सातवें स्थान पर शुक्र गोचर में आये तो जातक को जननेंन्द्रिय सम्बन्धी रोग, यात्रा में कष्ट, स्त्री को कष्ट या उस से विवाद तथा आजीविका में भी बाधायें आती है ।।

 

मित्रों, आठवें स्थान पर शुक्र के गोचर से कष्टों की निवृत्ति, धन लाभ एवं जातक के सुखों में वृद्धि होती है । नवें  स्थान पर शुक्र के गोचर से सरकारी सहयोग, धार्मिक स्थलों की यात्रा, घर में मांगलिक उत्सव तथा भाग्योदय होता है । दसवें स्थान पर शुक्र के से गोचर से जातक की मानसिक चिंता, कलह, नौकरी एवं व्यवसाय में विघ्न, कार्यों में असफलता तथा सरकार से परेशानी होती है ।।

 

ग्यारहवें स्थान पर शुक्र के गोचर से धन ऐश्वर्य की वृद्धि, कार्यों में सफलता तथा मित्रों का सहयोग प्राप्त होता है । बारहवें घर में गोचरवश शुक्र की उपस्थिति से अर्थ लाभ, भोग विलास का सुख, विदेश यात्रा एवं मनोरंजन का सुख जातक को प्राप्त होता है ।।

 

मित्रों, फलित ज्योतिष का आधार मुख्यतः अनुभव ही होता है । उपरोक्त बातों में परिवर्तन भी हो सकता है, यदि शुक्र की स्थिति उच्च, स्व मित्र, शत्रु, नीच आदि राशियों में हो । अन्य ग्रहों से युति, दृष्टि के प्रभाव से, अष्टकवर्ग फल से या वेध स्थान पर शुभाशुभ ग्रह होने से भी उपरोक्त गोचर फल में परिवर्तन संभव हो सकता है ।।

 

इसलिये एक कुशल ज्योतिषी को अपने विवेक के अनुसार ही फलादेश करना चाहिये । क्योंकि संभावनाओं के इस खेल में किसी के जिन्दगी को खिलवाड़ नहीं बनाना ही उत्तम ज्ञान माना जायेगा । परन्तु पूर्ण श्रद्धा और विश्वास इन सबकी उपेक्षा करके उत्तम फल प्रदान करवाते ही हैं ।।

 

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।।। नारायण नारायण ।।।

 

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