आपकी कुण्डली में कलाकार, एक्टर अथवा हीरो-हिरोइन बनने के कुछ उत्तम योग ।।

 
 
 
 
मित्रों, आज शुक्रवार है, तो इसीलिए आज शुक्र ग्रह से सम्बन्धित लेख लेकर आपलोगों के लिये आया हूँ । पहली बात की ज्योतिषशास्त्र में शुक्र को कला एवं सौन्दर्य का कारक ग्रह माना जाता है । किसी भी व्यक्ति को शुक्र ही संगीत, नृत्य एवं अभिनय की योग्यता देता है । बुध बुद्धि का तथा चन्द्रमा मन एवं कल्पनाशीलता का कारक ग्रह होता है । कला जगत में कामयाबी के लिए इन तीनों ग्रहों का शुभ एवं मजबूत होना अत्यावश्यक होता है ।।
 
 
क्योंकि आज के समय में कला जगत में नाम, शोहरत एवं पैसा तीनों भरा पड़ा है । यही कारण है, कि लोगों को कला जगत में अपनी किस्मत आजमाने का एक शौक चढ़ा हुआ है । परन्तु यह भी उतना ही कड़वा सच है, कि जबतक आपकी कुण्डली में इस प्रकार का कोई योग न हो आप भटकते ही रह जायेंगे । किसे किस क्षेत्र में सफलता मिलेगी वह ईश्वर पहले से ही तय करके धरती पर भेजता है ।।
 
 
मित्रों, आज बॉलीवुड में कई काम हैं, जैसे अभिनय, गायन, नृत्य एवं लेखन आदि-आदि । परन्तु कौन व्यक्ति अभिनेता बन सकता है ? कौन गीतकार तथा कौन गायक ? यह उस व्यक्ति की कुण्डली से पहले ही जाना जा सकता है । यह जानने के बाद कि कौन सा ग्रह व्यक्ति की कुण्डली में अनुकूल है, उसके अनुसार अपने क्षेत्र का निर्धारण किया जाय तो उस क्षेत्र में व्यक्ति के सफल होने की उतनी ही अधिक संभावना बढ़ जाती है ।।
 
 
कला जगत में सफलता के लिए भाव एवं भावेश की स्थिति का सम्पूर्ण आँकलन करना चाहिये । अभिनय तथा गायन में वाणी प्रमुख होता है और कुण्डली का दूसरा भाव वाणी का भाव माना गया है । कुण्डली का पञ्चम भाव मनोरंजन का क्षेत्र माना जाता है । इनके साथ ही साथ दशम भाव से आजीविका का आंकलन करना चाहिये कि किस क्षेत्र में उसे अधिक सफलता मिलेगी ? लग्न तथा लग्नेश भी जीविका, धैर्य, साहस, हिम्मत आदि को जानने हेतु महत्वपूर्ण माने जाते हैं ।।
 
 
मित्रों, अब अभिनय, गायन एवं संगीत में सफलता दिलाने वाले कुछ महत्वपूर्ण योगों के विषय में बात करते हैं । वृष अथवा तुला लग्न की कुण्डली हो, शुक्र एवं बुध की युति दशम अथवा पंचम में भाव में हो तो व्यक्ति अभिनय की दुनियां में उच्च ख्याति प्राप्त करता है । पंचम भाव पर लग्नेश की दृष्टि हो साथ ही शुक्र या गुरू भी उसे देख रहे हों तो व्यक्ति अभिनय की दुनियां में अपना कैरियर बना लेता है ।।
 
 
शुक्र, बुध के साथ लग्नेश किसी व्यक्ति की कुण्डली में किसी केन्द्र भाव में बैठे हों तो वो जातक कला के क्षेत्र में कामयाबी पाता है । तृतीय भाव का स्वामी शुक्र के साथ युति अथवा किसी प्रकार का सम्बन्ध बनाता हो तो व्यक्ति श्रेष्ठ कलाकर बन सकता है । कुण्डली में मालव्य योग, शश योग, गजकेशरी योग, सरस्वती आदि कुछ श्रेष्ठ योग हो तो व्यक्ति के अन्दर कलात्मक गुण मौजूद होता है और वह इस क्षेत्र में सफल भी होता है ।।
 
 
मित्रों, इतना ही नहीं, उपरोक्त प्रकार के उत्तम योग किसी व्यक्ति की कुण्डली में मौजूद हो तो वह अपनी रूचि के अनुसार जिस क्षेत्र में भी चाहे अपनी योग्यता को आजमाकर सफल हो जाता है । उपरोक्त योग वाले व्यक्ति जिस क्षेत्र में भी प्रयत्न करें उन्हें उनमें सफलता मिलने की पूरी संभावना रहती है । चन्द्रमा पंचम, दशम अथवा एकादश भाव में स्वराशि में बैठा हो तथा शुक्र दूसरे घर में अथवा चन्द्रमा के साथ इन भावों में युति बनाये तो जातक कलाकार बन सकता है ।।
 
 
ग्रहों की उपरोक्त स्थितियां जातक को कलाकारिता के क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित करती है । शुक्र-चन्द्र की इस स्थिति में व्यक्ति अभिनय या गीत-संगीत के क्षेत्र में बहुत ऊँचा नाम कमा लेता है । जन्म कुण्डली में गुरू-चन्द्र का एक दूसरे से किसी भी प्रकार से आपसी सम्बन्ध बन रहा हो तथा साथ ही गुरू यदि ग्यारहवें भाव का स्वामी हो तो जातक कला के क्षेत्र से बहुत रूपया कमाता है ।।
 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

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