आपकी कुण्डली का ग्यारहवाँ भाव बनाता है अतुलनीय धनवान, जानें कैसे ?।।

आपकी कुण्डली का ग्यारहवाँ भाव बनाता है अतुलनीय धनवान, जानें कैसे ?।। Atulniya Dhanwan Banata Hai Gyarahavan Bhav.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, जन्मकुंडली के ग्यारहवें भाव को लाभ भाव के नाम से भी जाना जाता है । किसी भी प्रकार के लाभ का विचार इसी एकादश भाव से ही किया जाता है । कालपुरुष की कुंडली में एकादश भाव में कुम्भ राशि आती है जिसका स्वामी शनि होता है ।।

परन्तु गुरु इस भाव का कारक ग्रह होता है । नवग्रहों में पाप ग्रह, शुभ ग्रह, क्रूर ग्रह तथा सौम्य ग्रह इन सभी श्रेणियों के ग्रह नैसर्गिक रूप से एकादश भाव में शुभ फल देने वाले माने जाते है । क्योंकि यह भाव कुंडली में लाभ और वृद्धि का भाव होता है । इसलिये कोई भी ग्रह जब एकादश भाव में बैठता है तब वह अपने सभी शुभ फलों को अधिकाधिक जातक को प्रदान करता है ।।

मित्रों, कुण्डली का लग्नेश ग्रह यदि एकादश भाव में बैठता है तो यह अत्यन्त शुभ माना जाता है । सूर्य या लग्नेश में से कोई भी एक अथवा यदि ये दोनों एकादश भाव में बैठते हैं, तो कुंडली के नवमांश दोषो को नाश कर देते हैं । एकादश भाव मनोकामना पूर्ति का भाव भी माना जाता है ।।

एकादश भाव पर अधिक से अधिक ग्रहों का शुभ प्रभाव हो तो जातक की कोई विशेष इच्छा पूर्ण होती है । एकादश भाव से बनने वाले ग्रहों का शुभ सम्बन्ध उसी भाव से सम्बंधित इच्छा पूर्ति को दर्शाता है, जिस भाव का वह ग्रह स्वामी होता है, जो एकादश भाव से सम्बन्ध बना रहा हो ।।

मित्रों, इस एकादश भाव में अधिक से अधिक ग्रहों के शुभ प्रभाव से जातक के आमदनी के उत्तमोत्तम रास्ते खुलने के योग भी बनते है । द्वितीय भाव धन का भाव होता है और एकादश भाव लाभ का । द्वितीय और एकादश भाव का शुभ और बली सम्बन्ध बन जाने से धन लाभ के उत्तमोत्तम योग बनते है ।।

इस भाव से बड़े भाई-बहन का भी विचार किया जाता है । किसी बिजनेशमैन की कुंडली में ग्यारहवाँ भाव बहुत ही महत्वपूर्ण भाव माना जाता है । क्योंकि व्यापारी व्यक्ति धन लाभ के लिए ही व्यापार करता है । जब एकादश भाव की स्थिति कुण्डली में शुभ और बली हो तो जातक अच्छा लाभ कमाने में सफल होता है ।।

जिस भी भाव का स्वामी एकादश भाव से सम्बन्ध बना रहा होता है उस भाव के फल में वृद्धि होना निश्चित हो जाता है । अशुभ भाव के स्वामी ग्रह भी इस भाव में शुभ फल देने में सक्षम हो जाते है ।।

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