व्यापार बढाने एवं सफल कारोबारी बनकर माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सरल उपाय ।।

व्यापार बढाने एवं सफल कारोबारी बनकर माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सरल उपाय ।। Vyapar Vriddhi And Lakshmi Ki Kripa.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,


मित्रों, व्यापार में निरंतर लाभ पाने हेतु कुंडली में लग्न, द्वितीय, पंचम, नवम और एकादश भावों एवं उनके स्वामियों के शुभ संबंधों का विचार किया जाना चाहिये । परंतु कभी-कभी ,ऐसा देखने में आता है कि आर्थिक संपन्नता के योग कुंडली में मौजूद होने पर भी दशा-अन्तर्दशा, गोचर ग्रहों की प्रतिकूलता अथवा अन्य अदृश्य कारण जैसे पितृ दोष अथवा किसी के द्वारा किया गया व्यापार बंधन आदि से व्यापार में वांछित लाभ नहीं मिलता है, ऐसे में कुछ उपाय हैं जिनसे लाभ प्राप्त किया जा सकता है ।।

पहला उपाय - शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें । ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही । शुक्रवार की रात को सवा किलो काले चने भिगोकर दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में भूनकर उसके तीन हिस्से कर लें । उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें ! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें ।।

यह प्रयोग 40 दिन तक करें आपके हर प्रकार के बिगड़े कम बनने लगेंगे तथा आपके कारोबार में लाभ होने लगेगा । यदि आपके कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो आप अपने वजन के बराबर कच्चा कोयला लेकर बहते जल में प्रवाहित कर दें आपको कल्पनीय एवं अवश्य ही उम्मीद से ज्यादा लाभ होगा ।।

दूसरा उपाय - मित्रों, करना ये है, कि किसी पात्र में सफेद सरसों के दाने इस प्रकार रखें कि वह दिखाई देती रहे और उस पात्र को अपने कार्यस्थल पर ही ऐसी जगह रखें जहां आने-जाने वालों का ध्यान उस पर पड़ता रहे । सरकारी अथवा अपने निजी रोजगार के क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी अगर आपको सफलता नहीं मिल रही है, तो आपलोगों को एक और दूसरा उपाय बताता हूँ ।।

मित्रों, दुसरा उपाय ये है, कि कहीं भी नियमपूर्वक किये गये लक्ष्मी-नारायण अथवा विष्णु यज्ञ का अवशेष (राख अथवा भभुत) ले कर अपने पितरों की कुशा की मूर्ति बना कर गंगाजल से स्नान करायें । उसके बाद उन मुर्तियों पर तिलक के रुप में यज्ञ की उस भभूती को लगा दें । कुछ गुड़ आदि का भोग लगायें और उनसे अपने कार्य की सफलता हेतु प्रार्थना करें ।।

उसके बाद किसी भी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर उन कुशा की मूर्तियों को किसी पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें । विश्वास रखें सफलता अवश्य मिलेगी आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी इसमें कोई संशय नहीं है । परन्तु सफलता मिलने के बाद किसी भी यज्ञ-यागादि शुभ कार्यों में अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ धन का दान अवश्य करें ।।

मित्रों, यदि पुरे निष्ठा से किये गये परिश्रम के बाद भी कारोबार ठप्प जैसा हो गया हो अथवा रूपया आता हो लेकिन आकर आवश्यकता से अधिक खर्च हो जाता हो तो यह टोटका करें । करना ये है, कि किसी गुरू पुष्य योग और साथ ही चन्द्रमा भी शुभ हो ऐसे दिन को प्रातः हरे रंग के कपड़े की एक छोटी सी थैली ले लें । फिर भगवान श्री गणेशजी के चित्र अथवा मूर्ति के आगे संकटनाशन गणेशस्तोत्र का 11 पाठ करें ।।

अब उस थैली में 7 ग्राम मूंग, 10 ग्राम साबुत धनिया, एक पंचमुखी रूद्राक्ष, एक चांदी का रूपया, 2 सुपारी और 2 हल्दी की गांठ रख कर दाहिने मुख के गणेश जी को शुद्ध घी के मोदक का भोग लगायें । फिर इस थैली को अपने तिजोरी अथवा कैश बॉक्स में रख दें । गरीबों और ब्राह्मणों को दान करते रहे, आर्थिक स्थिति में शीघ्र ही सुधार आ जाएगा । इस थैली को हर वर्ष बदल देना है पुराने के जगह पर नया रखना है ।।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

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