आज धनतेरस को आशातीत परिणाम प्रदायक पूजन विधि एवं मुहूर्त ।।

आज धनतेरस को आशातीत परिणाम प्रदायक पूजन विधि एवं मुहूर्त ।। Dhanteras Ko Achuk Sadhna Ka Muhurt.

इस वर्ष धनत्रयोदशी का पर्व आकाश मंडल के बारहवें नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी के साये तले मनाया जाएगा । उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्यदेव हैं । लिहाजा इस बार धनतेरस का पर्व प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य और आनंद लेकर आया है । शाम 5 बजकर 59 मिनट तक ब्रह्मयोग है उसके बाद ऐन्द्र या इंद्र योग शुरू हो जायेगा ।।

माया की विपरीत ऊर्जा ब्रह्म के योग में पूजन, जहां शिक्षा में आशातीत परिणाम प्रदायक और विद्या के विकास के साथ आध्यात्मिक उन्नति के लिए जाना जाता है, वहीं संतान की उन्नति और मान-सम्मान में वृद्धि के लिए भी पहचाना जाता है ।।

ऐन्द्र योग में लक्ष्मी पूजन ऐश्वर्य प्रदायक कहा गया है । यह पूजन राजनैतिक सफलता के साथ सुख, आनन्द, वैभव और उत्तम वाहन देने वाला माना जाता है । धनत्रयोदशी का आरम्भ 16 अक्टूबर, 2017 को मध्यरात्रि 12 बजकर 27 मिनट पर हुआ जो 18 अक्टूबर, 2017 को 12 बजकर 9 मिनट तक रहेगा ।।

राहु काल शाम 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक और प्रदोष काल संध्या 18 बजकर 12 मिनट से 20 बजकर 40 मिनट तक रहेगा । ऐसे में इस वर्ष धनतेरस पूजन का शुभ मुर्हूत प्रदोष काल का मध्य समय में आरम्भ करके समाप्ति पर्यन्त तक का शुभ होता है ।।

आज रात्रि 22:02 बजे से 24:20 बजे तक के समय में माता का किया गया पूजन धन के साथ आर्थिक मामलों में स्थायित्व प्रदान करता है । अर्थात स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है अर्थात धन टिकती है ।।

इसी मुहूर्त में बहीखाता खरीदना शुभ रहेगा । इसके बाद संध्या के पूजन मुहूर्त में भी बहीखाता खरीदा जा सकता है । सूर्यास्त के पश्चात अकाल मृत्यु से बचने के लिए घर के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर 4 बातियों वाले दीप का दान यानी करें यानी दीप जलाएं ।।

धनतेरस पर चांदी खरीदना सौभाग्य कारक माना जाता है । कहते हैं कि इस दिन खरीदे हुए रजत में नौ गुने की वृद्धि हो जाती है । चांदी के बदले चाहें तो ताम्बे की वस्तु भी खरीद सकते हैं ।।

रात्रि में इस दिन आरोग्य के लिए भगवान धन्वन्तरि तथा समृद्धि के लिए कुबेर के साथ लक्ष्मी गणेश का पूजन करके भगवती लक्ष्मी को नैवेद्य में धनिया, गुड़ व धान का लावा अवश्य अर्पित करना चाहिए ।।

आज रात्रि में आध्यात्मिक साधना अर्थात ध्यान में अंतर्मुखी होकर ब्रम्हाण्डिय ध्वनियों के श्रवण का अभ्यास आंतरिक व मानसिक बल प्रदान करता है ।।

 

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