नरक चतुर्दशी के लिये कुछ विशेष, क्यों होती है यमराज की पूजा?।।

नरक चतुर्दशी के लिये कुछ विशेष, क्यों होती है यमराज की पूजा?।। Narak Chaturdashi And Yama Poojan Vishesh.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, यम चतुर्दशी या फिर रूप चतुर्दशी कहते हैं । दीपावली के एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनायी जाती है ।।

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है । इस दिन यमराज की पूजा करने और उनके लिए व्रत करने का विधान है । माना जाता है, कि हनुमान जी का जन्म भी इसी दिन हुआ था ।।

इसीलिए आज बजरंगबली की भी विशेष पूजा की जाती है । ऐसा बताया जाता है कि इस दिन आलस्य और बुराई को हटाकर जिंदगी में सच्चाई की रोशनी का आगमन होता है ।।

रात को घर के बाहर दिए जलाकर रखने से यमराज प्रसन्न होते हैं । इस उपाय से अकाल मृत्यु की संभावना टल जाती है । भागवत जी की कथा के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था ।।

नरक चतुर्दशी के दिन शरीर पर तिल के तेल की मालिश करना चाहिये । सूर्योदय से पहले स्नान करें और स्नान के दौरान अपामार्ग चिडचिडा के पौधा को शरीर पर स्पर्श करना चाहिये ।।

अपामार्ग के पौधे को निम्नांकित यमराज के नामों को पढ़कर अपने मस्तक पर घुमाए । नहाने के बाद साफ कपड़े पहनें तथा तिलक लगाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जाए ।।

इन मंत्रों से प्रत्येक नाम से तिलयुक्त तीन-तीन जलांजलि देवें । ऊं यमाय नम:, ऊं धर्मराजाय नम:, ऊं मृत्यवे नम:, ऊं अन्तकाय नम:, ऊं वैवस्वताय नम:, ऊं कालाय नम:, ऊं सर्वभूतक्षयाय नम:, ऊं औदुम्बराय नम:, ऊं दध्राय नम:, ऊं नीलाय नम:, ऊं परमेष्ठिने नम:, ऊं वृकोदराय नम:, ऊं चित्राय नम:, ऊं चित्रगुप्ताय नम: ।।

अब आज के दिन दीये जलाकर घर के बाहर रखें । ऐसी मान्यता है की दीप की रोशनी से प‌ितरों को अपने लोक जाने का रास्ता द‌िखता है ।।

इससे प‌ितर प्रसन्न होते हैं और प‌ितरों की प्रसन्नता से देवता और देवी लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं । दीप दान से संतान सुख में आने वाली बाधा दूर होती है तथा वंश की वृद्ध‌ि होती है ।।

 

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