आज का पञ्चांग

आज का लेख एवं आज 29 अप्रैल 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
 
आज का लेख एवं आज 29 अप्रैल 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।
 
Aaj-29-April-ka-Panchang.
 
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मित्रों, आज वैशाख मास के शुक्ल पक्ष कि तृतीया तिथि है अर्थात आज उदयातिथि के अनुसार "अक्षय तृतीया" व्रत है । आप सभी को अक्षय तृतीया व्रत की हार्दिक शुभकामनायें । आज की तिथि को संसार का सर्वोत्तम मुहूर्त माना जाता है अर्थात आज किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने पर वो कार्य विफल नहीं होता शत प्रतिशत सफल होता ही है ।।
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - उत्तरायण.
 
गोल - उत्तर.
 
ऋतु - बसन्त.
 
मास - वैशाख.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - वैशाख शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - तृतीया 06:57 AM बजे तक उपरान्त चतुर्थी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - रोहिणी 10:57 AM तक उपरान्त मृगशिरा नक्षत्र है ।।
 
योग - शोभन 08:27 PM उपरान्त अतिगण्ड योग है ।।
 
करण - गर 06:57 AM उपरान्त वणिज 17:17 PM उपरान्त विष्टि करण है ।।
 
चन्द्रमा - वृषभ राशि पर 21:43 PM बजे तक उपरान्त मिथुन राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:11:47
 
सूर्यास्त - सायं 19:00
 
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.24 बजे से 12.48 बजे तक ।।
 
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तृतीया तिथि विशेष - तृतीया तिथि में नमक एवं चतुर्थी को मूली का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य माना गया है । चतुर्थी को मूली एवं तिल का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है । तृतीया तिथि एक सबला और आरोग्यकारी तिथि मानी जाती है । इसकी स्वामी माता गौरी और कुबेर देवता हैं, जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है ।। 
 
तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है अन्यथा इस तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है । आज माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है । आज एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है । आज भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये । देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है ।।
 
मित्रों, तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है । इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है । ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है । इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है ।।
 
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चतुर्थी तिथि विशेष - चतुर्थी को मूली एवं पञ्चमी को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है । इस तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है । इसलिए चतुर्थी को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए । चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है । इसके स्वामी गणेश जी हैं तथा रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है ।।
 
इस तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है । आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है । आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
मित्रों, ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है । चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है । ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है । इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं ।।
 
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शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये ।।
 
शनिवार का विशेष - शनिवार के दिन तेल मर्दन "मालिश" करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है ।।
 
दिशाशूल - शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है । ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं । ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है ।।
 
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं । इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है । पारिवारिक जिम्मेदारियां भी अधिक रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं । सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है ।।
 
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वाभाव में साहस लक्षित होता है । सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं । ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं । इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्‍टर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये । इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं । ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं 28 अप्रैल 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
 
आज का लेख एवं 28 अप्रैल 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।
 
Aaj-28-April-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - उत्तरायण.
 
गोल - उत्तर.
 
ऋतु - बसन्त.
 
मास - वैशाख.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - वैशाख शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - द्वितीया 10:30 AM बजे तक उपरान्त शुक्ल तृतीया तिथि है ।।
 
नक्षत्र - कृतिका 13:40 PM तक उपरान्त रोहिणी नक्षत्र है ।।
 
योग - सौभाग्य 12:29 PM उपरान्त शोभन योग है ।।
 
करण - कौलव 10:30 AM उपरान्त तैतिल 20:43 PM उपरान्त गर करण है ।।
 
चन्द्रमा - वृषभ राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:12:25
 
सूर्यास्त - सायं 19:00
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 10:30 बजे से 12:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.24 बजे से 12.48 बजे तक ।।
 
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द्वितीया तिथि विशेष - मित्रों, द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है । द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है तथा इसके स्वामी ब्रह्माजी हैं । भद्रा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है ।।
 
प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये । वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है । परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है । इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये ।।
 
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है । इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है । इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं । इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं । इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो । ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है ।।
 
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शुक्रवार का विशेष - शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
शुक्रवार का विशेष टिप्स - मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें । यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें । शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है । आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है । ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं । ये धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है । ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं ।।
 
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं । इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है । सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं । इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्‍स विशेषज्ञ, मनोचिकित्‍सक अथवा ज्‍वेलरी से सम्बन्धित व्‍यवसायों में आजमाना चाहिये । इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं । जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं । मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु ! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 27 अप्रैल 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
 
आज का लेख एवं आज 27 अप्रैल 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।
 
Aaj-27-April-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - उत्तरायण.
 
गोल - उत्तर.
 
ऋतु - बसन्त.
 
मास - वैशाख.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - वैशाख शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - प्रतिपदा 14:11 PM बजे तक उपरान्त शुक्ल द्वितीया तिथि है ।।
 
नक्षत्र - भरणी 16:32 PM तक उपरान्त कृतिका नक्षत्र है ।।
 
योग - आयुष्मान 16:37 PM उपरान्त सौभाग्य योग है ।।
 
करण - किन्तुघ्न 04:00 AM उपरान्त बव 14:11 PM उपरान्त बालव करण है ।।
 
चन्द्रमा - मेष राशि पर 21:49 PM बजे तक उपरान्त वृषभ राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:13:05
 
सूर्यास्त - सायं 19:00
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.24 बजे से 12.48 बजे तक ।।
 
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प्रतिपदा तिथि विशेष - प्रतिपदा को कद्दू एवं कूष्माण्ड तथा द्वितीया तिथि को कटेरी के फल का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है । प्रतिपदा तिथि वृद्धि और सिद्धिप्रद तिथि मानी जाती है । इसके स्वामी अग्नि देवता हैं और यह तिथि नन्दा नाम से विख्यात है ।।
 
मित्रों, यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है । आज अग्निदेव से धन एवं तेज प्राप्त करने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति हेतु घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये ।।
 
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है । ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है । ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं । आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग ।।
 
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गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
गुरुवार का विशेष - गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है । साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है । इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है । अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है । इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए । इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है ।।
 
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है । ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है । साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है । ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है । उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है ।।
 
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गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है । इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है । इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है । जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं । परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है ।।
 
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है । जैसे - सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो । ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है ।।
 
दिशाशूल - गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है ।।
 
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें - गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है । जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है । गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें । इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे ।।
 
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बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं । ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं । ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं । गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं ।।
 
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं । ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं । यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं । गुरुवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्‍वभाव के होते हैं । ये जीवन को उत्‍सव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं ।।
 
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं । धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्‍वासघात नहीं कर सकते हैं । यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं । इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये । इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्‍पतिवार तथा शुभ अंक 4 होता है ।।
 
आज का विचार - मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं । परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं । इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 26 अप्रैल 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
 
आज का लेख एवं आज 26 अप्रैल 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।
 
Aaj-26-April-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - उत्तरायण.
 
गोल - उत्तर.
 
ऋतु - बसन्त.
 
मास - वैशाख.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - चैत्र कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - अमावस्या 17:48 PM बजे तक उपरान्त शुक्ल प्रतिपदा तिथि है ।।
 
नक्षत्र - अश्विनी (गण्डमूल) 19:21 PM तक उपरान्त भरणी नक्षत्र है ।।
 
योग - प्रीति 20:43 AM उपरान्त आयुष्मान योग है ।।
 
करण - चतुष्पद 07:30 AM उपरान्त नाग 17:48 PM उपरान्त किन्तुघ्न करण है ।।
 
चन्द्रमा - मेष राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:13:45
 
सूर्यास्त - सायं 19:00
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.24 बजे से 12.48 बजे तक ।।
 
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अमावस्या तिथि विशेष - अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है । शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है । अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है । अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं । यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
मित्रों, अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है । किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है । जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है । इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है ।।
 
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है । अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये । आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है । अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये । घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं ।।
 
विशेष ज्ञान - मित्रों, रविवार कि सप्तमी, सोमवार कि सोमवती अमावस्या (अथवा किसी दिन की भी अमावस्या हो), मंगलवार कि चतुर्थी और बुधवार कि अष्टमी । इन चारों तिथियों में किया गया मन्त्र जप सिद्ध हो जाता है । इनमें किया गया श्राद्ध-तर्पण, तीर्थ स्नान एवं दान अक्षय हो जाता है, क्योंकि इन तिथियों को सूर्यग्रहण के बराबर पुण्यदायिनी माना गया है ।। (शिवपुराण, विद्येश्वर संहिता, अध्याय - 10.)
 
मित्रों, अमावस्या तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति चतुर एवं कुटिल होता है । इनके मन में दया के भावनाओं की बहुत ही कमी होती है । इनके स्वभाव में ईर्ष्या अर्थात दूसरों से जलने की प्रवृति होती है । इनके व्यवहार एवं आचरण में कठोरता दिखाई देती है । ये दीर्घसूत्री अर्थात किसी भी कार्य को पूरा करने में काफी समय लगाते हैं ।।
 
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आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें - बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है । इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
बुधवार का विशेष - बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं । इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं । ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं । ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं । इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं ।।
 
ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं । किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं । वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है । अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है । बुधवार को जन्‍म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं । वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं ।।
 
इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं । इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये । इन क्षेत्रों में इन्हें अच्‍छी सफलता की संभावना होती है । इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा "आप" शब्द का, उसके बाद "हम" शब्द का और सबसे कम "मैं" शब्द का प्रयोग करना चाहिए । इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 25 अप्रैल 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
 
आज का लेख एवं आज 25 अप्रैल 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।
 
Aaj-25-April-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - उत्तरायण.
 
गोल - उत्तर.
 
ऋतु - बसन्त.
 
मास - वैशाख.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - चैत्र कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - चतुर्दशी 21:09 PM बजे तक उपरान्त अमावस्या तिथि है ।।
 
नक्षत्र - रेवती 21:09 PM तक उपरान्त अश्विनी (दोनों गण्डमूल) नक्षत्र है ।।
 
योग - वैधृति 04:14 AM उपरान्त विष्कुम्भ योग है ।।
 
करण - वणिज 00:06 AM उपरान्त विष्टि 10:41 AM उपरान्त शकुनि करण है ।।
 
चन्द्रमा - मीन राशि पर 21:56 PM बजे तक उपरान्त मेष राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:14:26
 
सूर्यास्त - सायं 18:59
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 15:00 बजे से 16:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त - दोपहर 12.24 बजे से 12.48 बजे तक ।।
 
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चतुर्दशी तिथि विशेष - चतुर्दशी को शहद और अमावस्या को मैथुन त्याज्य होता है । चतुर्दशी तिथि क्रूरा और उग्रा तिथि मानी जाती है, इसके देवता शिवजी हैं । चतुर्दशी को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन अर्चन एवं अभिषेक करना चाहिये । सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत रुद्राभिषेक करवायें ।।
 
आज की तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है । जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है । रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है ।।
 
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है । इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है । इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है । ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं । देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है ।।
 
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मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए । मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये ।।
 
मंगलवार का विशेष - मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं । इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत अधिक होती है । ऐसे लोग जिम्मेदा‍‍रियों के कार्य में सफल भी होते हैं । खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं । यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है ।।
 
मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है । ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं । ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है । ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं । जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं । इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं ।।
 
मंगलवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति स्‍वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्‍य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांग‍ठनिक क्षमता वाले होते हैं । नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर अधिक सफल रहता है । इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरून और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है ।।
 
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मंगलवार का विशेष टिप्स - यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं । भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें ।।
 
मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें - मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 100 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता । जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा ।।
 
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गृहस्थ जीवन में अशान्ति एवं तलाक करवाने वाला ग्रह मंगल ।।..... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....   ब्लॉग पर पढ़ें:   &    वेबसाईट पर पढ़ें:
 
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