आज का पञ्चांग

आज दीपावली के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 19 अक्टूबर 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।
आज 19 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-19-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - चतुर्दशी 00:14 AM बजे तक उपरान्त अमावस्या तिथि है ।।
 
नक्षत्र - हस्त 07:27 AM तक उपरान्त चित्रा नक्षत्र है ।।
 
योग - वैधृति 15:59 PM बजे तक उपरान्त विष्कुम्भ योग है ।।
 
करण - शकुनि 00:14 AM बजे तक उपरान्त चतुष्पाद 12:25 PM तक उपरान्त नाग करण है ।।
 
चन्द्रमा - कन्या राशि पर 20:00 PM बजे तक उपरान्त तुला राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:35:42
 
सूर्यास्त - सायं 18:09:54
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.11 बजे से 12.35 बजे तक ।।
 
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अमावस्या तिथि विशेष - अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है । शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है । अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है । अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं । यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
मित्रों, अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है । किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है । जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है । इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है ।।
 
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है । अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये । आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है । अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये । घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं ।।
 
विशेष ज्ञान - मित्रों, रविवार कि सप्तमी, सोमवार कि सोमवती अमावस्या (अथवा किसी दिन की भी अमावस्या हो), मंगलवार कि चतुर्थी और बुधवार कि अष्टमी । इन चारों तिथियों में किया गया मन्त्र जप सिद्ध हो जाता है । इनमें किया गया श्राद्ध-तर्पण, तीर्थ स्नान एवं दान अक्षय हो जाता है, क्योंकि इन तिथियों को सूर्यग्रहण के बराबर पुण्यदायिनी माना गया है ।। (शिवपुराण, विद्येश्वर संहिता, अध्याय - 10.)
 
मित्रों, अमावस्या तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति चतुर एवं कुटिल होता है । इनके मन में दया के भावनाओं की बहुत ही कमी होती है । इनके स्वभाव में ईर्ष्या अर्थात दूसरों से जलने की प्रवृति होती है । इनके व्यवहार एवं आचरण में कठोरता दिखाई देती है । ये दीर्घसूत्री अर्थात किसी भी कार्य को पूरा करने में काफी समय लगाते हैं ।।
 
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गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
गुरुवार का विशेष - गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है । साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है । इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है । अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है । इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए । इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है ।।
 
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है । ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है । साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है । ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है । उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है ।।
 
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गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है । इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है । इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है । जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं । परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है ।।
 
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है । जैसे - सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो । ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है ।।
 
दिशाशूल - गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है ।।
 
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें - गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है । जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है । गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें । इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे ।।
 
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बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं । ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं । ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं । गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं ।।
 
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं । ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं । यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं । गुरुवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्‍वभाव के होते हैं । ये जीवन को उत्‍सव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं ।।
 
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं । धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्‍वासघात नहीं कर सकते हैं । यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं । इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये । इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्‍पतिवार तथा शुभ अंक 4 होता है ।।
 
आज का विचार - मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं । परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं । इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 18 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 18 अक्टूबर 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।
आज 18 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-18-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - त्रयोदशी 00:09 AM बजे तक उपरान्त चतुर्दशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी 06:39 AM तक उपरान्त हस्त नक्षत्र है ।।
 
योग - ऐन्द्र 16:50 PM बजे तक उपरान्त वैधृति योग है ।।
 
करण - वणिज 00:09 AM बजे तक उपरान्त विष्टि 12:09 PM तक उपरान्त शकुनि करण है ।।
 
चन्द्रमा - कन्या राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:35:20
 
सूर्यास्त - सायं 18:10:38
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.11 बजे से 12.35 बजे तक ।।
 
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चतुर्दशी तिथि विशेष - चतुर्दशी को शहद और अमावस्या को मैथुन त्याज्य होता है । चतुर्दशी तिथि क्रूरा और उग्रा तिथि मानी जाती है, इसके देवता शिवजी हैं । चतुर्दशी को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन अर्चन एवं अभिषेक करना चाहिये । सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत रुद्राभिषेक करवायें ।।
 
आज की तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है । जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है । रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है ।।
 
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है । इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है । इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है । ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं । देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है ।।
 
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आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें - बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है । इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
बुधवार का विशेष - बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं । इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं । ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं । ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं । इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं ।।
 
ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं । किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं । वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है । अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है । बुधवार को जन्‍म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं । वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं ।।
 
इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं । इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये । इन क्षेत्रों में इन्हें अच्‍छी सफलता की संभावना होती है । इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा "आप" शब्द का, उसके बाद "हम" शब्द का और सबसे कम "मैं" शब्द का प्रयोग करना चाहिए । इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 17 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 17 अक्टूबर 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।
आज 17 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-17-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - द्वादशी 00:27 AM बजे तक उपरान्त त्रयोदशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी 06:13 AM तक उपरान्त उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है ।।
 
योग - ब्रह्म 17:59 PM बजे तक उपरान्त ऐन्द्र योग है ।।
 
करण - तैतिल 00:27 AM बजे तक उपरान्त गर 12:16 PM तक उपरान्त वणिज करण है ।।
 
चन्द्रमा - सिंह राशि पर 12:17 PM बजे तक उपरान्त कन्या राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:34:59
 
सूर्यास्त - सायं 18:11:23
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 15:00 बजे से 16:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त - दोपहर 12.11 बजे से 12.35 बजे तक ।।
 
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त्रयोदशी तिथि विशेष - त्रयोदशी तिथि को बैंगन और चतुर्दशी को शहद त्याज्य होता है । त्रयोदशी तिथि जयकारी और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है । इसके देवता मदन (कामदेव) हैं । जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है । शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव ।।
 
कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं । जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये । कामदेव का मन्त्र - ॐ रतिप्रियायै नम: । अथवा - ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि । तन्नो अनंग: प्रचोदयात् ।।
 
आज की तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है । आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से । जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये । जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये ।।
 
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है । यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं ।।
 
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मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए । मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये ।।
 
मंगलवार का विशेष - मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं । इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत अधिक होती है । ऐसे लोग जिम्मेदा‍‍रियों के कार्य में सफल भी होते हैं । खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं । यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है ।।
 
मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है । ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं । ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है । ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं । जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं । इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं ।।
 
मंगलवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति स्‍वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्‍य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांग‍ठनिक क्षमता वाले होते हैं । नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर अधिक सफल रहता है । इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरून और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है ।।
 
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मंगलवार का विशेष टिप्स - यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं । भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें ।।
 
मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें - मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 100 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता । जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा ।।
 
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अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।।..... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....    एस्ट्रो क्लासेस:   &  ब्लॉग पर पढ़ें:

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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 16 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 16 अक्टूबर 2017 दिन सोमवार का पंचाग ।।
आज 16 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-16-October-ka-Panchang.
 
======================================
 
विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
====================================
 
तिथि - एकादशी 01:06 AM बजे तक उपरान्त द्वादशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - मघा (गण्डमूल) 06:07 AM तक उपरान्त पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है ।।
 
योग - शुक्ल 19:24 PM बजे तक उपरान्त ब्रह्म योग है ।।
 
करण - बालव 01:06 AM बजे तक उपरान्त कौलव 12:44 PM तक उपरान्त तैतिल करण है ।।
 
चन्द्रमा - सिंह राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:34:38
 
सूर्यास्त - सायं 18:12:08
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 07:30 बजे से 09:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.12 बजे से 12.36 बजे तक ।।
 
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द्वादशी तिथि विशेष - द्वादशी तिथि को मसूर एवं त्रयोदशी तिथि को बैंगन नहीं खाना चाहिये । ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है । द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं । आज के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से किया गया पूजन, उनके नाम एवं स्तोत्रों (विष्णुसहस्रनाम) के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है ।।
 
आज के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये तथा भगवान नारायण का पूजन और जप आदि से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है । यह तिथि यशोबली और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है । भद्रा नाम से विख्यात ये तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
द्वादशी तिथि में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है । इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है । इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है । इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है । स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है । ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं ।।
 
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सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
सोमवार का विशेष - सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है । पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है ।।
 
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें - सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए । कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं । सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं । माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है ।।
 
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है । इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है । इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है । ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं । धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है ।।
 
इस दिन जन्‍म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्‍स्‍य पालन या मछली का व्‍यवाय, पत्‍थरों का व्‍यवसाय, कपड़े का व्‍यवसाय अधिक फलता है । इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्‍थर आदि से जुड़ा व्‍यवसाय ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में । जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा । हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती ।।
 
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चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग ।।...... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....    वेबसाईट पर पढ़ें:    &   ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 15 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 15 अक्टूबर 2017 दिन रविवार का पंचाग ।।
आज 15 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-15-October-ka-Panchang.
 
===============================================
 
विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
====================================
 
तिथि - दशमी 02:04 AM बजे तक उपरान्त एकादशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - आश्लेषा 06:21 AM तक उपरान्त मघा (दोनों गण्डमूल) नक्षत्र है ।।
 
योग - शुभ 21:06 PM बजे तक उपरान्त शुक्ल योग है ।।
 
करण - विष्टि 02:04 AM बजे तक उपरान्त बव 13:32 PM तक उपरान्त बालव करण है ।।
 
चन्द्रमा - कर्क राशि पर 06:21 AM बजे तक उपरान्त सिंह राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:34:47
 
सूर्यास्त - सायं 18:15
 
राहुकाल (अशुभ) - सायं 16:30 बजे से 18:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.12 बजे से 12.36 बजे तक ।।
 
=======================================
 
मित्रों, आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष कि रम्भा नाम का एकादशी व्रत है ।।
 
।। आप सभी एकादशी व्रतियों को हार्दिक शुभकामनायें ।।
 
एकादशी तिथि विशेष - शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है । एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है । एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है । एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये । इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है ।।
 
एकादशी तिथि के देवता विश्व देव होते हैं । नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है । एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है । इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है ।।
 
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है । मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं । इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है । इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है । समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है ।।
 
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मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें । अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते । अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर ।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं ।।
 
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये । भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है । इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है । क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है ।। 
 
दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
रविवार का विशेष - रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
विशेष जानकारी - मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये । साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये ।।
 
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मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है । इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है । इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं । इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं ।।
 
रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं । इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है । महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं । उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं । ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते । ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं । इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना । क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं । दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं । कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 14 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 14 अक्टूबर 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।
आज 14 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-14-October-ka-Panchang.
 
===============================================
 
विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
====================================
 
तिथि - नवमी 03:22 AM बजे तक उपरान्त दशमी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - पुष्य 06:54 AM तक उपरान्त आश्लेषा (गण्डमूल) नक्षत्र है ।।
 
योग - साध्य 23:04 AM बजे तक उपरान्त शुभ योग है ।।
 
करण - गर 03:22 AM बजे तक उपरान्त वणिज 14:41 PM तक उपरान्त विष्टि करण है ।।
 
चन्द्रमा - कर्क राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:34:36
 
सूर्यास्त - सायं 18:15
 
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.12 बजे से 12.36 बजे तक ।।
 
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दशमी तिथि विशेष - दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है । एकादशी को चावल और दाल नहीं खाना चाहिए । दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है । पूर्णा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है । दशमी को धन और धर्म प्रदान करने वाली तिथि माना जाता है । इस तिथि में वाहन खरीदना एवं सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये अत्यंत शुभ माना जाता है ।।
 
दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं । यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं । इस तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है । पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है । इस तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं ।।
 
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं । देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं । इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं ।।
 
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शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये ।।
 
शनिवार का विशेष - शनिवार के दिन तेल मर्दन "मालिश" करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है ।।
 
दिशाशूल - शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है । ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं । ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है ।।
 
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं । इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है । पारिवारिक जिम्मेदारियां भी अधिक रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं । सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है ।।
 
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वाभाव में साहस लक्षित होता है । सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं । ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं । इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्‍टर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये । इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं । ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं ।।
 
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शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है ।।....  आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....    वेबसाईट पर पढ़ें:    &   ब्लॉग पर पढ़ें:

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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 13 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं 13 अक्टूबर 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।
आज 13 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
====================================
 
तिथि - अष्टमी 05:00 AM बजे तक उपरान्त नवमी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - पुनर्वसु 07:46 AM तक उपरान्त पुष्य नक्षत्र है ।।
 
योग - शिव 03:45 AM बजे तक उपरान्त साध्य योग है ।।
 
करण - कौलव 05:00 AM बजे तक उपरान्त तैतिल 16:09 PM तक उपरान्त गर करण है ।।
 
चन्द्रमा - मिथुन राशि पर 02:02 AM बजे तक उपरान्त कर्क राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:34:16
 
सूर्यास्त - सायं 18:15
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 10:30 बजे से 12:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.12 बजे से 12.36 बजे तक ।।
 
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नवमी तिथि विशेष - नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है । नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है । इसकी अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं । रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें एवं चुनरी चढ़ायें उसके बाद दुर्गा सप्तशती के किसी भी सिद्ध मन्त्र का जप करें । इससे हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति यश एवं प्रतिष्ठा कि प्राप्ति तथा सभी मनोरथों कि पूर्ति होती है । नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं ।।
 
नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है । इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है । ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं । धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं ।।
 
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शुक्रवार का विशेष - शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
शुक्रवार का विशेष टिप्स - मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें । यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें । शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है । आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है । ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं । ये धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है । ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं ।।
 
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं । इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है । सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं । इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्‍स विशेषज्ञ, मनोचिकित्‍सक अथवा ज्‍वेलरी से सम्बन्धित व्‍यवसायों में आजमाना चाहिये । इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं । जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं । मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु ! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते ।।
 
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विवाह में हो रहे विलम्ब के लिये इन साधारण उपायों से अपने जीवन को रसमय बनायें ।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.....  वेबसाईट पर पढ़ें:    &   ब्लॉग पर पढ़ें:

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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 12 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 12 अक्टूबर 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।
आज 12 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-12-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - सप्तमी 06:56 AM बजे तक उपरान्त अष्टमी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - आर्द्रा 08:57 AM तक उपरान्त पुनर्वसु नक्षत्र है ।।
 
योग - परिघ 06:29 PM बजे तक उपरान्त शिव योग है ।।
 
करण - बव 06:56 AM बजे तक उपरान्त बालव 17:56 PM तक उपरान्त कौलव करण है ।।
 
चन्द्रमा - मिथुन राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:33:57
 
सूर्यास्त - सायं 18:16
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.12 बजे से 12.36 बजे तक ।।
 
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सप्तमी तिथि विशेष - सप्तमी तिथि को आँवला  एवं अष्टमी को नारियल त्याज्य बताया गया है । सप्तमी तिथि मित्रप्रद एवं शुभ तिथि मानी जाती है । इस तिथि के स्वामी भगवान सूर्य हैं तथा भद्रा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है । इस तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये । उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये । इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है एवं सभी कामनाओं की पूर्ति होती है ।।
 
मित्रों, सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है । सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये । सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है ।।
 
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है । इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है । ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं । इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं । धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं । ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं ।।
 
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अष्टमी तिथि विशेष - अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) त्याज्य होता है । अष्टमी तिथि बलवती एवं व्याधि नाशक तिथि मानी जाती है । इस तिथि के देवता भगवान शिव जी माने जाते हैं । इसलिये इस तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए ।।
 
कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है । घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है । जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
मंगलवार को छोड़कर बाकि किसी दिन की भी अष्टमी शुभ मानी गयी है परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती । इसलिये इस तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है । इस तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है, इसलिये भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं ।।
 
मित्रों, अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है । मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है । ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं । इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं । इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले ।।
 
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गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
गुरुवार का विशेष - गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है । साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है । इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है । अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है । इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए । इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है ।।
 
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है । ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है । साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है । ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है । उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है ।।
 
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गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है । इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है । इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है । जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं । परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है ।।
 
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है । जैसे - सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो । ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है ।।
 
दिशाशूल - गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है ।।
 
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें - गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है । जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है । गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें । इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे ।।
 
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बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं । ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं । ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं । गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं ।।
 
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं । ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं । यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं । गुरुवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्‍वभाव के होते हैं । ये जीवन को उत्‍सव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं ।।
 
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं । धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्‍वासघात नहीं कर सकते हैं । यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं । इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये । इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्‍पतिवार तथा शुभ अंक 4 होता है ।।
 
आज का विचार - मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं । परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं । इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 11 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 11 अक्टूबर 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।
आज 11 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-11-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - षष्ठी 09:10 AM बजे तक उपरान्त सप्तमी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - मृगशिरा 10:26 AM तक उपरान्त आर्द्रा नक्षत्र है ।।
 
योग - वरियान 09:26 PM बजे तक उपरान्त परिघ योग है ।।
 
करण - वणिज 09:10 AM बजे तक उपरान्त विष्टि 20:01 PM तक उपरान्त बव करण है ।।
 
चन्द्रमा - मिथुन राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:33:39
 
सूर्यास्त - सायं 18:17
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.13 बजे से 12.37 बजे तक ।।
 
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षष्ठी तिथि विशेष - मित्रों, षष्ठी तिथि को तैल कर्म एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है । षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है । इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है । विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है ।।
 
आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो भगवान कार्तिकेय का पूजन करें । मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि के सायंकाल में शिवमन्दिर में छः दीप दान करें । कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं एवं सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है ।।
 
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है । इन्हें देश-विदेश घुमने का कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं । इनकी यात्रायें मनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं । इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होता है और छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं ।।
 
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आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें - बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है । इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
बुधवार का विशेष - बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं । इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं । ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं । ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं । इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं ।।
 
ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं । किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं । वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है । अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है । बुधवार को जन्‍म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं । वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं ।।
 
इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं । इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये । इन क्षेत्रों में इन्हें अच्‍छी सफलता की संभावना होती है । इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा "आप" शब्द का, उसके बाद "हम" शब्द का और सबसे कम "मैं" शब्द का प्रयोग करना चाहिए । इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 10 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 10 अक्टूबर 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।
आज 10 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-10-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - पञ्चमी 11:39 AM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - रोहिणी 12:09 PM तक उपरान्त मृगशिरा नक्षत्र है ।।
 
योग - व्यतिपात 12:36 PM बजे तक उपरान्त वरियान योग है ।।
 
करण - तैतिल 11:39 AM बजे तक उपरान्त गर 22:23 PM तक उपरान्त वणिज करण है ।।
 
चन्द्रमा - वृषभ राशि पर 23:16 PM बजे तक उपरान्त राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:33:21
 
सूर्यास्त - सायं 18:19
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 15:00 बजे से 16:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त - दोपहर 12.13 बजे से 12.37 बजे तक ।।
 
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पञ्चमी तिथि विशेष - पञ्चमी को बिल्वफल एवं षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना त्याज्य बताया गया है । पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों त्याज्य है । पंचमी तिथि धनप्रद एवं शुभ तिथि मानी जाती है । इसके स्वामी नागराज वासुकी हैं तथा पूर्णा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है ।।
 
इस तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है । आज नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट की निवृत्ति हो जाती है यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है । अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है ।।
 
मित्रों, पंचमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है । इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है । इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है । इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है । ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं ।।
 
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मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए । मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये ।।
 
मंगलवार का विशेष - मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं । इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत अधिक होती है । ऐसे लोग जिम्मेदा‍‍रियों के कार्य में सफल भी होते हैं । खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं । यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है ।।
 
मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है । ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं । ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है । ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं । जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं । इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं ।।
 
मंगलवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति स्‍वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्‍य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांग‍ठनिक क्षमता वाले होते हैं । नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर अधिक सफल रहता है । इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरून और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है ।।
 
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मंगलवार का विशेष टिप्स - यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं । भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें ।।
 
मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें - मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 100 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता । जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 09 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 09 अक्टूबर 2017 दिन सोमवार का पंचाग ।।
आज 09 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-09-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - चतुर्थी 14:17 PM बजे तक उपरान्त पञ्चमी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - कृतिका 14:02 PM तक उपरान्त रोहिणी नक्षत्र है ।।
 
योग - सिद्धि 15:54 PM बजे तक उपरान्त व्यतिपात योग है ।।
 
करण - बव 03:38 AM बजे तक उपरान्त बालव 14:17 PM तक उपरान्त कौलव करण है ।।
 
चन्द्रमा - वृषभ राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:33:03
 
सूर्यास्त - सायं 18:19
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 07:30 बजे से 09:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.14 बजे से 12.38 बजे तक ।।
 
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चतुर्थी तिथि विशेष - चतुर्थी को मूली एवं पञ्चमी को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है । इस तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है । इसलिए चतुर्थी को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए । चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है । इसके स्वामी गणेश जी हैं तथा रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है ।।
 
इस तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है । आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है । आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
मित्रों, ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है । चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है । ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है । इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं ।।
 
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सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
सोमवार का विशेष - सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है । पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है ।।
 
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें - सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए । कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं । सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं । माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है ।।
 
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है । इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है । इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है । ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं । धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है ।।
 
इस दिन जन्‍म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्‍स्‍य पालन या मछली का व्‍यवाय, पत्‍थरों का व्‍यवसाय, कपड़े का व्‍यवसाय अधिक फलता है । इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्‍थर आदि से जुड़ा व्‍यवसाय ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में । जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा । हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 08 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 08 अक्टूबर 2017 दिन रविवार का पंचाग ।।
आज 08 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-08-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
====================================
 
तिथि - तृतीया 16:59 PM बजे तक उपरान्त चतुर्थी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - भरणी 15:59 PM तक उपरान्त कृतिका नक्षत्र है ।।
 
योग - वज्र 19:15 PM बजे तक उपरान्त सिद्धि योग है ।।
 
करण - वणिज 06:19 AM बजे तक उपरान्त विष्टि 16:59 PM तक उपरान्त बव करण है ।।
 
चन्द्रमा - मेष राशि पर 21:30 PM बजे तक उपरान्त वृषभ राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:32:46
 
सूर्यास्त - सायं 18:20
 
राहुकाल (अशुभ) - सायं 16:30 बजे से 18:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.14 बजे से 12.38 बजे तक ।।
 
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तृतीया तिथि विशेष - तृतीया तिथि में नमक एवं चतुर्थी को मूली का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य माना गया है । चतुर्थी को मूली एवं तिल का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है । तृतीया तिथि एक सबला और आरोग्यकारी तिथि मानी जाती है । इसकी स्वामी माता गौरी और कुबेर देवता हैं, जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है ।। 
 
तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है अन्यथा इस तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है । आज माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है । आज एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है । आज भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये । देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है ।।
 
मित्रों, तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है । इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है । ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है । इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है ।।
 
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मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें । अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते । अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर ।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं ।।
 
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये । भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है । इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है । क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है ।। 
 
दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
रविवार का विशेष - रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
विशेष जानकारी - मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये । साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये ।।
 
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मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है । इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है । इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं । इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं ।।
 
रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं । इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है । महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं । उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं । ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते । ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं । इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना । क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं । दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं । कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर ।।
 
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सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है ।।....  आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....  वेबसाईट पर पढ़ें:   &  ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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आज 07 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 07 अक्टूबर 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।
आज 07 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-07-October-ka-Panchang.

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विक्रम संवत् - 2074.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.

शक - 1939.

अयन - दक्षिणायन.

गोल - सौम्य.

ऋतु - शरद.

मास - कार्तिक.

पक्ष - कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.

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तिथि - द्वितीया 19:38 PM बजे तक उपरान्त तृतीया तिथि है ।।

नक्षत्र - अश्विनी (गण्डमूल) 17:52 PM तक उपरान्त भरणी नक्षत्र है ।।

योग - हर्षण 22:33 PM बजे तक उपरान्त वज्र योग है ।।

करण - तैतिल 08:53 AM बजे तक उपरान्त गर 19:38 PM तक उपरान्त वणिज करण है ।।

चन्द्रमा - मेष राशि पर ।।

सूर्योदय - प्रातः 06:32:29

सूर्यास्त - सायं 18:20

राहुकाल (अशुभ) - सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक ।।

विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.14 बजे से 12.38 बजे तक ।।

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द्वितीया तिथि विशेष - मित्रों, द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है । द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है तथा इसके स्वामी ब्रह्माजी हैं । भद्रा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है ।।

प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये । वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है । परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है । इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये ।।

मित्रों, ज्योतिषशास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है । इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है । इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं । इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं । इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो । ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है ।।

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शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये ।।

शनिवार का विशेष - शनिवार के दिन तेल मर्दन "मालिश" करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।

शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।

शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है ।।

दिशाशूल - शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।

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जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है । ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं । ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है ।।

शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं । इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है । पारिवारिक जिम्मेदारियां भी अधिक रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं । सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है ।।

शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वाभाव में साहस लक्षित होता है । सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं । ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं । इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्‍टर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये । इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है ।।

आज का सुविचार - मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं । ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं ।।

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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 06 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।। 
आज का लेख एवं 06 अक्टूबर 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।
आज 06 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-06-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - कार्तिक.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - प्रतिपदा 22:04 PM बजे तक उपरान्त द्वितीया तिथि है ।।
 
नक्षत्र - रेवती 19:32 PM तक उपरान्त अश्विनी (दोनों गण्डमूल) नक्षत्र है ।।
 
योग - ध्रुव 04:37 AM बजे तक उपरान्त व्याघात योग है ।।
 
करण - बालव 11:11 AM बजे तक उपरान्त कौलव 22:04 PM तक उपरान्त तैतिल करण है ।।
 
चन्द्रमा - मीन राशि पर 19:32 PM बजे तक उपरान्त मेष राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:32:12
 
सूर्यास्त - सायं 18:21
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 10:30 बजे से 12:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.14 बजे से 12.38 बजे तक ।।
 
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प्रतिपदा तिथि विशेष - प्रतिपदा को कद्दू एवं कूष्माण्ड तथा द्वितीया तिथि को कटेरी के फल का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है । प्रतिपदा तिथि वृद्धि और सिद्धिप्रद तिथि मानी जाती है । इसके स्वामी अग्नि देवता हैं और यह तिथि नन्दा नाम से विख्यात है ।।
 
मित्रों, यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है । आज अग्निदेव से धन एवं तेज प्राप्त करने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति हेतु घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये ।।
 
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है । ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है । ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं । आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग ।।
 
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शुक्रवार का विशेष - शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
शुक्रवार का विशेष टिप्स - मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें । यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें । शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है । आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है । ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं । ये धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है । ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं ।।
 
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं । इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है । सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं । इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्‍स विशेषज्ञ, मनोचिकित्‍सक अथवा ज्‍वेलरी से सम्बन्धित व्‍यवसायों में आजमाना चाहिये । इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं । जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं । मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु ! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 05 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 05 अक्टूबर 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।
आज 05 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-05-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
====================================
 
तिथि - चतुर्दशी 01:48 AM बजे तक उपरान्त पूर्णिमा तिथि है ।।
 
नक्षत्र - उत्तराभाद्रपद 20:51 PM तक उपरान्त रेवती नक्षत्र है ।।
 
योग - वृद्धि 07:09 AM बजे तक उपरान्त ध्रुव योग है ।।
 
करण - वणिज 01:48 AM बजे तक उपरान्त विष्टि 13:04 PM तक उपरान्त बव करण है ।।
 
चन्द्रमा - मीन राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:31:56
 
सूर्यास्त - सायं 18:22
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.14 बजे से 12.38 बजे तक ।।
 
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पूर्णिमा तिथि विशेष - पूर्णिमा को घी एवं प्रतिपदा को कुष्मांड खाना एवं दान करना दोनों वर्जित बताया गया है । पूर्णिमा तिथि एक सौम्य और पुष्टिदा तिथि मानी जाती है । इसके देवता चन्द्रमा हैं तथा यह पूर्णा नाम से विख्यात है । यह शुक्ल पक्ष में ही होती है और पूर्ण शुभ फलदायी मानी गयी है ।।
 
हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर मास की पूर्णिमा को कोई-न-कोई व्रत-त्यौहार होता ही है । जिनकी कुण्डली में चन्द्रमा की दशा चल रही हो उसे पूर्णिमा के दिन उपवास रखना अर्थात व्रत करना चाहिये । जिनके बच्चे कफ रोगी हों अर्थात सर्दी, जुकाम, खाँसी और निमोनियाँ समय-समय पर होती रहती हो उनकी माँ को वर्षपर्यन्त पूर्णिमा का व्रत करना और चन्द्रोदय के बाद चंद्रार्घ्य देकर व्रत तोड़ना चाहिये ।।
 
पूर्णिमा माता लक्ष्मी को विशेष प्रिय होती है । इसलिये आज के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से मनोवान्छित कामनाओं की सिद्धि होती है । पूर्णिमा को शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बिल्वपत्र, शमीपत्र, फुल तथा फलादि चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहती है । पूर्णिमा को शिव पूजन में सफ़ेद चन्दन में केशर घिसकर शिवलिंग पर चढ़ाने से घर के पारिवारिक एवं आन्तरिक कलह और अशान्ति दूर होती है ।।
 
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म पूर्णिमा तिथि को होता है, वह व्यक्ति पूर्ण चन्द्र की तरह आकर्षक और मोहक व्यक्तित्व का स्वामी होता है । इनकी बुद्धि उच्च स्तर की होती है । ऐसे जातक अच्छे खान पान के शौकीन होते हैं तथा ये सदा ही अपने कर्म में जुटे रहते हैं । ऐसे लोग अत्यधिक परिश्रमी होते हैं और इसी वजह से धनवान भी होते हैं । परन्तु इनमें एक बहुत बड़ी कमी ये होती है, कि ये सदैव परायी स्त्रियों पर मोहित रहते हैं ।।
 
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गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
गुरुवार का विशेष - गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है । साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है । इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है । अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है । इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए । इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है ।।
 
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है । ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है । साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है । ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है । उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है ।।
 
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गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है । इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है । इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है । जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं । परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है ।।
 
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है । जैसे - सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो । ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है ।।
 
दिशाशूल - गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है ।।
 
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें - गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है । जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है । गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें । इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे ।।
 
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बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं । ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं । ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं । गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं ।।
 
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं । ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं । यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं । गुरुवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्‍वभाव के होते हैं । ये जीवन को उत्‍सव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं ।।
 
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं । धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्‍वासघात नहीं कर सकते हैं । यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं । इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये । इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्‍पतिवार तथा शुभ अंक 4 होता है ।।
 
आज का विचार - मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं । परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं । इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है ।।
 
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जन्मकुण्डली के अनुसार आपके जीवन में धन कैसे और कब आयेगा ?।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.....   वेबसाईट पर पढ़ें:   &   ज्योतिष के टिप्स:   &   ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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आज का लेख एवं आज 04 अक्टूबर 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 04 अक्टूबर 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।
आज 04 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - त्रयोदशी 02:50 AM बजे तक उपरान्त चतुर्दशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - पूर्वाभाद्रपद 21:40 PM तक उपरान्त उत्तराभाद्रपद नक्षत्र है ।।
 
योग - गण्ड 09:14 AM बजे तक उपरान्त वृद्धि योग है ।।
 
करण - तैतिल 02:50 AM बजे तक उपरान्त गर 14:24 PM तक उपरान्त वणिज करण है ।।
 
चन्द्रमा - कुम्भ राशि पर 15:47 PM बजे तक उपरान्त मीन राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:31:40
 
सूर्यास्त - सायं 18:23
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.15 बजे से 12.39 बजे तक ।।
 
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चतुर्दशी तिथि विशेष - चतुर्दशी को शहद और अमावस्या को मैथुन त्याज्य होता है । चतुर्दशी तिथि क्रूरा और उग्रा तिथि मानी जाती है, इसके देवता शिवजी हैं । चतुर्दशी को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन अर्चन एवं अभिषेक करना चाहिये । सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत रुद्राभिषेक करवायें ।।
 
आज की तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है । जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है । रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है ।।
 
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है । इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है । इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है । ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं । देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है ।।
 
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आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें - बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है । इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
बुधवार का विशेष - बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं । इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं । ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं । ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं । इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं ।।
 
ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं । किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं । वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है । अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है । बुधवार को जन्‍म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं । वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं ।।
 
इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं । इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये । इन क्षेत्रों में इन्हें अच्‍छी सफलता की संभावना होती है । इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा "आप" शब्द का, उसके बाद "हम" शब्द का और सबसे कम "मैं" शब्द का प्रयोग करना चाहिए । इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 03 अक्टूबर 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 03 अक्टूबर 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।
आज 03 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-03-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - द्वादशी 03:09 AM बजे तक उपरान्त त्रयोदशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - शतभिषा 21:52 PM तक उपरान्त पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र है ।।
 
योग - शूल 10:46 AM बजे तक उपरान्त गण्ड योग है ।।
 
करण - बालव 03:09 AM बजे तक उपरान्त कौलव 15:05 PM तक उपरान्त तैतिल करण है ।।
 
चन्द्रमा - कुम्भ राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:31:25
 
सूर्यास्त - सायं 18:24
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 15:00 बजे से 16:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त - दोपहर 12.15 बजे से 12.39 बजे तक ।।
 
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त्रयोदशी तिथि विशेष - त्रयोदशी तिथि को बैंगन और चतुर्दशी को शहद त्याज्य होता है । त्रयोदशी तिथि जयकारी और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है । इसके देवता मदन (कामदेव) हैं । जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है । शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव ।।
 
कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं । जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये । कामदेव का मन्त्र - ॐ रतिप्रियायै नम: । अथवा - ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि । तन्नो अनंग: प्रचोदयात् ।।
 
आज की तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है । आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से । जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये । जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये ।।
 
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है । यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं ।।
 
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मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए । मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये ।।
 
मंगलवार का विशेष - मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं । इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत अधिक होती है । ऐसे लोग जिम्मेदा‍‍रियों के कार्य में सफल भी होते हैं । खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं । यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है ।।
 
मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है । ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं । ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है । ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं । जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं । इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं ।।
 
मंगलवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति स्‍वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्‍य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांग‍ठनिक क्षमता वाले होते हैं । नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर अधिक सफल रहता है । इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरून और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है ।।
 
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मंगलवार का विशेष टिप्स - यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं । भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें ।।
 
मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें - मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 100 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता । जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 02 सितम्बर 2017 दिन सोमवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 02 सितम्बर 2017 दिन सोमवार का पंचाग ।।
आज 02 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-02-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - एकादशी 02:44 AM बजे तक उपरान्त द्वादशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - धनिष्ठा 21:22 PM तक उपरान्त शतभिषा नक्षत्र है ।।
 
योग - धृति 11:44 AM बजे तक उपरान्त शूल योग है ।।
 
करण - विष्टि 02:44 AM बजे तक उपरान्त बव 15:02 PM तक उपरान्त बालव करण है ।।
 
चन्द्रमा - मकर राशि पर 08:51 AM बजे तक उपरान्त कुम्भ राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:31:09
 
सूर्यास्त - सायं 18:25
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 07:30 बजे से 09:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.16 बजे से 12.40 बजे तक ।।
 
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द्वादशी तिथि विशेष - द्वादशी तिथि को मसूर एवं त्रयोदशी तिथि को बैंगन नहीं खाना चाहिये । ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है । द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं । आज के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से किया गया पूजन, उनके नाम एवं स्तोत्रों (विष्णुसहस्रनाम) के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है ।।
 
आज के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये तथा भगवान नारायण का पूजन और जप आदि से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है । यह तिथि यशोबली और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है । भद्रा नाम से विख्यात ये तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
द्वादशी तिथि में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है । इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है । इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है । इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है । स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है । ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं ।।
 
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सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
सोमवार का विशेष - सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है । पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है ।।
 
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें - सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए । कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं । सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं । माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है ।।
 
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है । इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है । इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है । ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं । धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है ।।
 
इस दिन जन्‍म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्‍स्‍य पालन या मछली का व्‍यवाय, पत्‍थरों का व्‍यवसाय, कपड़े का व्‍यवसाय अधिक फलता है । इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्‍थर आदि से जुड़ा व्‍यवसाय ।।
 
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आज का सुविचार - मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में । जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा । हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती ।।
 
चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग ।।...... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....   ज्योतिष के ट्रिक्स:    &   वेबसाईट पर पढ़ें:    &   ब्लॉग पर पढ़ें:
 
अथ श्रीचन्द्रमा अष्टोत्तरशतनामावलि: -   ज्योतिष के ट्रिक्स:   &   वेबसाईट पर पढ़ें:    &   ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज 01 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 01 अक्टूबर 2017 दिन रविवार का पंचाग ।।
आज 01 अक्टूबर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-01-October-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - दशमी 01:36 AM बजे तक उपरान्त एकादशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - श्रवण 20:09 PM तक उपरान्त धनिष्ठा नक्षत्र है ।।
 
योग - सुकर्मा 12:07 PM बजे तक उपरान्त धृति योग है ।।
 
करण - गर 01:36 AM बजे तक उपरान्त वणिज 14:15 PM तक उपरान्त विष्टि करण है ।।
 
चन्द्रमा - मकर राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:30:54
 
सूर्यास्त - सायं 18:26
 
राहुकाल (अशुभ) - सायं 16:30 बजे से 18:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.16 बजे से 12.40 बजे तक ।।
 
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मित्रों, आज अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि पापांकुशा नाम का एकादशी व्रत है । आप सभी एकादशी व्रतियों को हार्दिक शुभकामनायें ।।
 
एकादशी तिथि विशेष - शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है । एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है । एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है । एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये । इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है ।।
 
एकादशी तिथि के देवता विश्व देव होते हैं । नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है । एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है । इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है ।।
 
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है । मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं । इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है । इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है । समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है ।।
 
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मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें । अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते । अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर ।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं ।।
 
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये । भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है । इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है । क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है ।। 
 
दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
रविवार का विशेष - रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
विशेष जानकारी - मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये । साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये ।।
 
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मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है । इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है । इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं । इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं ।।
 
रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं । इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है । महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं । उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं । ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते । ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं । इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना । क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं । दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं । कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर ।।
 
सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है ।।....  आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....    वेबसाईट पर पढ़ें:   &  ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 30 सितम्बर 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 30 सितम्बर 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।
आज 30 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-30-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
====================================
 
तिथि - दशमी 25:36 PM बजे तक उपरान्त एकादशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - उत्तराषाढ़ा 18:15 PM तक उपरान्त श्रवण नक्षत्र है ।।
 
योग - अतिगण्ड 11:58 AM बजे तक उपरान्त सुकर्मा योग है ।।
 
करण - तैतिल 12:47 PM तक उपरान्त गर करण है ।।
 
चन्द्रमा - मकर राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:30:39
 
सूर्यास्त - सायं 18:27
 
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.19 बजे से 12.43 बजे तक ।।
 
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दशमी तिथि विशेष - दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है । एकादशी को चावल और दाल नहीं खाना चाहिए । दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है । पूर्णा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है । दशमी को धन और धर्म प्रदान करने वाली तिथि माना जाता है । इस तिथि में वाहन खरीदना एवं सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये अत्यंत शुभ माना जाता है ।।
 
दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं । यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं । इस तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है । पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है । इस तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं ।।
 
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं । देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं । इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं ।।
 
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शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये ।।
 
शनिवार का विशेष - शनिवार के दिन तेल मर्दन "मालिश" करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है ।।
 
दिशाशूल - शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है । ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं । ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है ।।
 
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं । इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है । पारिवारिक जिम्मेदारियां भी अधिक रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं । सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है ।।
 
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वाभाव में साहस लक्षित होता है । सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं । ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं । इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्‍टर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये । इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं । ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं 29 सितम्बर 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।। 
आज का लेख एवं 29 सितम्बर 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।
आज 29 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-29-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - नवमी 23:50 PM बजे तक उपरान्त दशमी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - पूर्वाषाढ़ा 15:48 PM तक उपरान्त उत्तराषाढ़ा नक्षत्र है ।।
 
योग - शोभन 11:25 AM बजे तक उपरान्त अतिगण्ड योग है ।।
 
करण - बालव 10:46 AM तक उपरान्त कौलव 23:50 PM तक उपरान्त तैतिल करण है ।।
 
चन्द्रमा - धनु राशि पर 22:27 PM बजे तक उपरान्त मकर राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:30:25
 
सूर्यास्त - सायं 18:27
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 10:30 बजे से 12:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.16 बजे से 12.40 बजे तक ।।
 
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मित्रों, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं । जिनका उल्लेख भागवत पुराण में भी मिलता है । इसके अलावा मार्कंडेय पुराण एवं ब्रह्ववैवर्त पुराण में भी वर्णित है और भी अनेक प्रकार की सिद्धियों का वर्णन है मिलता है ।।
 
जैसे 1. सर्वकामावसायिता 2. सर्वज्ञत्व 3. दूरश्रवण 4. परकायप्रवेशम् 5. वाक्‌सिद्धि 6. कल्पवृक्षत्व 7. सृष्टि 8. संहारकरणसामर्थ्य 9. अमरत्व 10 सर्वन्यायकत्व. कुल मिलाकर 18 प्रकार की सिद्धियों का हमारे शास्त्रों में वर्णन मिलता है । ये सिद्धियाँ जिन्होंने भी इस संसार में पायी है, वो भगवान की तरह पूजे गये हैं इस देश में ।।
 
परन्तु इस सिद्धियों की प्राप्ति हेतु लगभग इन्सान का सबकुछ खो गया है तब इन सिद्धियों की प्राप्ति हुई है । लेकिन कुछ लोगों को इन सिद्धियों से साक्षात्कार सहज ही हो गया है । जिन्हें सहज ही इन सिद्धियों की प्राप्ति हुई है वो माता दुर्गा के नवम रूप माता सिद्धिदात्री के उपासक रहे हैं ।।
 
सम्पूर्ण उपासना का फल एवं समृद्धि तथा सिद्धियों को देनेवाली माता सिद्धिदात्री ।। पढ़ें आज का विशिष्ट लेख - वेबसाईट पर पढ़ें:   &  ज्योतिष के ट्रिक्स पर पढ़ें:   &  ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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नवमी तिथि विशेष - नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है । नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है । इसकी अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं । रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें एवं चुनरी चढ़ायें उसके बाद दुर्गा सप्तशती के किसी भी सिद्ध मन्त्र का जप करें । इससे हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति यश एवं प्रतिष्ठा कि प्राप्ति तथा सभी मनोरथों कि पूर्ति होती है । नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं ।।
 
नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है । इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है । ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं । धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं ।।
 
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शुक्रवार का विशेष - शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
शुक्रवार का विशेष टिप्स - मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें । यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें । शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है । आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है । ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं । ये धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है । ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं ।।
 
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं । इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है । सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं । इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्‍स विशेषज्ञ, मनोचिकित्‍सक अथवा ज्‍वेलरी से सम्बन्धित व्‍यवसायों में आजमाना चाहिये । इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं । जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं । मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु ! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते ।।
 
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विवाह में हो रहे विलम्ब के लिये इन साधारण उपायों से अपने जीवन को रसमय बनायें ।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.....  वेबसाईट पर पढ़ें:   &   ज्योतिष के ट्रिक्स:    &  ब्लॉग पर पढ़ें:
 
"वृषभ राशि की कुण्डली, सम्पूर्ण विवेचन, भाग-3."।।"  -  My Lalest video.

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दुर्गा सप्तशती का पाठ करें -  Sampurna Durga Saptashati.
 
अथ सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् का पाठ इस लिंक पर करें -  Kunjika Stotram.
 
अथ श्री दुर्गा अष्टोत्तरशत नामावलिः -  Durga 108 Name.
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 28 सितम्बर 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 28 सितम्बर 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।
आज 28 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-28-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - अष्टमी 21:36 PM बजे तक उपरान्त नवमी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - मूल (गण्डमूल) 12:57 PM तक उपरान्त पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र है ।।
 
योग - सौभाग्य 10:35 AM बजे तक उपरान्त शोभन योग है ।।
 
करण - विष्टि 08:24 AM तक उपरान्त बव 21:36 PM तक उपरान्त बालव करण है ।।
 
चन्द्रमा - धनु राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:30:10
 
सूर्यास्त - सायं 18:28
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.17 बजे से 12.41 बजे तक ।।
 
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मित्रों, जगतजननी, जगदम्बा, माता दुर्गा की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है । दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की पूजा-उपासना का विधान है ।।
 
इनकी शक्ति अमोघ और तत्काल फलदायिनी एवं सिद्धिदायिनी है । इनकी उपासना से भक्तों के सभी पापों का क्षय हो जाता है और पूर्वकृत पाप भी विनष्ट हो जाते हैं ।।
 
माता के भक्तों को भविष्य में पाप-संताप, दैन्य-दुःख उसके पास कभी नहीं आते । वह सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है ।।
 
मित्रों, माता महागौरी ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी । जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था । देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इन्हें स्वीकार किया ।।
 
कहा जाता है, कि स्वयं शिव जी ने इनके शरीर को गंगा-जल से धोया था । कहते हैं, कि तब माता का स्वरुप विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण का हो गया था और तभी से इनका नाम गौरी पड़ा ।।
 
माता महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती हैं । देवता, ऋषि तथा मनुष्य सभी देवी के इसी रूप की प्रार्थना इस मन्त्र से करते हैं "सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते ।।"
 
आठवें दिन का भोग - जैसा की आप जानते हैं, आठवां दिन या अष्टमी देवी महागौरी को समर्पित होता है । इस दिन भक्तजन श्रद्धा से देवी माँ को नारियल प्रसाद के रूप में चढ़ाते हैं ।।
 
आठवीं शक्ति "माँ महागौरी" हैं भगवान शिव के कहने पर माँ महाकाली ने तपस्या कर ब्रह्मदेव सें अपने लिए गौर वर्ण का वरदान माँगा था । माँ महागौरी को नारियल, खिचड़ी एवं खीर का भोग भी बहुत ही प्रिय है ।।
 
आज माता महागौरी को कहीं-कहीं नारियल के आलावा हलवे का भोग भी लगाया जाता है बाद में उस नारियल को किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण को दक्षिणा सहित दान कर दिया जाता है ।।
 
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अष्टमी तिथि विशेष - अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) त्याज्य होता है । अष्टमी तिथि बलवती एवं व्याधि नाशक तिथि मानी जाती है । इस तिथि के देवता भगवान शिव जी माने जाते हैं । इसलिये इस तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए ।।
 
कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है । घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है । जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
मंगलवार को छोड़कर बाकि किसी दिन की भी अष्टमी शुभ मानी गयी है परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती । इसलिये इस तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है । इस तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है, इसलिये भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं ।।
 
मित्रों, अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है । मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है । ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं । इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं । इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले ।।
 
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गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
गुरुवार का विशेष - गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है । साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है । इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है । अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है । इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए । इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है ।।
 
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है । ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है । साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है । ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है । उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है ।।
 
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गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है । इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है । इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है । जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं । परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है ।।
 
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है । जैसे - सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो । ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है ।।
 
दिशाशूल - गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है ।।
 
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें - गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है । जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है । गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें । इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे ।।
 
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बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं । ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं । ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं । गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं ।।
 
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं । ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं । यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं । गुरुवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्‍वभाव के होते हैं । ये जीवन को उत्‍सव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं ।।
 
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं । धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्‍वासघात नहीं कर सकते हैं । यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं । इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये । इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्‍पतिवार तथा शुभ अंक 4 होता है ।।
 
आज का विचार - मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं । परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं । इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 27 सितम्बर 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 27 सितम्बर 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।
आज 27 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-27-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - सप्तमी 19:08 PM बजे तक उपरान्त अष्टमी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - ज्येष्ठा 09:58 AM तक उपरान्त मूल (दोनों गण्डमूल) नक्षत्र है ।।
 
योग - आयुष्मान 09:39 AM बजे तक उपरान्त सौभाग्य योग है ।।
 
करण - गर 05:55 AM तक उपरान्त वणिज 19:08 PM तक उपरान्त विष्टि करण है ।।
 
चन्द्रमा - वृश्चिक राशि पर 09:58 AM बजे तक उपरान्त धनु राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:29:56
 
सूर्यास्त - सायं 18:29
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.17 बजे से 12.41 बजे तक ।।

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आज सप्तमी की रात्रि को "सिद्धियों" की रात्री भी कही जाती है । हर प्रकार की ऋद्धि-सिद्धि देनेवाली माता कालरात्रि का यह सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए अति महत्वपूर्ण होता है ।।

जगतजननी, जगत्कल्याणि, जगन्माता श्री दुर्गा का सप्तम रूप माता श्री कालरात्रि हैं । ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं ।।

भक्तों की सामान्य पूजा मात्र से ही उनके सभी दु:ख-संताप आदि माता भगवती हर लेती हैं । नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है । संसार में काल का नाश करने वाली देवी "कालरात्री" ही हैं ।।

दुश्मनों का नाश करने वाली तथा मनोवांछित फल देकर अपने भक्तों को संतुष्ट करती हैं । दुर्गा पूजा का सातवां दिन आश्विन शुक्ल सप्तमी माता कालरात्रि की उपासना का विधान है ।।

माता कालरात्रि को गुड से निर्मित मिष्टान्न का भोग अत्यन्त प्रिय होता है । लेकिन भोग लगाने के बाद उसे दान कर देना चाहिये । भोग की एक थाली दक्षिणा और भोजन सहित किसी श्रेष्ठ ब्रह्माण को दान कर देना चाहिये ।।

गुजरात में होनेवाला एक फल जिसे चीकू कहते हैं, माता कालरात्रि को अत्यन्त प्रिय होता है । उसे माता को भोग के रूप में अर्पित करके शाम को प्रसाद के रूप में ग्रहण किये जायें तो उत्तम फल की प्राप्ति होती है ।।

माता की कृपा से ग्रह जनित बाधायें सहजता से दूर हो जाती है और सांसारिक भय भक्त के समीप नहीं आते । साथ ही अकाल मृत्यु, भूत-प्रेत बाधा, व्यापार, नौकरी, अग्निभय, शत्रुभय आदि से छुटकारा प्राप्त होता है ।।

आज के लिए विशेष उपाय - आज सप्तमी के दिन माता कालरात्रि को दूध में शहद मिलाकर भोग लगाने से शनिदेव के बुरे प्रभाव का अन्त हो जाता है ।।
 
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सप्तमी तिथि विशेष - सप्तमी तिथि को आँवला  एवं अष्टमी को नारियल त्याज्य बताया गया है । सप्तमी तिथि मित्रप्रद एवं शुभ तिथि मानी जाती है । इस तिथि के स्वामी भगवान सूर्य हैं तथा भद्रा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है । इस तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये । उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये । इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है एवं सभी कामनाओं की पूर्ति होती है ।।
 
मित्रों, सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है । सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये । सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है ।।
 
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है । इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है । ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं । इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं । धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं । ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं ।।
 
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आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें - बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है । इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
बुधवार का विशेष - बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं । इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं । ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं । ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं । इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं ।।
 
ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं । किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं । वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है । अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है । बुधवार को जन्‍म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं । वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं ।।
 
इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं । इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये । इन क्षेत्रों में इन्हें अच्‍छी सफलता की संभावना होती है । इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा "आप" शब्द का, उसके बाद "हम" शब्द का और सबसे कम "मैं" शब्द का प्रयोग करना चाहिए । इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 26 सितम्बर 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 26 सितम्बर 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।
आज 26 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-26-September-ka-Panchang.
 
 
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विक्रम संवत् - 2074.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
शक - 1939.
अयन - दक्षिणायन.
गोल - सौम्य.
ऋतु - शरद.
मास - अश्विन.
पक्ष - शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
 
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तिथि - षष्ठी 16:41 PM बजे तक उपरान्त सप्तमी तिथि है ।।
नक्षत्र - अनुराधा 07:03 AM तक उपरान्त ज्येष्ठा (गण्डमूल) नक्षत्र है ।।
योग - प्रीति 08:47 AM बजे तक उपरान्त आयुष्मान योग है ।।
करण - कौलव 03:32 AM तक उपरान्त तैतिल 16:41 PM तक उपरान्त गर करण है ।।
 
चन्द्रमा - वृश्चिक राशि पर ।।
सूर्योदय - प्रातः 06:29:42
सूर्यास्त - सायं 18:30
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 15:00 बजे से 16:30 बजे तक ।।
विजय मुहूर्त - दोपहर 12.17 बजे से 12.41 बजे तक ।।
 
 
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आज शारदीय नवरात्रा की षष्ठी अर्थात छठा दिन माता कात्यायनी की उपासनापूजा का दिन है । आज माता को केले एवं शहद का भोग लगाएं और साथ ही दान भी करें । केले का भोग लगाने से परिवार में सुख-शांति रहेगी एवं शहद के भोग से धन प्राप्ति के योग बनते हैं ।।
 
आज विशेष उपाय में माता कात्यायनी को लौकी का भोग लगाना चाहिये । साथ एक विशिष्ट उपाय करना है - सुबह 06 बजे से 9:00 बजे के बीच में 6 अमरुद माता को अर्पित करें और शाम को प्रसाद के रूप उसे स्वयं भी ग्रहण करें और अन्य लोगों को भी बाटें ।।
 
आज षष्ठी को माला, पुष्पादि के साथ ही माता को प्रिय लाल रंग के गुलाब का फुल अवश्य अर्पित करें । मनोकामनाओं की तत्काल सिद्धि हेतु आज के दिन छोटी कन्याओं को खेल-सामग्री उपहार स्वरुप देना चाहिए ।।
 
आज के दिन आप माताजी के पूजन हेतु लाल एवं सफ़ेद रंग के भी वस्त्र धारण करके पूजन करें तो माताजी की प्रशन्नता प्राप्त होती है । पूजन के उपरान्त सिद्धि हेतु नवार्ण मन्त्र का "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" अधिकाधिक जप करें ।।
 
जिनकी जन्म कुंडली में शुक्र प्रतिकूल भाव, प्रतिकूल राशि या प्रतिकूल ग्रहों के साथ बैठा हो उन लोगों को आज मां कात्यायनी की प्रशन्नता हेतु उपरोक्त मंत्र का जप करने से शुक्र ग्रह की प्रतिकूलता का निवारण हो जाता है । विशेषकर वृषभ और तुला राशि के लोग मां कात्यायनी की आराधना करें तो संपूर्ण समस्याओं का निवारण हो जाता है ।।
 
 
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षष्ठी तिथि विशेष - मित्रों, षष्ठी तिथि को तैल कर्म एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है । षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है । इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है । विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है ।।
 
आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो भगवान कार्तिकेय का पूजन करें । मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि के सायंकाल में शिवमन्दिर में छः दीप दान करें । कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं एवं सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है ।।
 
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है । इन्हें देश-विदेश घुमने का कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं । इनकी यात्रायें मनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं । इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होता है और छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं ।।
 
 
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मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए । मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये ।।
 
मंगलवार का विशेष - मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
 
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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं । इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत अधिक होती है । ऐसे लोग जिम्मेदा‍‍रियों के कार्य में सफल भी होते हैं । खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं । यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है ।।
 
मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है । ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं । ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है । ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं । जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं । इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं ।।
 
मंगलवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति स्‍वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्‍य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांग‍ठनिक क्षमता वाले होते हैं । नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर अधिक सफल रहता है । इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरून और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है ।।
 
 
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मंगलवार का विशेष टिप्स - यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं । भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें ।।
 
मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें - मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 100 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता । जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा ।।
 
 
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अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।।..... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....  ज्योतिष के टिप्स:   &  एस्ट्रो क्लासेस:  &  ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 25 सितम्बर 2017 दिन सोमवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।। 
आज का लेख एवं आज 25 सितम्बर 2017 दिन सोमवार का पंचाग ।।
आज 25 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-25-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - पञ्चमी 14:28 PM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - विशाखा 04:26 AM तक उपरान्त अनुराधा नक्षत्र है ।।
 
योग - विष्कुम्भ 08:09 AM बजे तक उपरान्त प्रीति योग है ।।
 
करण - बव 01:30 AM तक उपरान्त बालव 14:28 PM तक उपरान्त कौलव करण है ।।
 
चन्द्रमा - वृश्चिक राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:29:28
 
सूर्यास्त - सायं 18:31
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 07:30 बजे से 09:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.18 बजे से 12.42 बजे तक ।।
 
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आज शारदीय नवरात्रा की पञ्चमी तिथि देवी स्कंदमाता का दिन होता है । मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता का विशिष्ट पूजन भक्तों को परम शांति एवं सुख का अनुभव कराती है ।।
 
स्कंदमाता की उपासना से मनुष्य के मन की सारी कुण्ठा जीवन के कलह और मन के द्वेष भाव समाप्त हो जाते हैं और मृत्यु लोक में ही स्वर्ग की भांति परम शांति एवं सुख का अनुभव प्राप्त होता है ।।
 
इनकी पूजा का सबसे अच्छा समय दोपहर से पूर्व अर्थात सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच में होता है । इनकी पूजा सफेद कनेर के फूलों से करनी चाहिए । इन्हें मूंग से बने मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए तथा श्रृंगार में इन्हें हरे रंग की चूडियां अर्पित करना शुभ रहता है ।।
 
मां स्कन्दमाता की उपासना से मंदबुद्धि व्यक्ति को बुद्धि और चेतना प्राप्त होती है । पारिवारिक सुख-शांति मिलती है, इनकी कृपा से ही तथा रोगियों को रोगों से मुक्ति मिलती है साथ ही समस्त व्याधियों का अंत होता है ।।
 
मां स्कन्दमाता की साधना का संबंध बुद्ध ग्रह से होता है । कालपुरूष सिद्धांत के अनुसार कुण्डली में बुद्ध ग्रह का संबंध तीसरे और छठे घर से होता है अतः मां स्कन्दमाता की साधना का संबंध व्यक्ति की सेहत, बुद्धिमत्ता, चेतना, तंत्र और रोगमुक्ति से होता है ।।
 
जिन व्यक्तियों कि कुण्डली में बुद्ध ग्रह नीच अथवा मंगल से पीड़ित होता है अथवा मीन राशि में आकर नीच एवं पीड़ित होता है । उन्हें आज मां स्कन्दमाता की पूजा से सर्वश्रेष्ठ फल की प्राप्ति होती है । आज मां स्कन्दमाता कि पूजा-साधना से व्यक्ति के असाध्य रोगों का निवारण होता है तथा गृहक्लेश से मुक्ति मिलती है ।।
 
जिन व्यक्ति की आजीविका का संबंध प्रशासन मैनेजमैंट, कमर्शियल सर्विसेज, वाणिज्य विभाग, बैंकिंग क्षेत्र अथवा व्यापार (बिजनैस) से हो उन्हें आज मां स्कन्दमाता की पूजा अवश्य करनी चाहिये इससे सर्वश्रेष्ठ फल की प्राप्ति और उन्नति की प्राप्ति होती है ।।
 
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पञ्चमी तिथि विशेष - पञ्चमी को बिल्वफल एवं षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना त्याज्य बताया गया है । पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों त्याज्य है । पंचमी तिथि धनप्रद एवं शुभ तिथि मानी जाती है । इसके स्वामी नागराज वासुकी हैं तथा पूर्णा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है ।।
 
इस तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है । आज नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट की निवृत्ति हो जाती है यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है । अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है ।।
 
मित्रों, पंचमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है । इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है । इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है । इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है । ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं ।।
 
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सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
सोमवार का विशेष - सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है । पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है ।।
 
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें - सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए । कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं । सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं । माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है ।।
 
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है । इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है । इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है । ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं । धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है ।।
 
इस दिन जन्‍म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्‍स्‍य पालन या मछली का व्‍यवाय, पत्‍थरों का व्‍यवसाय, कपड़े का व्‍यवसाय अधिक फलता है । इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्‍थर आदि से जुड़ा व्‍यवसाय ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में । जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा । हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती ।।
 
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चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग ।।...... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....  ज्योतिष के ट्रिक्स:    &   वेबसाईट पर पढ़ें:   &   ब्लॉग पर पढ़ें:

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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 24 सितम्बर 2017 दिन रविवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 24 सितम्बर 2017 दिन रविवार का पंचाग ।।
आज 24 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-24-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - चतुर्थी 12:40 PM बजे तक उपरान्त शुक्ल पञ्चमी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - स्वाति 02:16 AM तक उपरान्त विशाखा नक्षत्र है ।।
 
योग - वैधृति 07:51 AM बजे तक उपरान्त विष्कुम्भ योग है ।।
 
करण - विष्टि 12:40 PM तक उपरान्त बव करण है ।।
 
चन्द्रमा - तुला राशि पर 21:50 PM बजे तक उपरान्त वृश्चिक राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:29:14
 
सूर्यास्त - सायं 18:32
 
राहुकाल (अशुभ) - सायं 16:30 बजे से 18:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.18 बजे से 12.42 बजे तक ।।
 
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चतुर्थी तिथि विशेष - चतुर्थी को मूली एवं पञ्चमी को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है । इस तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है । इसलिए चतुर्थी को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए । चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है । इसके स्वामी गणेश जी हैं तथा रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है ।।
 
इस तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है । आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है । आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
मित्रों, ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है । चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है । ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है । इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं ।।
 
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मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें । अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते । अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर ।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं ।।
 
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये । भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है । इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है । क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है ।। 
 
दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
रविवार का विशेष - रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
विशेष जानकारी - मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये । साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये ।।
 
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मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है । इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है । इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं । इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं ।।
 
रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं । इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है । महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं । उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं । ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते । ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं । इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना । क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं । दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं । कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर ।।
 
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सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है ।।....  आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....  ज्योतिष के टिप्स:   &   वेबसाईट पर पढ़ें:  &  ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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"वृषभ राशि की कुण्डली, सम्पूर्ण विवेचन, भाग-3."।।"  -  My Lalest video.

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आज का लेख एवं आज 23 सितम्बर 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 23 सितम्बर 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।
आज 23 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-23-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - तृतीया 11:24 AM बजे तक उपरान्त शुक्ल चतुर्थी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - चित्रा 00:38 AM तक उपरान्त स्वाति नक्षत्र है ।।
 
योग - इन्द्र 07:57 AM बजे तक उपरान्त वैधृति योग है ।।
 
करण - गर 11:24 AM तक उपरान्त वणिज 23:57 PM तक उपरान्त विष्टि करण है ।।
 
चन्द्रमा - तुला राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:29:00
 
सूर्यास्त - सायं 18:33
 
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.19 बजे से 12.43 बजे तक ।।
 
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तृतीया तिथि विशेष - तृतीया तिथि में नमक एवं चतुर्थी को मूली का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य माना गया है । चतुर्थी को मूली एवं तिल का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है । तृतीया तिथि एक सबला और आरोग्यकारी तिथि मानी जाती है । इसकी स्वामी माता गौरी और कुबेर देवता हैं, जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है ।। 
 
तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है अन्यथा इस तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है । आज माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है । आज एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है । आज भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये । देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है ।।
 
मित्रों, तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है । इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है । ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है । इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है ।।
 
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शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये ।।
 
शनिवार का विशेष - शनिवार के दिन तेल मर्दन "मालिश" करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है ।।
 
दिशाशूल - शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है । ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं । ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है ।।
 
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं । इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है । पारिवारिक जिम्मेदारियां भी अधिक रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं । सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है ।।
 
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वाभाव में साहस लक्षित होता है । सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं । ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं । इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्‍टर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये । इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं । ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं ।।
 
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शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है ।।....  आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....   ज्योतिष के ट्रिक्स:   &  वेबसाईट पर पढ़ें:   &   ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं 22 सितम्बर 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं 22 सितम्बर 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।
आज 22 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-22-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - द्वितीया 10:42 AM बजे तक उपरान्त शुक्ल तृतीया तिथि है ।।
 
नक्षत्र - चित्रा 24:38 PM तक उपरान्त स्वाति नक्षत्र है ।।
 
योग - ब्रह्म 08:31 AM बजे तक उपरान्त इन्द्र योग है ।।
 
करण - कौलव 10:42 AM तक उपरान्त तैतिल 22:58 PM तक उपरान्त गर करण है ।।
 
चन्द्रमा - कन्या राशि पर 12:02 PM बजे तक उपरान्त तुला राशि पर ।।।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:28:47
 
सूर्यास्त - सायं 18:34
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 10:30 बजे से 12:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.19 बजे से 12.43 बजे तक ।।
 
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द्वितीया तिथि विशेष - मित्रों, द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है । द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है तथा इसके स्वामी ब्रह्माजी हैं । भद्रा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है ।।
 
प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये । वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है । परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है । इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये ।।
 
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है । इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है । इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं । इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं । इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो । ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है ।।
 
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शुक्रवार का विशेष - शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
शुक्रवार का विशेष टिप्स - मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें । यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें । शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है । आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है । ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं । ये धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है । ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं ।।
 
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं । इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है । सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं । इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्‍स विशेषज्ञ, मनोचिकित्‍सक अथवा ज्‍वेलरी से सम्बन्धित व्‍यवसायों में आजमाना चाहिये । इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं । जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं । मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु ! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते ।।
 
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विवाह में हो रहे विलम्ब के लिये इन साधारण उपायों से अपने जीवन को रसमय बनायें ।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.....  ज्योतिष के ट्रिक्स:   &    ब्लॉग पर पढ़ें:    &  वेबसाईट पर पढ़ें:
 
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 21 सितम्बर 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 21 सितम्बर 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।
आज 21 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-21-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - शरद.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - शुक्ल.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - अश्विन शुक्ल पक्ष.
 
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तिथि - प्रतिपदा 10:35 AM बजे तक उपरान्त शुक्ल द्वितीया तिथि है ।।
 
नक्षत्र - हस्त 23:34 PM तक उपरान्त चित्रा नक्षत्र है ।।
 
योग - शुक्ल 09:32 AM बजे तक उपरान्त ब्रह्म योग है ।।
 
करण - बव 10:35 AM तक उपरान्त बालव 22:35 PM तक उपरान्त कौलव करण है ।।
 
चन्द्रमा - कन्या राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:28:33
 
सूर्यास्त - सायं 18:35
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.19 बजे से 12.43 बजे तक ।।
 
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प्रतिपदा तिथि विशेष - प्रतिपदा को कद्दू एवं कूष्माण्ड तथा द्वितीया तिथि को कटेरी के फल का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है । प्रतिपदा तिथि वृद्धि और सिद्धिप्रद तिथि मानी जाती है । इसके स्वामी अग्नि देवता हैं और यह तिथि नन्दा नाम से विख्यात है ।।
 
मित्रों, यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है । आज अग्निदेव से धन एवं तेज प्राप्त करने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति हेतु घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये ।।
 
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है । ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है । ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं । आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग ।।
 
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गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
गुरुवार का विशेष - गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है । साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है । इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है । अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है । इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए । इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है ।।
 
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है । ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है । साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है । ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है । उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है ।।
 
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गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है । इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है । इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है । जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं । परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है ।।
 
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है । जैसे - सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो । ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है ।।
 
दिशाशूल - गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है ।।
 
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें - गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है । जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है । गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें । इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे ।।
 
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बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं । ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं । ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं । गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं ।।
 
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं । ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं । यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं । गुरुवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्‍वभाव के होते हैं । ये जीवन को उत्‍सव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं ।।
 
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं । धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्‍वासघात नहीं कर सकते हैं । यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं । इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये । इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्‍पतिवार तथा शुभ अंक 4 होता है ।।
 
आज का विचार - मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं । परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं । इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है ।।
 
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जन्मकुण्डली के अनुसार आपके जीवन में धन कैसे और कब आयेगा ?।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.....   ज्योतिष के टिप्स:   &   वेबसाईट पर पढ़ें:   &   ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 20 सितम्बर 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 20 सितम्बर 2017 दिन बुधवार का पंचाग ।।
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विक्रम संवत् - 2074. 
 
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शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - वर्षा.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - श्राद्धपक्ष अमावस्या 11:00 AM बजे तक उपरान्त शुक्ल प्रतिपदा तिथि है ।।
 
नक्षत्र - उत्तराफाल्गुनी 23:03 PM तक उपरान्त हस्त नक्षत्र है ।।
 
योग - शुभ 10:57 AM बजे तक उपरान्त शुक्ल योग है ।।
 
करण - नाग 11:00 AM तक उपरान्त किन्स्तुघ्न 22:44 PM तक उपरान्त बव करण है ।।
 
चन्द्रमा - सिंह राशि पर 04:59 AM बजे तक उपरान्त कन्या राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:28:20
 
सूर्यास्त - सायं 18:36
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 12:00 बजे से 13:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.20 बजे से 12.44 बजे तक ।।
 
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अमावस्या तिथि विशेष - अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है । शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है । अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है । अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं । यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
मित्रों, अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है । किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है । जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है । इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है ।।
 
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है । अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये । आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है । अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये । घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं ।।
 
विशेष ज्ञान - मित्रों, रविवार कि सप्तमी, सोमवार कि सोमवती अमावस्या (अथवा किसी दिन की भी अमावस्या हो), मंगलवार कि चतुर्थी और बुधवार कि अष्टमी । इन चारों तिथियों में किया गया मन्त्र जप सिद्ध हो जाता है । इनमें किया गया श्राद्ध-तर्पण, तीर्थ स्नान एवं दान अक्षय हो जाता है, क्योंकि इन तिथियों को सूर्यग्रहण के बराबर पुण्यदायिनी माना गया है ।। (शिवपुराण, विद्येश्वर संहिता, अध्याय - 10.)
 
मित्रों, अमावस्या तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति चतुर एवं कुटिल होता है । इनके मन में दया के भावनाओं की बहुत ही कमी होती है । इनके स्वभाव में ईर्ष्या अर्थात दूसरों से जलने की प्रवृति होती है । इनके व्यवहार एवं आचरण में कठोरता दिखाई देती है । ये दीर्घसूत्री अर्थात किसी भी कार्य को पूरा करने में काफी समय लगाते हैं ।।
 
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आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें - बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है । इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
बुधवार का विशेष - बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं । इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं । ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं । ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं । इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं ।।
 
ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं । किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं । वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है । अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है । बुधवार को जन्‍म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं । वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं ।।
 
इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं । इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये । इन क्षेत्रों में इन्हें अच्‍छी सफलता की संभावना होती है । इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा "आप" शब्द का, उसके बाद "हम" शब्द का और सबसे कम "मैं" शब्द का प्रयोग करना चाहिए । इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 19 सितम्बर 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 19 सितम्बर 2017 दिन मंगलवार का पंचाग ।।
आज 19 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-19-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - वर्षा.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - श्राद्धपक्ष चतुर्दशी 11:53 AM बजे तक उपरान्त अमावस्या तिथि है ।।
 
नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी 23:01 PM तक उपरान्त उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है ।।
 
योग - साध्य 12:44 PM बजे तक उपरान्त शुभ योग है ।।
 
करण - शकुनि 11:53 AM तक उपरान्त चतुष्पद 23:24 PM तक उपरान्त नाग करण है ।।
 
चन्द्रमा - सिंह राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:28:07
 
सूर्यास्त - सायं 18:37
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 15:00 बजे से 16:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त - दोपहर 12.20 बजे से 12.44 बजे तक ।।
 
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चतुर्दशी तिथि विशेष - चतुर्दशी को शहद और अमावस्या को मैथुन त्याज्य होता है । चतुर्दशी तिथि क्रूरा और उग्रा तिथि मानी जाती है, इसके देवता शिवजी हैं । चतुर्दशी को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन अर्चन एवं अभिषेक करना चाहिये । सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत रुद्राभिषेक करवायें ।।
 
आज की तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है । जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है । रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है ।।
 
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है । इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है । इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है । ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं । देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है ।।
 
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मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए । मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये ।।
 
मंगलवार का विशेष - मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं । इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत अधिक होती है । ऐसे लोग जिम्मेदा‍‍रियों के कार्य में सफल भी होते हैं । खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं । यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है ।।
 
मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है । ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं । ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है । ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं । जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं । इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं ।।
 
मंगलवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति स्‍वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्‍य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांग‍ठनिक क्षमता वाले होते हैं । नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर अधिक सफल रहता है । इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरून और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है ।।
 
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मंगलवार का विशेष टिप्स - यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं । भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें ।।
 
मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें - मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है । आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 100 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता । जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 18 सितम्बर 2017 दिन सोमवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।। 
आज का लेख एवं आज 18 सितम्बर 2017 दिन सोमवार का पंचाग ।।
आज 18 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-18-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - वर्षा.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
 
====================================
 
तिथि - श्राद्धपक्ष त्रयोदशी 13:09 PM बजे तक उपरान्त चतुर्दशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - मघा (गण्डमूल) 23:24 PM तक उपरान्त पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है ।।
 
योग - सिद्ध 14:50 PM बजे तक उपरान्त साध्य योग है ।।
 
करण - गर 01:54 AM तक उपरान्त वणिज 13:09 PM तक उपरान्त विष्टि करण है ।।
 
चन्द्रमा - कर्क राशि पर 00:07 AM तक उपरान्त सिंह राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:27:54
 
सूर्यास्त - सायं 18:38
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 07:30 बजे से 09:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.20 बजे से 12.44 बजे तक ।।
 
======================================
 
त्रयोदशी तिथि विशेष - त्रयोदशी तिथि को बैंगन और चतुर्दशी को शहद त्याज्य होता है । त्रयोदशी तिथि जयकारी और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है । इसके देवता मदन (कामदेव) हैं । जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है । शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव ।।
 
कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं । जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये । कामदेव का मन्त्र - ॐ रतिप्रियायै नम: । अथवा - ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि । तन्नो अनंग: प्रचोदयात् ।।
 
आज की तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है । आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से । जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये । जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये ।।
 
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है । यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं ।।
 
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सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
सोमवार का विशेष - सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है । पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है ।।
 
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें - सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए । कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं । सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं । माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है ।।
 
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है । इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है । इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है । ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं । धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है ।।
 
इस दिन जन्‍म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्‍स्‍य पालन या मछली का व्‍यवाय, पत्‍थरों का व्‍यवसाय, कपड़े का व्‍यवसाय अधिक फलता है । इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्‍थर आदि से जुड़ा व्‍यवसाय ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में । जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा । हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती ।।
 
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चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग ।।...... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....  ज्योतिष के ट्रिक्स:   &   वेबसाईट पर पढ़ें:   &   ब्लॉग पर पढ़ें:

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मित्रों श्राद्धपक्ष शुरू हो चूका है, इसलिए श्राद्ध कैसे करें, कौन कर सकता है एवं कहाँ करें? इस विषय में विस्तृत जानें - श्राद्ध करने से दु:खों, तकलीफों, कष्टों तथा अपनी दरिद्रता से मुक्ति ।।  -  वेबसाइट पर पढ़ें:   & ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 17 सितम्बर 2017 दिन रविवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 17 सितम्बर 2017 दिन रविवार का पंचाग ।।
आज 17 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-17-September-ka-Panchang.
 
===============================================
 
विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - वर्षा.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - श्राद्धपक्ष द्वादशी 14:43 PM बजे तक उपरान्त त्रयोदशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - पुष्य 01:06 AM तक उपरान्त आश्लेषा (गण्डमूल) नक्षत्र है ।।
 
योग - शिव 17:11 PM बजे तक उपरान्त सिद्ध योग है ।।
 
करण - कौलव 03:35 AM तक उपरान्त तैतिल 14:43 PM तक उपरान्त गर करण है ।।
 
चन्द्रमा - कर्क राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:27:41
 
सूर्यास्त - सायं 18:38
 
राहुकाल (अशुभ) - सायं 16:30 बजे से 18:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.20 बजे से 12.44 बजे तक ।।
 
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द्वादशी तिथि विशेष - द्वादशी तिथि को मसूर एवं त्रयोदशी तिथि को बैंगन नहीं खाना चाहिये । ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है । द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं । आज के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से किया गया पूजन, उनके नाम एवं स्तोत्रों (विष्णुसहस्रनाम) के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है ।।
 
आज के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये तथा भगवान नारायण का पूजन और जप आदि से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है । यह तिथि यशोबली और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है । भद्रा नाम से विख्यात ये तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
द्वादशी तिथि में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है । इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है । इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है । इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है । स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है । ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं ।।
 
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मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें । अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते । अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर ।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं ।।
 
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये । भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है । इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है । क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है ।। 
 
दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
रविवार का विशेष - रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
विशेष जानकारी - मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये । साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये ।।
 
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मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है । इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है । इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं । इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं ।।
 
रविवार को जन्मे जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं । इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है । महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं । उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं । ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते । ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं । इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना । क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं । दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं । कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर ।।
 
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सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है ।।....  आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....  ज्योतिष के टिप्स:   &   वेबसाईट पर पढ़ें:   &   ब्लॉग पर पढ़ें:

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मित्रों श्राद्धपक्ष शुरू हो चूका है, इसलिए श्राद्ध कैसे करें, कौन कर सकता है एवं कहाँ करें? इस विषय में विस्तृत जानें - श्राद्ध करने से दु:खों, तकलीफों, कष्टों तथा अपनी दरिद्रता से मुक्ति ।।  -  वेबसाइट पर पढ़ें:   & ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 16 सितम्बर 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
आज का लेख एवं आज 16 सितम्बर 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।
आज 16 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-16-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - वर्षा.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - श्राद्धपक्ष एकादशी 16:31 PM बजे तक उपरान्त द्वादशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - पुनर्वसु 02:17 AM तक उपरान्त पुष्य नक्षत्र है ।।
 
योग - परिघ 19:43 PM बजे तक उपरान्त शिव योग है ।।
 
करण - बव 05:30 AM तक उपरान्त बालव 16:31 PM तक उपरान्त कौलव करण है ।।
 
चन्द्रमा - कर्क राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:27:27
 
सूर्यास्त - सायं 18:39
 
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.21 बजे से 12.45 बजे तक ।।
 
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मित्रों, आज अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि इंदिरा नाम का एकादशी व्रत है । आप सभी एकादशी व्रतियों को हार्दिक शुभकामनायें ।।
 
एकादशी तिथि विशेष - शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है । एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है । एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है । एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये । इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है ।।
 
एकादशी तिथि के देवता विश्व देव होते हैं । नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है । एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है । इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है ।।
 
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है । मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं । इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है । इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है । समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है ।।
 
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शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये ।।
 
शनिवार का विशेष - शनिवार के दिन तेल मर्दन "मालिश" करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है ।।
 
दिशाशूल - शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है । ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं । ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है ।।
 
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं । इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है । पारिवारिक जिम्मेदारियां भी अधिक रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं । सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है ।।
 
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वाभाव में साहस लक्षित होता है । सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं । ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं । इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्‍टर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये । इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं । ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं ।।
 
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मित्रों श्राद्धपक्ष शुरू हो चूका है, इसलिए श्राद्ध कैसे करें, कौन कर सकता है एवं कहाँ करें? इस विषय में विस्तृत जानें - श्राद्ध करने से दु:खों, तकलीफों, कष्टों तथा अपनी दरिद्रता से मुक्ति ।।  -  वेबसाइट पर पढ़ें:   & ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है ।।....  आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....   ज्योतिष के ट्रिक्स:   &  वेबसाईट पर पढ़ें:   &    ब्लॉग पर पढ़ें:
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं 15 सितम्बर 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।। 
आज का लेख एवं 15 सितम्बर 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।
आज 15 सितम्बर के लिये कुछ विशेष एवं पञ्चांग ।।
Aaj-15-September-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2074.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1939.
 
अयन - दक्षिणायन.
 
गोल - सौम्य.
 
ऋतु - वर्षा.
 
मास - अश्विन.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - भाद्रपद कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - श्राद्धपक्ष दशमी 18:30 PM बजे तक उपरान्त एकादशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - आर्द्रा 03:36 AM तक उपरान्त पुनर्वसु नक्षत्र है ।।
 
योग - वरियान 22:25 PM बजे तक उपरान्त परिघ योग है ।।
 
करण - वणिज 07:33 AM तक उपरान्त विष्टि 18:30 PM तक उपरान्त बव करण है ।।
 
चन्द्रमा - मिथुन राशि पर 20:36 PM बजे तक उपरान्त कर्क राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:27:14
 
सूर्यास्त - सायं 18:40
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 10:30 बजे से 12:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.21 बजे से 12.45 बजे तक ।।
 
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दशमी तिथि विशेष - दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है । एकादशी को चावल और दाल नहीं खाना चाहिए । दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है । पूर्णा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है । दशमी को धन और धर्म प्रदान करने वाली तिथि माना जाता है । इस तिथि में वाहन खरीदना एवं सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये अत्यंत शुभ माना जाता है ।।
 
दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं । यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं । इस तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है । पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है । इस तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं ।।
 
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं । देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं । इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं ।।
 
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शुक्रवार का विशेष - शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
शुक्रवार का विशेष टिप्स - मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें । यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें । शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है । आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है । ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं । ये धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है । ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं ।।
 
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं । इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है । सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं । इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्‍स विशेषज्ञ, मनोचिकित्‍सक अथवा ज्‍वेलरी से सम्बन्धित व्‍यवसायों में आजमाना चाहिये । इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं । जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं । मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु ! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते ।।
 
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मित्रों श्राद्धपक्ष शुरू हो चूका है, इसलिए श्राद्ध कैसे करें, कौन कर सकता है एवं कहाँ करें? इस विषय में विस्तृत जानें - श्राद्ध करने से दु:खों, तकलीफों, कष्टों तथा अपनी दरिद्रता से मुक्ति ।।  -  वेबसाइट पर पढ़ें:   & ब्लॉग पर पढ़ें:
 
विवाह में हो रहे विलम्ब के लिये इन साधारण उपायों से अपने जीवन को रसमय बनायें ।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.....  ज्योतिष के ट्रिक्स:   &   ब्लॉग पर पढ़ें:    &  वेबसाईट पर पढ़ें:
 
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