आज का पञ्चांग

आज का लेख एवं आज 26 मार्च 2017 दिन रविवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
 
आज का लेख एवं आज 26 मार्च 2017 दिन रविवार का पंचाग ।।
 
Aaj-26-March-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2073.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1938.
 
अयन - उत्तरायण.
 
गोल - उत्तर.
 
ऋतु - बसन्त.
 
मास - चैत्र.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - फाल्गुन, कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - त्रयोदशी 12:30 PM बजे तक उपरान्त चतुर्दशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - शतभिषा 16:29 PM तक उपरान्त पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र है ।।
 
योग - साध्य 02:31 AM उपरान्त शुभ योग है ।।
 
करण - वणिज 12:30 PM उपरान्त विष्टि 23:42 PM उपरान्त शकुनि करण है ।।
 
चन्द्रमा - कुम्भ राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:38:54
 
सूर्यास्त - सायं 18:50
 
राहुकाल (अशुभ) - सायं 16:30 बजे से 18:00 बजे तक ।।
 
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.32 बजे से 12.56 बजे तक ।।
 
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त्रयोदशी तिथि विशेष - त्रयोदशी तिथि को बैंगन और चतुर्दशी को शहद त्याज्य होता है । त्रयोदशी तिथि जयकारी और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है । इसके देवता मदन (कामदेव) हैं । जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है । शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव ।।
 
कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं । जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये । कामदेव का मन्त्र - ॐ रतिप्रियायै नम: । अथवा - ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि । तन्नो अनंग: प्रचोदयात् ।।
 
आज की तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है । आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से । जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये । जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये ।।
 
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है । इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है । यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं ।।
 
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मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें । अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते । अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर ।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं ।।
 
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये । भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है । इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है । क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है ।। 
 
दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
रविवार का विशेष - रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
विशेष जानकारी - मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये । साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये ।।
 
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मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है । इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है । इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं । इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं ।।
 
रविवार को जन्मे जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं । इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है । महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं । उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं । ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते । ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं । इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना । क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं । दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं । कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 25 मार्च 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
 
आज का लेख एवं आज 25 मार्च 2017 दिन शनिवार का पंचाग ।।
 
Aaj-25-March-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2073.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1938.
 
अयन - उत्तरायण.
 
गोल - उत्तर.
 
ऋतु - बसन्त.
 
मास - चैत्र.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - फाल्गुन, कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - द्वादशी 13:34 PM बजे तक उपरान्त त्रयोदशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - धनिष्ठा 16:59 PM तक उपरान्त शतभिषा नक्षत्र है ।।
 
योग - सिद्ध 04:16 AM उपरान्त साध्य योग है ।।
 
करण - कौलव 01:50 AM उपरान्त तैतिल 13:34 PM उपरान्त गर करण है ।।
 
चन्द्रमा - मकर राशि पर 04:58 AM उपरान्त कुम्भ राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:39:47
 
सूर्यास्त - सायं 18:50
 
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.32 बजे से 12.56 बजे तक ।।
 
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द्वादशी तिथि विशेष - द्वादशी तिथि को मसूर एवं त्रयोदशी तिथि को बैंगन नहीं खाना चाहिये । ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है । आज शनिवार का प्रदोष व्रत भी है । द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं । आज के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से किया गया पूजन, उनके नाम एवं स्तोत्रों (विष्णुसहस्रनाम) के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है ।।
 
आज के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये तथा भगवान नारायण का पूजन और जप आदि से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है । यह तिथि यशोबली और सर्वसिद्धिकारी तिथि मानी जाती है । भद्रा नाम से विख्यात ये तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है ।।
 
द्वादशी तिथि में जन्म लेने वाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है । इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है । इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है । इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है । स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है । ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं ।।
 
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शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये ।।
 
शनिवार का विशेष - शनिवार के दिन तेल मर्दन "मालिश" करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है । पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है ।।
 
दिशाशूल - शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
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जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है । ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं । ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है ।।
 
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं । इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है । पारिवारिक जिम्मेदारियां भी अधिक रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं । सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है ।।
 
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वाभाव में साहस लक्षित होता है । सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं । ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं । इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्‍टर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये । इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं । ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं 24 मार्च 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
 
आज का लेख एवं 24 मार्च 2017 दिन शुक्रवार का पंचाग ।।
 
Aaj-24-March-ka-Panchang.
 
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विक्रम संवत् - 2073.
 
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - साधारण.
 
शक - 1938.
 
अयन - उत्तरायण.
 
गोल - उत्तर.
 
ऋतु - बसन्त.
 
मास - चैत्र.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - फाल्गुन, कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - एकादशी 13:54 PM बजे तक उपरान्त द्वादशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - श्रवण 16:45 PM तक उपरान्त धनिष्ठा नक्षत्र है ।।
 
योग - शिव 05:25 AM उपरान्त सिद्ध योग है ।।
 
करण - बव 01:47 AM उपरान्त बालव 13:54 PM उपरान्त कौलव करण है ।।
 
चन्द्रमा - मकर राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:40:40
 
सूर्यास्त - सायं 18:50
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 10:30 बजे से 12:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.33 बजे से 12.57 बजे तक ।।
 
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मित्रों, आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष कि पापमोचनी नाम का एकादशी व्रत है एवं कल शनिवार का प्रदोष व्रत भी है । आप सभी एकादशी व्रतियों को हार्दिक शुभकामनायें ।।
 
एकादशी तिथि विशेष - शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है । एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये ये इन तिथियों में त्याज्य बताया गया है । एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है । एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये । इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है ।।
 
एकादशी तिथि के देवता विश्व देव होते हैं । नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है । एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है । इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है ।।
 
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है । मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं । इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है । इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है । समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है ।।
 
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शुक्रवार का विशेष - शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
दिशाशूल - शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है ।।
 
शुक्रवार का विशेष टिप्स - मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें । यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें । शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है । आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें ।।
 
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मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है । ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं । ये धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है । ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं ।।
 
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं । इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है । सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं । इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्‍स विशेषज्ञ, मनोचिकित्‍सक अथवा ज्‍वेलरी से सम्बन्धित व्‍यवसायों में आजमाना चाहिये । इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है ।।
 
आज का सुविचार - मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं । जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं । मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु ! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते ।।
 
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।।। नारायण नारायण ।।।

आज का लेख एवं आज 23 मार्च 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष विद्यालय, सिलवासा ।।
 
आज का लेख एवं आज 23 मार्च 2017 दिन गुरुवार का पंचाग ।।
 
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विक्रम संवत् - 2073.
 
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शक - 1938.
 
अयन - उत्तरायण.
 
गोल - उत्तर.
 
ऋतु - बसन्त.
 
मास - चैत्र.
 
पक्ष - कृष्ण.
 
गुजराती पंचांग के अनुसार - फाल्गुन, कृष्ण पक्ष.
 
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तिथि - दशमी 13:28 PM बजे तक उपरान्त एकादशी तिथि है ।।
 
नक्षत्र - उत्तराषाढा 15:47 PM तक उपरान्त श्रवण नक्षत्र है ।।
 
योग - परिघ 05:59 AM उपरान्त शिव योग है ।।
 
करण - विष्टि 13:28 PM उपरान्त बव करण है ।।
 
चन्द्रमा - मकर राशि पर ।।
 
सूर्योदय - प्रातः 06:41:33
 
सूर्यास्त - सायं 18:49
 
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक ।।
 
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.33 बजे से 12.57 बजे तक ।।
 
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दशमी तिथि विशेष - दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है । एकादशी को चावल और दाल नहीं खाना चाहिए । दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है । पूर्णा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है । दशमी को धन और धर्म प्रदान करने वाली तिथि माना जाता है । इस तिथि में वाहन खरीदना एवं सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये अत्यंत शुभ माना जाता है ।।
 
दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं । यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं । इस तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है । पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है । इस तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं ।।
 
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं । देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं । इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं ।।
 
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गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है ।।
 
गुरुवार का विशेष - गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है - (मुहूर्तगणपति) ।।
 
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है ।। (महाभारत अनुशासनपर्व) ।।
 
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है । साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है । इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है । अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है । इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए । इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है ।।
 
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है । ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है । साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है । ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है । उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है ।।
 
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गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है । इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है । इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है । जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं । परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है ।।
 
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है । जैसे - सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो । ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है ।।
 
दिशाशूल - गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है ।।
 
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें - गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है । जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है । गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें । इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे ।।
 
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बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं । ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं । ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं । गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं ।।
 
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं । ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं । यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं । गुरुवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्‍वभाव के होते हैं । ये जीवन को उत्‍सव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं ।।
 
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं । धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्‍वासघात नहीं कर सकते हैं । यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं । इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये । इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्‍पतिवार तथा शुभ अंक 4 होता है ।।
 
आज का विचार - मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं । परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं । इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है ।।
 
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वृषभ लग्न की कुण्डली में माणिक्य धारण करें या ना करें ।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.....   ब्लॉग पर पढ़ें:   &   वेबसाईट पर पढ़ें:
 
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