अपार धन का योग कौन ग्रह हमें देता है।।

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Apar Dhan Yoga in Your Horoscope
Apar Dhan Yoga in Your Horoscope

कुण्डली में अपार धन का योग है तथा कौन सा ग्रह हमें बनाता है अतुलनीय धनवान।। Apar Dhan Yoga in Your Horoscope.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, इस संसार में हर इंसान धनवान बनना चाहता है । धनवान बनने की चाहत रखना और बनना दोनों अलग-अलग बातें हैं जो सभी के लिए आसान नहीं होता । धनवान बनने के लिये मेहनत के साथ-साथ अच्छी किस्मत का होना भी अति आवश्यक होता है । सभी मेहनती लोग धनवान भी नहीं बनते ।।

इसके विपरीत कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो अपनी किस्मत के बल पर बहुत कम मेहनत तथा कुछ लोग गलत कार्यों द्वारा अधिक धन कमा लेते है । आज मैं कुछ ज्योतिषीय तथ्यों के माध्यम से आपलोगों को इस विषय को स्पष्ट करके बताता हूँ । जिनके द्वारा एक आम इंसान भी अपने जीवन में बहुत धन कमा सकता है ।।

मित्रों, जन्मकुण्डली में स्थित ग्रह ही आपके इच्छाओं की पूर्ति होगी या नहीं इस बात का स्पष्टीकरण करते है । आपके अच्छे ग्रह आपको जीवन में सफलताओं की और प्रेरित करते है और बुरे गृह जीवन में हर कदम पर परेशानियाँ खड़ी करते है । आप अपने जीवन में कितना धन कमाएंगे इसका फैसला भी आपकी कुण्डली में स्थित ग्रह ही करते हैं ।।

जिन ग्रहों का सम्बन्ध आपकी कुण्डली में धन योग से होता है वो ग्रह कैसे (शुभ-अशुभ) हैं ? यदि धन योग का निर्माण करने वाले ग्रह खराब घरों में अथवा खराब अवस्था में बैठे हों तो उस जातक का कोई कार्य पूरा नहीं होता । फलस्वरूप जातक धनी होने के जगह गरीबी की जिन्दगी को प्राप्त करता है ।।

मित्रों, जन्मकुण्डली में यदि ग्रहों की स्थिति ज्यादा खराब हो तो जातक के ऊपर जीवन भर क़र्ज़ ही रहता है । ऐसा जातक जी तोड़ मेहनत करते हुये धनवान नहीं बन पाता क्योंकि धनवान बनने के लिए कुण्डली में अच्छे योगों (धनयोग) का होना अनिवार्य होता है । जब भी ऐसे शुभ ग्रहों की दशा और अंतर दशा जातक के जीवन में आती है उसका दिन बदलने लगता है ।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जन्मकुण्डली का पहला, दूसरा, दसवां और ग्यारहवां भाव धन योग से सम्बन्ध रखता है । इन घरों के मालिक ग्रहों और उनकी दशा, अन्तरदशाओं का संबध होनेपर ही ऐसा होता है । प्रथम भाव का मालिक ग्रह जब अच्छी स्थिति में जैसे किसी केन्द्र अथवा त्रिकोण में हो तो जातक के जीवन में सहजता से धन प्राप्ति के योग बनते हैं ।।

मित्रों, यदि लग्नेश का सम्बन्ध दुसरे या ग्यारहवें घर के मालिक ग्रहों से किसी केन्द्र अथवा त्रिकोण में बने तो प्रबल धन योग का निर्माण होता है । यदि किसी बुरे ग्रह की दृष्टि अथवा सम्बन्ध इन योगों पर हो तो वो इस योग को निष्क्रिय कर सकता है । परन्तु यदि किसी शुभ ग्रह की दृष्टि इन योगों पर हो तो ये और भी प्रबल धनदायक हो जाते हैं ।।

दूसरा घर हमारा धन स्थान होता है यहाँ से जातक के संचय धन का पता चलता है । दुसरे स्थान के मालिक की अच्छी स्थिति किसी अच्छे ग्रह के साथ किसी केन्द्र या त्रिकोण में एक बेहतरीन धनयोग का निर्माण करती है । दसवा घर हमारे कर्म से सम्बंधित होता है और यदि द्वितीयेश का सम्बन्ध दशमेश से हो तो जातक अपनी कर्मठता से धनार्जन करता है ।।

ग्यारहवां घर हमारे प्रतिदिन की कमाई को दर्शता है अत: अच्छी कमाई के लिए इस घर के स्वामी का सम्बन्ध १, २ अथवा १० वें घर या उनके स्वामियों से होना आवश्यक होता है । परन्तु इन ग्रहों का शुभ फल उनकी दशा, अन्तरदशाओं का संबध होने पर ही प्राप्त होता है । इनके आलावा और भी कई ऐसे तथ्य है जो जातक को धनवान बनाने के लिए आवशयक है ।।

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