चाण्डाल योग (दोष) एवं उसका दु:ष्प्रभाव।।

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Chandal Yoga And prabhav
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चाण्डाल योग (दोष) एवं उसका दु:ष्प्रभाव।। Chandal Yoga And prabhav.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, बृहस्पति और राहु जब साथ होते हैं या फिर एक दूसरे को किसी अलग-अलग भावो में बैठ कर देखते हो, तो गुरू चाण्डाल योग निर्माण होता है । चाण्डाल का अर्थ निम्नप्रवृत्ति के लोग ।।

पूर्वकाल में कहा जाता था, कि चाण्डाल की छाया भी ब्राह्मण को या गुरू तक को भी अशुद्ध कर देती है । गुरु चाण्डाल योग को संगति के उदाहरण से आसानी से समझ सकते हैं ।।

मित्रों, जिस प्रकार कुसंगति के प्रभाव से श्रेष्ठता या सद्गुण भी दुष्प्रभावित हो जाते हैं । ठीक उसी प्रकार शुभ फल कारक गुरु ग्रह भी राहु जैसे नीच ग्रह के प्रभाव से अपने सद्गुण खो देते है ।।

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जिस प्रकार हींग की तीव्र गंध केसर की सुगंध को भी ढक लेती है और स्वयं ही हावी हो जाती है । उसी प्रकार राहु अपनी प्रबल नकारात्मकता के तीव्र प्रभाव में गुरु की सौम्य, सकारात्मकता को भी निष्क्रीय कर देता है ।।

मित्रों, राहु चांडाल जाति, स्वभाव का माना गया है इसलिये उसमें नकारात्मक तामसिक गुणों का ग्रह माना गया है । इसलिए इस योग को गुरु चांडाल योग कहा जाता है । जिस जातक की कुंडली में गुरु चांडाल योग यानि कि गुरु-राहु की युति हो वह व्यक्ति क्रूर, धूर्त, मक्कार, दरिद्र और कुचेष्टाओं वाला होता है ।।

ऐसा व्यक्ति षडयंत्र करने वाला, ईष्र्या-द्वेष, छल-कपट आदि दुर्भावना रखने वाला एवं कामुक प्रवत्ति का होता है । उसकी अपने परिवार जनो से भी नही बनती तथा वह खुद को अकेला महसूस करने लग जाता है और उसका मन हमेशा व्याकुल रहता है ।।

मित्रों, इस दोष से बचने के लिए कुछ साधारण सा उपाय अपना सकते हैं । गुरु चांडाल योग का जातक के जीवन पर जो भी दुष्प्रभाव पड़ रहा हो उसे नियंत्रित करने के लिए जातक को भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए ।।

एक अच्छा ज्योतिषी कुण्डली देख कर यह बता सकता है, कि हमे गुरु को शांत करना उचित रहेगा या राहु के उपाय जातक से करवाने पड़ेंगे । अगर चाण्डाल दोष गुरु या गुरु के मित्र की राशि या गुरु की उच्च राशि में बने तो उस स्थिति में हमे राहु देवता के उपाय करके उनको ही शांत करना पड़ेगा ताकि गुरु हमे अच्छे फल दे सके ।।

राहु देवता की शांति के लिए मंत्र-जप करवाना एवं पुरे होने के बाद हवन करवाना चाहिए । तत्पश्चात दान इत्यादि करने का विधान बताया गया है । अगर ये दोष गुरु की शत्रु राशि में बन रहा हो तो हमे गुरु और राहु दोनों के उपाय करने चाहिए । गुरु-राहु से संबंधित मंत्र-जप, पूजा, हवन तथा दोनों से सम्बंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए ।।

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