बार-बार दुर्घटनाओं का कारण और उपाय।।

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Durghatana And Upay
Durghatana And Upay

आपके साथ बार-बार  दुर्घटनायें होती हैं, तो जानें कारण और उपाय ।। Durghatana And Upay.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, सबसे पहला ग्रह शनि है जो दुर्घटनायें करवाता है । ज्योतिष शास्त्रानुसार शनि का प्रभाव प्राय: नसों और हड्‍डियों पर होता है । शनि की खराब स्थिति हो तो जातक के नसों में ऑक्सीजन की कमी एवं हड्‍डियों में कैल्शियम की कमी हो जाती है ।।

ऐसी स्थति में वाहन अथवा मशीनरी से चोट लगना एवं चोट लगने पर हड्‍डियों में फ्रैक्चर होना आम बात हो जाती है । यदि पैरों में बार-बार चोट लगे और हड्‍डी टूटे तो यह शनि की खराब स्थिति को दर्शाता है ।।

मित्रों, ऐसी स्थिति में शनि की शांति के उपाय करना चाहिए । जैसे हनुमान चालीसा का पाठ करें । मद्यपान और माँसाहार से पूर्ण परहेज करें । नौकरों अथवा कर्मचारियों से अच्छा व्यवहार करें । शनि न्याय का ग्रह है इसलिए न्याय का रास्ता अपनाएँ, परिवार से विशेषत: स्त्रियों से अच्छे संबंध रखें ।।

दूसरा ग्रह जो दुर्घटनाओं के लिये जिम्मेवार माना जाता है, वो है राहु । राहु का प्रभाव जातक के दिमाग और आँखों पर रहता है । कमर से ऊपरी हिस्से पर ग्रह विशेष प्रभाव रखता है । राहु की प्रतिकूल स्थिति जीवन में आकस्मिक दुर्घटनाओं का योग लाता है ।।

ख़राब राहू की दशान्तार्दशा में दुर्घटनाएँ, चोट-चपेट अचानक लगती है । इस समय में मनोविकार, अंधापन, लकवा आदि लगना राहु के लक्षण हैं । पानी, भूत-बाधा, टोना-टोटका आदि राहु के क्षेत्र में ही आता है ।।

अगर ऐसा आपके साथ भी हो रहा हो तो भगवान गणेश एवं माता सरस्वती की आराधना करें । अवसाद से दूर रहें, सामाजिक संबंध बढ़ाएँ । रिस्क न लें, खुश रहें एवं बातें न छुपाएँ ।।

तीसरा ग्रह जो दुर्घटनाओं के लिये कारण होता है वो है मंगल । मंगल हमारे शरीर में रक्त का प्रतिनिधि माना जाता है । मंगल की अशुभ स्थिति हो तो बार-बार सिर में चोट लगती है । खेलते-दौड़ते समय गिरना आम बात होती है और इस‍ स्थि‍ति में छोटी से छोटी चोट से भी रक्त स्राव हो जाता है ।।

रक्त संबंधी बीमारियाँ, स्त्रियों को मासिक धर्म के समय में अत्यधिक रक्त स्राव भी खराब मंगल के लक्षण होते हैं । अस्त्र-शस्त्रों से दुर्घटना होना, आक्रमण का शिकार होना ख़राब मंगल के वजह से होता है ।।

अगर इस प्रकार की समस्यायें आपके साथ हैं, तो आप मंगलवार का व्रत करें, मसूर की दाल का दान करें। अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें और मित्रों की संख्‍या बढ़ाएँ। मद्यपान एवं माँसाहार से परहेज करें। अपनी ऊर्जा को रचनात्मक दिशा दें।।

ऐसी परेशानियाँ जीवन में कब-कब होती हैं । ये उपरोक्त ग्रह यदि कुंडली में ख़राब स्थिति में हों अथवा शुभ फलदायी न हों । और जब-जब इन ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा आएगी ।।

तब-तब उपरोक्त संबंधित दुर्घटनाओं के योग जातक के जीवन में बनते हैं । इसके अलावा गोचर में इन ग्रहों के अशुभ स्थानों पर जाने पर, स्थान बदलते समय भी ऐसे कुयोग बनते हैं । अत: इस समय का ध्यान रखकर संबंधित उपाय करना नितांत आवश्यक है तभी आप इन ग्रहों के प्रकोप से बाख पाएंगे ।।

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