बृहस्पति, शुक्र और आपका विवाह।।

0
964
Guru Shukra And marriage life
Guru Shukra And marriage life

बृहस्पति, शुक्र और आपका विवाह एवं दाम्पत्य जीवन ।। Guru Shukra And marriage life.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, बृहस्पति और शुक्र ये दोनों ग्रह ऐसे होते हैं, जो पुरूष और स्त्री दोनों का एक-एक प्रतिनिधित्व करते हैं । मुख्य रूप ये दोनों ग्रह व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में सुख दु:ख, संयोग और वियोग के विषय में बताते हैं ।।

प्राकृतिक रूप से बृहस्पति और शुक्र दोनों ही शुभ ग्रह होते हैं । सप्तम भाव जीवन साथी का घर होता है । इस घर में इन दोनों ग्रहों की स्थिति एवं प्रभाव के अनुसार विवाह एवं दाम्पत्य सुख का सुखद अथवा दुखद फल मिलता है ।।

पुरूष की कुण्डली में शुक्र ग्रह पत्नी एवं वैवाहिक सुख का कारक होता है । वहीँ एक स्त्री की कुण्डली में बृहस्पति पति एवं वैवाहिक सुख का कारक होता है ।।

ये दोनों ग्रह स्त्री एवं पुरूष की कुण्डली में जहां स्थित होते हैं और जिन स्थानों को देखते हैं उनके अनुसार जीवनसाथी मिलता है और वैवाहिक सुख प्राप्त होता है । बृहस्पति की जिस भाव पर दृष्टि होती है, उस भाव से सम्बन्धित शुभ फल प्रदान करता है । परन्तु कभी-कभी देखा गया है, कि जिस स्त्री अथवा पुरूष की कुण्डली में गुरू सप्तम भाव में विराजमान होता है ।।

उनका विवाह या तो विलम्ब से होता है अथवा दाम्पत्य जीवन में सुख की कमी रहती है । ऐसे जातकों के गृहस्थ जीवन अर्थात पति-पत्नी में अनबन और क्लेश के कारण गृहस्थी में उथल पुथल मची रहती है । दाम्पत्य जीवन को सुखी बनाने में बृहस्पति और शुक्र का सप्तम भाव और सप्तमेश से सम्बन्ध बहुत ही महत्वपूर्ण होता है ।।

जिस पुरूष की कुण्डली में सप्तम भाव, सप्तमेश और विवाह कारक ग्रह शुक अगर बृहस्पति से युत या दृष्ट होता है उसे सुन्दर गुणों वाली एवं अच्छी जीवन-संगिनी मिलती है । इसी प्रकार जिस स्त्री की कुण्डली में सप्तम भाव, सप्तमेश और विवाह कारक ग्रह बृहस्पति अगर शुक्र से युत या दृष्ट होता है उसे सुन्दर और अच्छे संस्कारों वाला पति मिलता है ।।

शुक्र भी बृहस्पति के समान ही सप्तम भाव में सफल वैवाहिक जीवन के लिए शुभ नहीं माना जाता है । सप्तम भाव का शुक्र व्यक्ति को अधिक कामुक बनाता है । कुण्डली में सप्तमस्थ शुक्र जातक के विवाहेत्तर सम्बन्ध की संभावनाओं को प्रबल बना देता है । विवाहेत्तर सम्बन्धों के वजह से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में क्लेश होना स्वाभाविक हो जाता है ।।

जिसके कारण गृहस्थ जीवन का सुख लगभग नष्ट सा हो जाता है । बृहस्पति और शुक्र जब सप्तम भाव को देखते हैं अथवा सप्तमेश पर दृष्टि डालते हैं तो इस स्थिति में वैवाहिक जीवन सफल और सुखद होता है । परन्तु यदि लग्न में बैठा बृहस्पति अगर पापकर्तरी योग से पीड़ित होता है तो सप्तम भाव पर इसकी दृष्टि का शुभ प्रभाव अथवा शुभ फल नहीं होता है ।।

ऐसे में सप्तम भाव का स्वामी ग्रह कुण्डली में यदि कमज़ोर हो या शुक्र के साथ हो तो दाम्पत्य जीवन सुखद और सफल रहने की संभावना कम अथवा ना के बराबर रहती है ।।

===============================================

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Video’s.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।

वापी ऑफिस:- शॉप नं.- 101/B, गोविन्दा कोम्प्लेक्स, सिलवासा-वापी मेन रोड़, चार रास्ता, वापी।।

प्रतिदिन वापी में मिलने का समय: 10:30 AM 03:30 PM

सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

प्रतिदिन सिलवासा में मिलने का समय: 05: PM 08:30 PM

WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.

E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com

।।। नारायण नारायण ।।।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here