ह्रदय रेखा का विभिन्न स्थितियों के अनुसार फलादेश ।।

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Kasht Dur Karne Ke Totke
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ह्रदय रेखा का विभिन्न स्थितियों के अनुसार फलादेश ।। Hriday Rekha Ke Vibhinna Sthitiyon Ke Anusar Faladesh.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, हृदय रेखा की स्थिति व्यक्ति के भीतर मौजूद रोमांटिक संभावनाओं को निर्धारित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । इस रेखा कि विभिन्न प्रकार की स्थिति द्वारा विपरीत लिंगों के बीच आकर्षण, प्रेम, रोमांटिक जीवन की प्रकृति, जीवन साथी कैसा होगा, प्रेम का बने रहना इत्यादि को समझा जा सकता है ।।

अच्छे संबंधों में बाधाओं का आना तथा वह बाधाएं किस कारण से आ रही हैं यह सभी कुछ इस रेखा से जाना जा सकता है । इसका उदगम मुख्य तीन स्थानों से होता है । पहला तर्जनी उंगली के आधार के मध्य, दूसरा तर्जनी और मध्यमा उंगली के मध्य से और तीसरा शनि पर्वत के केंद्र से होता है ।।

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मित्रों, हृदय रेखा की स्थिति के आधार पर कुछ सामान्य भेद आज हम बताते हैं । जब हृदय रेखा गुरु पर्वत के मध्य से निकलती है तो यह इस बात का प्रतीक है, कि व्यक्ति को उच्चतम स्तर का प्रेम प्राप्त होगा ।।

इस प्रेम में गर्व, आपसी सम्मान और जुनून रहेगा । इस के साथ व्यक्ति दृढ़, सुसंगत और अपने रिश्ते में भरोसेमंद होगा । जब इसका आरंभ गुरु पर्वत से होता है, तो यह बताता है, कि व्यक्ति अपने बराबर के स्तर में ही शादी करेगा नहीं तो अपने से कम वाले से करेगा ही नहीं ।।

मित्रों, जब हृदय रेखा तर्जनी उंगली से गुरु पर्वत को पार करती है तो यह भयंकर जुनून और र्निमूल उत्साह प्रदान करती है । व्यक्ति इस तरह के प्रेम में सदैव प्रबल होता है । जब इस रेखा का आरंभ तर्जनी और मध्यमा उंगली के मध्य से होता है तो यह प्रेम के मामले में शांत और भावुक मन की प्रकृति का प्रतिनिधित्व करता है ।।

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ऐसे व्यक्तियों को गुरु के अच्छे प्रभाव और शनि द्वारा दिये गये जुनून के मिश्रण के रुप में देखा जा सकता है । जब हृदय रेखा का आरंभ शनि पर्वत से हो, तो यह जुनून का संकेत है । व्यक्ति अपने प्रेम को सिद्ध करने के लिये काफी हद तक स्वार्थी हो सकता है । वह अपने रिश्ते में हावी रहेगा ।।

मित्रों, जब इस रेखा का आरंभ गुरु पर्वत या मध्यमा उंगली से बहुत उच्च होकर होता है तो यह प्रतिनिधित्व करता है, कि व्यक्ति किसी अन्य की तुलना मे अधिक भावुक और कामुक हो सकता है । व्यक्ति इस विषय में बहुत स्वार्थी हो सकता है ।।

जब यह रेखा हाथ के नीचे स्थित हो अर्थात यह मस्तिष्क और जीवन रेखा के करीब हो तो मस्तिष्क के मामले में हृदय सदैव हस्तक्षेप करेगा । इसके विपरीत यह रेखा हाथ पर उच्च स्थित हो तो मस्तिष्क संवेदनाओं पर हावी रहेगा और व्यक्ति कठोर और रुखे स्वभाव का होगा ।।

जब हृदय रेखा इतनी नीचे हो कि वह मस्तिष्क रेखा को छूती हो तो व्यक्ति को जीवन के प्रारंभिक चरण के दौरान दुख की प्राप्ति होगी ।।

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