कालसर्प दोष के शुभाशुभ लक्षण, शान्ति के सरल उपाय एवं नवनाग स्तोत्रम् ।।

0
452
Aaj ka Panchang 05 August 2019

कालसर्प दोष के शुभाशुभ लक्षण, शान्ति के सरल उपाय एवं नवनाग स्तोत्रम् ।। kalsarpa Yoga ke Lakshana And Shanti.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, सामान्यतः कालसर्प दोष एक घातक दोष माना जाता है । लेकिन सच्चाई यह है, कि जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग हो वह जीवन में एक के बाद एक सफलता की सीढियां चढ़ते हुए सर्वोच्च शिखर तक भी पहुंचता है ।।

दुनियाँ भर के कई राष्ट्राध्यक्ष, उद्योगपति तथा अन्य नामी से नामी हस्तियां कालसर्प दोष के दुष्प्रभाव से ग्रसित होने के बाद भी जीवन में ऐसी उपलब्धियां प्राप्त कर चुके हैं, जो उन्हीं के क्षेत्र में कार्यरत अन्य प्रभावी लोगों के लिए भी मात्र सपने ही बनकर रह जाती हैं ।।

कालसर्प दोष ग्रहों की उस स्थिति को कहते हैं, जब जन्म कुन्डली में सारे ग्रह, राहु और केतु के मध्य स्थित हो जाते हैं । राहु सर्प का मुख है और केतु सर्प की पूंछ हैं । आजकल मैं देखता हूँ, अधिकांश लोग इस योग से भयाक्रांत हैं ।।

जन्मकुन्डली में इस दोष के होने का पता चलते ही इस दोष की विधिवत शान्ति करवाना चाहिए । इस दोष के कुण्डली में होने का अर्थ है, कि जातक ने पिछले अनेक जन्मों में असंख्य पाप कर्म किए हैं ।।

मित्रों, वैसे तो कालसर्प दोष भविष्य के गर्भ में छिपी किसी घटना के होने का संकेत मात्र देता हैं । फिर भी इस योग वाले जातक विषम परिस्थतियों में भी कठिनाईयों का सामना करते हुए उच्च पद पर आसीन होते हैं तथा उन्हें अचानक धनलाभ भी होता है ।।

ऐसे जातक ऊँचे से ऊँचे पद पर बैठकर श्रेष्ठ अधिकार प्राप्त करते हैं । यह योग यदि हानिकारक स्थिति में हो जाय तो व्यक्ति दर-दर भटकने वाला भिखारी भी बन जाता है ।।

ऐसे जातक को कठिन परिश्रम के बाद भी मनोवान्छित फल नहीं मिलता और अंत में वह अपमृत्यु को प्राप्त होता है । इस दोष से संतान अवरोध अथवा संतान की असमय मृत्यु विवाह में अनावश्यक विलम्ब, घर में हर समय अनबन, व्यापार में घाटा, धनप्राप्ति में बाधा, उन्नति में अवरोध, व्यर्थ का भ्रमण, झूठे दोषारोपण, झूठे मुकदमे एवं मानसिक अशांति आदि इसके मुख्य लक्षण हैं ।।

इस दोष के बहाने पूर्व जन्मों में किए गए पाप इस जन्म में व्याधियों के रुप में प्रकट होते हैं । वैसे तो कालसर्प योग अत्यंत घातक और अनिष्टकारी दोष है किन्तु इसका अर्थ यह कदापि नहीं है, कि इस योग से पीड़ित जातक अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में असफलता और अक्षमता के ही शिकार होते हैं ।।

जन्म कुन्डली में विद्यमान अन्य शुभ ग्रहों से निर्मित शुभ योग भी जातक को पूर्णरुप से प्रभावित करते हैं । ऐसे जातक न केवल जीवन में अनेक उपलब्धियां और सफलताएं प्राप्त करते हैं बल्कि वे राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, सेनाध्यक्ष, अभिनेता, वैज्ञानिक तथा उच्चकोटि के धार्मिक नेता भी बनते हैं या अन्य उच्चतम पद को भी प्राप्त करते हैं ।।

यह बात भी निश्चित है, कि महानतम उपलब्धियां और सफलताएं प्राप्त करने के बावजूद उन्हें भी कालसर्प दोष के दु:ष्प्रभाव झेलने ही पड़ते हैं ।।

इस दोष की शान्ति हमें अवश्य ही करवाना चाहिए । कुछ लोग इन सब बातों को पाखण्ड कहते हैं । मैं ये कहता हूँ, कि अगर ये पाखण्ड भी है कदाचित तो भी पूजा ही करना है कोई चोरी, हत्या या कोई पाप नहीं करना है और पूजा का फल उन्नतशील जीवन ही होता है । लेकिन इस विधि को किसी योग्य, विद्वान् और श्रेष्ठ ज्ञानी ब्राह्मण से करवाना चाहिए ।।

इस दोष कि शान्ति में सर्वप्रथम गणपति-गौरी, समस्त मातृकाओं के साथ कुलदेवी, दुर्गा देवी, लक्ष्मीनारायण भगवान, शिव-पार्वती, नवग्रह पूजन, शिव पूजन के साथ आवृत्ति पूर्वक कम से कम ग्यारह आवृत्ति रुद्राष्टाध्यायी से दुग्ध धारा से रुद्राभिषेक अवश्य करवाएँ । सबसे अन्त में नवग्रह के जगह पर नव पंचधातु, चाँदी अथवा पीतल के नाग की मूर्ति पर क्रमानुसार एक-एक करके आवाहन करें ।।

1.ॐ अनन्त नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
2.कुलिक नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
3.वासुकी नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
4.शंखपाल नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
5.पद्म नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
6.महापद्म नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
7.तक्षक नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
8.कर्कोटक नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
9.शंखचूड़ नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
10.घातक नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
11.विषधर नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।
12.शेषनाग नाम्न्यः सर्पराजाय नम: आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि ।।

इस प्रकार आवाहन करें और फिर षोडशोपचार से विधिपूर्वक वैदिक मन्त्रों से वैदिक विधान से पूजन करें-करवायें । पूजनोपरान्त इन मन्त्रों से नवनागों की प्रार्थना करें:-

अनंतं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कंबलं ।
शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा ।।
एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम् ।
सायंकाले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।।
तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ।।

फिर जिस वस्त्र को पहनकर आपने पूजन की विधि की है, उसे पहने हुए सचैल स्नान करें । उसके पहले नाग देवता से प्रार्थना करते हुए कहें कि हे नागदेवता ! हमारे दोषों को क्षमा करें, हमें अपने पाश से मुक्ति दें और आपलोग पाताल लोक को जाएँ आप सभी को भगवान नारायण की सन्निधि प्राप्त हो तथा आपलोगों की दया से हमें हमारे जीवन में सुख-शान्ति की प्राप्ति हो ।।

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।

संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।

WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: astroclassess@gmail.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here