क्यों ड़रते हैं लोग इतना साढ़ेसाती से?

0
490
Kyo Darate Hai Log Sadhesati Se
Kyo Darate Hai Log Sadhesati Se

क्यों ड़रते हैं लोग इतना साढ़ेसाती से ? साढ़ेसाती है क्या ? आइये जानते हैं ।। Kyo Darate Hai Log Sadhesati Se.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, साढ़ेसाती है क्या ? क्यों ड़रते हैं लोग इससे इतना ? आखिर इस साढ़ेसाती का रहस्य है क्या जो लोगों के प्राण आधे हुए जाते हैं ? क्या ये लोगों के प्राण ले लेता है ? अगर हाँ तो क्या प्रमाण है ? अगर नहीं तो डरना क्यों ? ।।

हमारे वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब शनि गोचर में जन्मकालीन राशि से द्वादश, चन्द्र लग्न एवं द्वितीय भाव में स्थित होता है तब इसे शनि की “साढ़ेसाती” या “दीर्घ कल्याणी” कहा जाता है ।।

मित्रों, वैसे शनिदेव किसी भी एक राशी में ढ़ाई वर्ष तक रहते हैं । उपरोक्त तीनों में जब साथ में ही शनिदेव भ्रमण करते हैं तो “साढ़ेसाती” की संपूर्ण अवधि साढ़े सात वर्ष की मानी जाती है ।।

शास्त्रानुसार सामान्य रूप से साढ़ेसाती अशुभ व कष्टप्रद मानी जाती है । परन्तु यह एक भ्रांत धारणा ही है, क्योंकि कुण्डली में स्थित शनि की स्थिति को देखकर ही शनि की साढ़ेसाती का फल निर्धारित किया जा सकता है ।।

मित्रों, ठीक इसी प्रकार शनि जब गोचर में जन्मकालीन राशि से भ्रमण करते हुए चतुर्थ व अष्टम भाव में पहुँचते हैं तब इसे शनि का “ढैय्या” या “लघु कल्याणी” कहा जाता है ।।

इसे ढ़ैया कहा जाता है और इसकी अवधि ढाई वर्ष की होती है । ये रहता कम समय तक अवश्य ही है परन्तु इसका फल भी साढ़ेसाती के अनुसार ही होता है । लेकिन इन दोनों से घबराना नहीं चाहिए ।।

मित्रों, ऐसी स्थिति में शनि का पाया भी देखना और उसपर विचार करना जरुरी होता है । जन्मकालीन राशि से जब शनि १, ६ और ११ वीं राशि में हो तो सोने का पाया होता है ।।

शनिदेव जब २, ५ और ९ वीं राशि में होते हैं तो चांदी का पाया, ३, ७ एवं १० वीं राशि में हों तो तांबे का पाया तथा ४, ८ और १२ वीं राशि में हो तो लोहे का पाया माना जाता है । इसमें सोने का पाया सर्वोत्तम, चांदी का मध्यम, तांबे और लोहे के पाये को निम्न एवं नेष्ट माना जाता है ।।

मित्रों, जब भी आपकी कुण्डली में ऐसी स्थिति बने तो शनि की शांति के उपाय करें घबरायें नहीं । कुछ उपाय मैं बताता हूँ, शनि की प्रतिमा पर सरसों के तेल से अभिषेक करना एवं “महाराज दशरथ द्वारा रचित शनि स्तोत्र” का पाठ करना चाहिए ।।

हनुमान चालीसा का पाठ एवं हनुमान जी का दर्शन नित्य ही करना चाहिए । शनि की पत्नियों के नामों का उच्चारण करते हुए उनसे प्रार्थना करना चाहिए । किसी भी पीपल वृक्ष के जड़ में चींटियों के आटा शक्कर मिलाकर डालना चाहिए ।।

मित्रों, बाजार में डाकोत को तेल मिलता है इस तेल का दान करना चाहिए । काले कपड़े में उड़द, लोहा, तेल और काजल रखकर दान देने से शुभ फल की प्राप्ति होती है । काले घोड़े की नाल की अंगूठी मध्यमा अंगुली में धारण करना एवं नौकरों से अच्छा व्यवहार करना तथा छाया दान करना श्रेयस्कर होता है ।।

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Watch YouTube Video’s.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.  

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं।।

वापी ऑफिस:- शॉप नं.- 101/B, गोविन्दा कोम्प्लेक्स, सिलवासा-वापी मेन रोड़, चार रास्ता, वापी।।

प्रतिदिन वापी में मिलने का समय: 10:30 AM 03:30 PM

सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

प्रतिदिन सिलवासा में मिलने का समय: 05: PM 08:30 PM

WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here