पञ्चांग 02 जनवरी 2021 दिन शनिवार।।

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Panchang 02 January 2021
Panchang 02 January 2021

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 02 जनवरी 2021 दिन शनिवार।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 02 January 2021

आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 02 जनवरी 2021 दिन शनिवार।।
Aaj ka Panchang 02 January 2021.

विक्रम संवत् – 2077.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – प्रमादी.

शक – 1941.

अयन – दक्षिणायन.

गोल – उत्तर.

ऋतु – शरद.

मास – पौष.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष.

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तिथि – तृतीया 09:11 AM बजे तक उपरान्त चतुर्थी तिथि है।।

नक्षत्र – आश्लेषा 20:17 PM तक उपरान्त मघा (दोनों गंडमूल) नक्षत्र है।।

योग – विष्कुंभ 12:03 PM तक उपरान्त प्रीति योग है।।

करण – विष्टि 09:11 AM तक उपरान्त बव 20:50 PM तक उपरान्त बालव करण है।।

चन्द्रमा – कर्क राशि पर 20:17 PM तक उपरान्त सिंह राशि पर।।

सूर्योदय – प्रातः 07:15:42

सूर्यास्त – सायं 18:08:27

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक।।

विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.30 बजे से 12.54 बजे तक।।

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तृतीया तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक एवं चतुर्थी को मूली का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य माना गया है। चतुर्थी को मूली एवं तिल का दान तथा भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला और आरोग्यकारी तिथि मानी जाती है। इसकी स्वामी माता गौरी और कुबेर देवता हैं, जया नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।।

तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है अन्यथा इस तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।

मित्रों, तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।।

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मघा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म मघा नक्षत्र में हुआ है तो आप ठिगने कद के साथ सुदृढ वक्षस्थल और मजबूत जंघाओं के मालिक हैं। आपकी वाणी थोड़ी कर्कश एवं गर्दन थोड़ी मोटी हो सकती है। मघा नक्षत्र में जन्म लेने वालों की आँखें विशेष चमक लिए हुए होती हैं। चेहरा शेर के समान भरा हुआ एवं रौबीला होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति प्रायः अपने पौरुष और परुशार्थ के प्रदर्शन के लिए सदा ललायित रहते हैं। मघा नक्षत्र के जातकों को अपने रौबिलेपन को बढाने के लिए शानदार मूंछे रखने का शौक होता है।।

मघा नक्षत्र के जातक थोडा अभिमानी भी होते है और इसीलिए किसी की छोटी से छोटी बात पर भी शीघ्र ही नाराज़ भी हो जाते हैं। नाराज़गी में सामने वाले को नीचा दिखाने के लिए अपनी बलशाली शक्ति और मर्दानगी का दुरूपयोग करने से भी नहीं हिचकिचाते। मघा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति परम तेजस्वी होता है। आप स्वभाव से बहुत धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। देवताओं और पितरों को पूजे बिना कोई कार्य आरम्भ नहीं करते हैं।।

मघा नक्षत्र में जन्मी कन्याएं बहुमूल्य पकवान बनाना पसंद करती हैं। स्वादिष्ट पकवान एवं सुंदर और आकर्षक वस्त्रों की शौक़ीन होती हैं। मघा नक्षत्र की महिलाएं हर प्रकार के सुख सुविधा का भोग करती हैं। माता पिता और बड़ों का आदर सम्मान प्राकृतिक रूप से आपके व्यवहार में ही होता है। परन्तु ऐसी जातिकाएं ईश्वर और पितरों से डरने वाली होती है।।

मघा नक्षत्र में जन्मे लोगों की आयु यदि लम्बी हो तो जातक अत्यधिक धनवान होता है। परन्तु ऐसे लोगों को हार्ट अटैक, फ़ूड पोइस्निंग, पीठ का दर्द, किडनी सम्बन्धी समस्याएं होने की संभावनायें होती हैं।।

प्रथम चरण:- मघा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल हैं। यहाँ लग्न स्वामी, नक्षत्र स्वामी और नक्षत्र चरण स्वामी सभी में परम शत्रुता होती है। इसलिए मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति अल्प पुत्र अर्थात संतति वाला होता है। लग्न बलि न हो तो जातक का विकास कार्य रुका हुआ रहता है। साथ ही सूर्य की दशा कमज़ोर फल देने वाली होती है।।

द्वितीय चरण:- मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। मघा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा व्यक्ति तेजस्वी पुत्र अर्थात संतति वाला होता है। लग्नेश सूर्य की दशा उत्तम फलदायी होती है। मंगल की दशा भाग्योदय कारक होती है एवं शुक्र की दशा में पराक्रम बढता है।।

तृतीय चरण:- मघा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध हैं। मघा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा व्यक्ति प्रायः रोगी होता है। जातक को संक्रामक रोग शीघ्र ही पकड लेते हैं। लग्नेश सूर्य की दशा उत्तम फलदायी होती है। मंगल की दशा भाग्योदय कारक होती है एवं धन प्राप्ति के योग बुध की दशा में प्रबल बनेंगे।।

चतुर्थ चरण:- मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी सूर्य हैं। मघा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा व्यक्ति अपने क्षेत्र का विद्वान् पंडित होता है। लग्नेश सूर्य की दशा उत्तम फल फलदायी होती है। मंगल की दशा भाग्योदय कारक होती है।।

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अश्लेशा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- अश्लेशा नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों का प्राकृतिक गुण सांसारिक उन्नति में प्रयत्नशीलता, लज्जा एवं सौदर्यौपसना होती है। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति की आँखों एवं वचनों में विशेष आकर्षण होता है। लग्न स्वामी चन्द्रमा के होने के कारण ऐसे जातक उच्च श्रेणी के डॉक्टर, वैज्ञानिक या अनुसंधानकर्ता भी होते हैं इसका कारण चन्द्रमा का औषधिपति होना ही हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक बहुत चतुर बुद्धि के होते हैं। आप अक्सर जन्म स्थान से दूर ही रहते हैं। आपका वैवाहिक जीवन भी मधुर नहीं कहा जा सकता है। अश्लेशा नक्षत्र का स्वामी चन्द्र एवं नक्षत्र स्वामी बुध है। गंड नक्षत्र होने के कारण अश्लेशा का सर्पों से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है।।

अश्लेशा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति अक्सर अपने वचनों से मुकर जाता है। क्रोध आपकी नाक पर रहता है। किसी पर भी शीघ्र क्रोधित हो जाना आपके स्वभाव में होता है। बुध और चन्द्रमा में शत्रुता के कारण इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति की विचारधारा संकीर्ण होती है और मन: स्थिति कर्तव्यविमूढ़ बन जाती है। अश्लेशा नक्षत्र का व्यक्ति स्वभाव से धूर्त, ईर्ष्यालु, शरारती, पाप कर्म करने से न हिचकने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति किसी भी प्रकार के नियम या आचरण को मानने वाला नहीं होता है।।

अश्लेशा नक्षत्र का जातक सदैव परकार्य सेवारत रहतें हैं। भाई की सेवा एवं नौकरी करना स्वाभाविक गुण होता है। स्वतंत्र होने पर परोपकारी होते हैं। अश्लेशा नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ ऊँचे कद और सुन्दर परन्तु झगडालू प्रवृत्ति की होती हैं। यह सदा दूसरों का अहसान मानने वाली तथा उच्च कोटि की प्रेमिका साबित होती हैं। जिस से भी प्रेम करती है उसका साथ मरते दम तक निभाती हैं। अश्लेशा के अंत में गंड है अतः व्यक्ति अल्पजीवी होता है, इसलिए अश्लेशा का विधि विधान से शांति करवाना आवश्यक होता है।।

ऐसी मान्यता है, कि जो उपकार पर उपकार करे वह अश्लेशा जातक हैं। सर्दी, कफ, वायु रोग, पीलिया घुटनों का दर्द एवं विटामिन बी की कमी ऐसे जातकों में हो सकती है।।

प्रथम चरण:- आश्लेषा के चरण का स्वामी गुरु हैं। अश्लेशा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति अत्यधिक धनवान होता है। परन्तु ज़्यादातर देखा गया है, कि इसकी आमदनी अनैतिक कार्यों से ही होती है। विदेशों में भाग्योदय एवं वृद्धावस्था में अंग भंग का खतरा रहता है। धार्मिक, राजनितिक और सामाजिक कार्यों में पूर्ण रूचि परन्तु सफलता के लिए अन्याय और असत्य का सहारा भी लेते हैं। सच्ची मित्रता में कतई विश्वास नहीं रखते।।

द्वितीय चरण:- आश्लेषा के द्वितीय चरण का स्वामी शनि होता हैं। अश्लेशा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा व्यक्ति धन एकत्रित करने में सदा असफल रहता है। पद प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं होती है परन्तु उसके हिसाब से धन प्राप्ति हेतु सारे प्रयत्न विफल होते हैं।।

तृतीय चरण:- आश्लेशा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी भी शनि होता हैं। आश्लेशा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा व्यक्ति धन एकत्रित करने में सदा असफल रहता है। पद प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं होती है परन्तु उसके हिसाब से धन प्राप्ति हेतु सारे प्रयत्न विफल होते हैं।।

चतुर्थ चरण:- आश्लेशा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी गुरु होता हैं। आश्लेशा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे व्यक्ति की पद प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं होती है परन्तु धन का अभाव सदा बना ही रहता है।।

Panchang 02 January 2021

शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये।।

शनिवार का विशेष – शनिवार के दिन तेल मर्दन “मालिश” करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।

शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।।

दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।

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जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है। ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं। ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है।।

शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं। इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी अधिक रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं। सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है।।

शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वाभाव में साहस लक्षित होता है। सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं। ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं। इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्टपर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये। इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है।।

आज का सुविचार – मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं। ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं।।

Panchang 02 January 2021

शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

“वृषभ राशि में केतु की महादशा में सभी ग्रहों का फल, भाग-15।।” – My Latest video.

“मेष राशि में केतु की महादशा में सभी ग्रहों का फल, भाग-15।।” – My Latest video. –

“मीन राशि में केतु की महादशा में सभी ग्रहों का फल, भाग-15।।” – My Latest video. –

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