पञ्चांग 07 जनवरी 2021 दिन गुरुवार।।

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Panchang 07 January 2021
Panchang 07 January 2021

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 07 जनवरी 2021 दिन गुरुवार।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 07 January 2021

आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 07 जनवरी 2021 दिन गुरुवार।।
Aaj ka Panchang 07 January 2021.

विक्रम संवत् – 2077.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – प्रमादी.

शक – 1941.

अयन – दक्षिणायन.

गोल – उत्तर.

ऋतु – शरद.

मास – पौष.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष.

Panchang 07 January 2021

तिथि – नवमी 23:59 PM बजे तक उपरान्त दशमी तिथि है।।

नक्षत्र – चित्रा 15:46 PM तक उपरान्त स्वाति नक्षत्र है।।

योग – सुकर्मा 21:15 PM तक उपरान्त धृति योग है।।

करण – तैतिल 13:04 PM तक उपरान्त गर 23:59 PM तक उपरान्त वणिज करण है।।

चन्द्रमा – कन्या राशि पर 04:29 AM तक उपरान्त तुला राशि पर।।

सूर्योदय – प्रातः 07:16:59

सूर्यास्त – सायं 18:11:40

राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक।।

विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.33 बजे से 12.57 बजे तक।।

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नवमी तिथि विशेष – नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इसकी अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। रिक्ता नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।।

नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें एवं चुनरी चढ़ायें उसके बाद दुर्गा सप्तशती के किसी भी सिद्ध मन्त्र का जप करें। इससे हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति यश एवं प्रतिष्ठा कि प्राप्ति तथा सभी मनोरथों कि पूर्ति होती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं।।

नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है। इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है। ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं। धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं।।

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चित्रा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- चित्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक शारीरिक रूप से मनमोहक एवं सुन्दर आँखों वाला होता है। आपको अनेक प्रकार की साज सज्जा का शौक होता है तथा अपने लिए नित नए आभूषण एवं वस्त्र आप खरीदते ही रहते हैं। आपका व्यक्तित्व आकर्षक एवं शारीरिक रूप से संतुलित होते हैं। व्यक्तित्व के यही गुण आपको भीड़ से अलग करते हैं। आपकी पसंद और सोंच में अनूठापन है जिससे अक्सर महिलाएं आकर्षित होती है। आप स्वभाव से कामुक एवं स्त्रियों में अधिक रूचि रखने वाले होते हैं।।

आप बेहद संवेदनशील होते हैं तथा अत्यधिक भावुक होते हैं। इसलिए आपकी बुद्धि अस्थिर रहती है और आपको निर्णय लेने में कठिनाई अक्सर आती है। आप एक शांतप्रिय व्यक्ति होंगे परन्तु अपनी स्पष्टवादिता के कारण विवादों में अक्सर फंस जाते हैं। आपमें सुन्दरता और गुणों का समावेश होता है। आप दयालु और गरीबों के मदद करने वालों में से होंगे। शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देने की अपेक्षा आप अपने आप को बचाना बेहतर समझते हैं।।

चित्र नक्षत्र में जन्मा जातक परिश्रमी होता है और अपने इसी गुण के कारण अपने जीवन में आई कई कठिनाईयों को पार करते हुए उन्नति पाता है। कभी-कभी आपको अपने द्वारा की गई मेहनत से अधिक भी मिल जाता है। आपका जीवन 32 वर्ष तक उथल पुथल भरा रहता है परन्तु 32 से 52 वर्ष तक का समय आपके जीवन का बेहतर समय कहा जा सकता है।।

आप अपने पिता से अधिक माता के निकट होंगे। हालाँकि आपके पिता समाज में एक सम्माननीय व्यक्ति होंगे। परन्तु किसी कारणवश आपकी उनसे दूरी आजीवन बनी रहेगी। चित्रा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति अपने जन्म स्थान से दूर जाकर ही सफल होता है। वैवाहिक जीवन में कुछ खटास रहती है परन्तु पारिवारिक जीवन में स्थिरता रहेगी। चित्रा नक्षत्र में जन्मी महिलाएं सफ़ेद वस्त्र पहनना पसंद करती हैं।।

सुंदर तथा हंसमुख स्वभाव वाली चित्रा नक्षत्र की जातिकाएं ईश्वर में विश्वास रखने वाली होती हैं। आप माता-पिता की प्रिय तथा आपके नेत्र विशेष रूप से सुंदर होते हैं। अर्थात इस नक्षत्र की जातिकाएं अत्यन्त सुंदर नेत्रों वाली होती हैं। चित्रा नक्षत्र में जन्मे जातक अल्सर, किडनी सम्बंधित रोग, दिमागी बुखार, अपेंडिक्स जैसे रोगों के शिकार होने की ज्यादातर संभावनायें होती हैं।।

प्रथम चरण:- चित्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुए जातकों का झुकाव चोरी एवं तस्करी में अधिक होता है। लग्नेश बुध की दशा शुभ फल देगी। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होगा। परन्तु सूर्य की दशा अशुभ फलदायी होगी।।

द्वितीय चरण:- चित्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक सौंदर्य प्रेमी होता है। ऐसे जातकों की रूचि संगीत, कला, चित्रकारी या फोटोग्राफी जैसे विषयों में अधिक होती है। लग्नेश बुध की दशा माध्यम फलदायी होती है।।

तृतीय चरण:- चित्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र होता हैं। चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल एवं लग्नेश तथा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र दोनों ही कामुक ग्रह हैं। फलतः जातक कामुक होगा तथा पराई स्त्री में रूचि रखने वाला होगा। लग्न बलि न होने के कारण जातक का विकास रुका हुआ रहेगा। लग्नेश शुक्र एवं मंगल की दशा में कोई काम नहीं बनेगा।।

चतुर्थ चरण:- चित्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल होता हैं। नक्षत्र स्वामी मंगल एवं नक्षत्र चरण स्वामी भी मंगल होने के कारण जातक के शरीर पर चोट अथवा पीड़ा का निशान रहेगा। लग्नेश शुक्र की दशा अच्छा फल देती है। मंगल की दशा-अन्तर्दशा भी उत्तम फलदायी होती है।।

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स्वाति नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म स्वाति नक्षत्र में हुआ है तो आप एक आकर्षक चेहरे और उससे भी अधिक आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी होंगे। आपका शरीर सुडौल एवं भरा हुआ है। इस कारण आप कहीं भी जाएँ भीड़ से अलग ही दिखते हैं। आप जैसा सोचते हैं वैसा करते हैं। दिखावा आपको पसंद नहीं होता है।

आप एक स्वतंत्र आत्मा के स्वामी होंगे जिसको किसी के भी आदेश का पालन करना कतई पसंद नहीं होगा। आप किसी पर भी तब तक मेहरबान रहते हैं जब तक कि सामने वाला आपकी आज़ादी में दखल न दे। जो भी आपकी आजादी को नुकसान पहुचाएगा वो आपके कोप भाजन का शिकार अवश्य होगा। वास्तविकता तो यह है, कि आप या तो किसी के परम मित्र हो सकते हैं या फिर परम शत्रु।।

आप स्वभाव से बहुत ही स्वाभिमानी और उच्च विचार धारा के व्यक्ति होंगे। न तो आपको किसी की संपत्ति में रूचि होगी और न ही अपनी संपत्ति में किसी की हिस्सेदारी आपको पसंद है। आपको अपने कार्यों पर किसी की टिप्पणी कतई पसंद नहीं है। यदि आपकी नज़र में सामने वाला दोषी है तो बदला लेने में आप किसी भी हद तक जा सकते हैं।।

आप अपने कार्यों को पूरे मन लगा कर मेहनत और इमानदारी के साथ करते है। आप अपने जीवन के शुरुआती 25 वर्षों में व्यवसायिक रूप से बहुत कठिनाईयां झेलेंगे। परिश्रम के अनुरूप फल प्राप्त नहीं होगा। परन्तु 30 वर्ष के उपरान्त आपको अपने किये हुए कार्यों का ब्याज समेत भुगतान मिलेगा। स्वाति नक्षत्र के जातकों के लिए न्यायिक व्यवस्था में कार्य करना सबसे अधिक लाभप्रद होता है। सैन्य क्षेत्र में आप अधिक तरक्की कर सकते है।।

आपका वैवाहिक जीवन बहुत सुखमय नहीं होगा। क्योंकि आपसी वैचारिक मतभेदों के कारण घर में शांति नहीं रहेगी। फिर भी आपकी आरती स्थिति स्थिर रहेगी, बिगड़ेगी नहीं। स्वाति नक्षत्र में जन्मी जातिकायें कभी न आलस करने वाली होती हैं। दिखने में साधारण शक्ल सूरत किन्तु बुद्धि से चपल एवं किसी भी स्थिति में अपने मनोरथ पूरे करने वाली होती हैं।।

चित्रा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें जिद्दी होने के कारण कभी-कभी अच्छे बुरे कार्य में भेद नहीं कर पाती है। इस स्वाति नक्षत्र का जातक अपने स्वभाव से ही सभी को प्रसन्नता देनेवाला होता है। इस नक्षत्र के जातक ज्यादातर यौन रोग तथा मूत्र से सम्बंधित रोगों से ग्रसित देखे गए हैं।।

प्रथम चरण:- स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी गुरु होता है। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक अधिकांशतः चोर प्रवृत्ति का होता है। नक्षत्र स्वामी राहु, गुरु को बिगाड़ कर अपना फल देता है अतः जातक चोर प्रवृत्ति का होता है।।

द्वितीय चरण:- स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि होता है। राहु व् शनि दो पाप ग्रहों के प्रभाव में आने से जातक अल्पायु होता है। परन्तु लग्नेश शुक्र की दशा अच्छी जाएगी। राहु और शनि की मित्रता के कारण दोनों की दशाओं में जातक को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा।।

तृतीय चरण:- स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मे जातक पर शनि और राहु के प्रभाव के कारण मन में वैराग्य आएगा। अतः जातक धार्मिक प्रवृत्ति का हो सकता है। राहु और शनि की मित्रता के कारण दोनों की दशाओं में जातक को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा।।

चतुर्थ चरण:- स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी गुरु होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा व्यक्ति राजा समान होता है। साथ ही बहुत अधिक भू संपत्ति का स्वामी भी होता है। परन्तु राहु एवं गुरु की दशाएं अशुभ फल देंगी।।

Panchang 07 January 2021

गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है।।

गुरुवार का विशेष – गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है – (मुहूर्तगणपति)।।

गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है। साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है। इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है। इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए। इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है।।

वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है। ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है। साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है। ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में अधिक वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है। उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है।।

Panchang 07 January 2021

गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है। इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है। जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं। परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है।।

गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है। जैसे – सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो। ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है।।

दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।।

गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें – गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे।।

Panchang 07 January 2021

बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं। ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं। ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं। गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं।।

ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं। ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं। यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं। गुरुवार को जन्मं लेने वाले व्यसक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्व भाव के होते हैं। ये जीवन को उत्सफव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं।।

ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्वाससघात नहीं कर सकते हैं। यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं। इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये। इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्पितिवार तथा शुभ अंक 4 होता है।।

आज का विचार – मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं। इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है।।

Panchang 07 January 2021

जन्मकुण्डली के अनुसार आपके जीवन में धन कैसे और कब आयेगा ?।।…. आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें….. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

“वृषभ राशि में केतु की महादशा में सभी ग्रहों का फल, भाग-15।।” – My Latest video.

“मेष राशि में केतु की महादशा में सभी ग्रहों का फल, भाग-15।।” – My Latest video. –

“मीन राशि में केतु की महादशा में सभी ग्रहों का फल, भाग-15।।” – My Latest video. –

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Panchang 07 January 2021

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