पञ्चांग 12 मार्च 2021 दिन शुक्रवार।।

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बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 12 मार्च 2021 दिन शुक्रवार।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 12 March 2021

आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 12 मार्च 2021 दिन शुक्रवार।।
Aaj ka Panchang 12 March 2021.

विक्रम संवत् – 2077.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – प्रमादी.

शक – 1941.

अयन – उत्तरायण.

गोल – दक्षिण.

ऋतु – बसन्त.

मास – फाल्गुन.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – माघ कृष्ण पक्ष.

Panchang 12 March 2021

तिथि – चतुर्दशी 15:03 PM बजे तक उपरान्त अमावस्या तिथि है।।

नक्षत्र – शतभिषा 22:51 PM तक उपरान्त पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र है।।

योग – सिद्ध 08:30 AM तक उपरान्त साध्य योग है।।

करण – विष्टि 02:49 AM तक उपरान्त शकुनि 15:03 PM तक उपरान्त चतुष्पाद करण है।।

चन्द्रमा – कुम्भ राशि पर।।

सूर्योदय – प्रातः 06:50:29

सूर्यास्त – सायं 18:45:17

राहुकाल (अशुभ) – सुबह 09:00 बजे से 10:30 बजे तक।।

विजय मुहूर्त (शुभ) – दोपहर 12.36 बजे से 13.00 बजे तक।।

Panchang 12 March 2021

चतुर्दशी तिथि विशेष – चतुर्दशी को शहद और अमावस्या को मैथुन त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि क्रूरा एवं उग्रा तिथि मानी जाती है, इस तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं। इसीलिये चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये।।

आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है। रिक्ता नाम से विख्यात यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।।

जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।।

Panchang 12 March 2021

शतभिषा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- शतभिषा नक्षत्र में जन्मा जातक बहुत साहसी एवं मजबूत विचारों वाला होता है। अत्यधिक सामर्थ्य एवं स्थिर बुद्धि के होते हुए भी कभी-कभी जिद्दी और संवेदनहीन प्रतीत होते हैं। सभी प्रकार से ज्ञानी होते हुए भी आप आत्म केन्द्रित होते हैं। आप अधिक संतान वाले एवं दीर्घायु होते हैं। शतभिषा नक्षत्र के जातक रहस्यमय एवं समृद्धशाली व्यक्ति होते हैं। इनको अपने आस-पास के लोगों से सम्मान प्राप्त होता है।।

यदि आपका जन्म शतभिषा नक्षत्र में हुआ है तो आप अत्यंत आकर्षक और मजबूत व्यक्तित्व के स्वामी होंगे। आपकी उपस्थिति गरिमामय और प्रभावशाली होती है जो कि दूसरों को आपकी ओर आकर्षित होने को विवश कर देती हैं। चौड़ा माथा, तीखी नाक और सुंदर नेत्रों के कारण आप और भी आकर्षक दिखते हैं। तेज़ स्मरण शक्ति आपके व्यक्तित्व को और मजबूती देती है।।

शतभिषा नक्षत्र के जातकों में सकारात्मक और नकारात्मक पहलू का संतुलित समावेश रहता है। आप अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं और किसी भी कीमत पर उनसे समझौता नहीं करते। जिस कार्य को आप उचित नहीं समझते वह कार्य करने के लिए आपको कोई बाध्य नहीं कर सकता। आप सहृदय व्यक्ति होंगे जो कोमल स्वभाव के कारण सदा ही दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं।।

आप किसी को हानि नहीं पहुंचाते जब तक की सामने वाला आपको नुक्सान न पहुंचाए। आप एक बुद्धिमान व्यक्ति हे जो इश्वर में पूर्ण आस्था रखते हैं। आप सादा जीवन ब्यतित करने में ही विश्वास रखते हैं। परन्तु आपके व्यक्तित्व से आकर्षित हुए बिना कोई नहीं रह सकता। आप जीवन में खूब प्रशंसा और सम्मान पाते हैं। अपने कार्यक्षेत्र में आप पूरी लगन और मेहनत के साथ काम करते हैं और निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहते हैं।।

अच्छी शिक्षा के कारण आप जीवन में बहुत पहले ही अपने करियर का आरंभ कर लेते हैं। 34 वर्ष तक आप संघर्षरत रहते हैं परन्तु उसके बाद का समय बिना किसी बड़ी रुकावट के आपको उन्नति देता है। आपका पारिवारिक जीवन आपके व्यावसायिक जीवन की भांति सुखपूर्वक नहीं होता है। आप अपने परिजनों के कारण जीवन में बहुत कठिनाइयाँ झेलते हैं। हालाँकि आपका व्यवहार उनके प्रति प्रेमपूर्ण ही रहता है।।

इस कारण शतभिषा नक्षत्र के जातक मानसिक रूप से अशांत रहते हैं। पिता की अपेक्षा माता से आपको अधिक लगाव रहता है। साथ ही आपको भी उनसे बहुत स्नेह भी मिलता है। शतभिषा के जातकों का दांपत्य जीवन सुखमय नहीं होता है। सब कुछ होते हुए भी आपका अपने जीवन साथी के साथ सदा ही मतभेद रहता है। शतभिषा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें कर्मपरायण एवं परोपकारी होती हैं।।

शतभिषा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें सादे किन्तु आकर्षक व्यक्तित्व के कारण लम्बे अरसे तक स्मरण रखी जाती है। शतभिषा नक्षत्र में जन्मे जातक बिगड़े हुए काम को भी बड़े सूझ-बूझ के साथ बना देते हैं। शतभिषा नक्षत्र के जातक ह्रदय रोग, उच्च रक्तचाप, मुख से सम्बंधित अथवा गुप्त रोगों के शिकार हो ही जाते हैं।।

प्रथम चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। शतभिषा नक्षत्र में जन्म होने पर जन्म राशि कुंभ तथा राशि का स्वामी शनि, वर्ण शूद्र, वश्य नर, योनि अश्व, योनि महिष, गण राक्षस तथा नाड़ी आदि हैं। ऐसे जातक पर राहु और शनि का प्रभाव रहता है। इस शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक कुशल वक्ता होता है। शतभिषा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी शत्रु है। अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देती है। बृहस्पति में राहु एवं शनि की अंतरदशा कष्टदायी होगा। परन्तु राहु की दशा उत्तम फल देती है।।

द्वितीय चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि हैं। शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज के अग्रगण्य धनवानों में गिने जाते हैं। शतभिषा नक्षत्र के दूसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है। अतः शनि की दशा शुभ फलदायी होती है। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देगी, परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देगी।।

तृतीय चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि हैं। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक अपने समाज में सुखी एवं संपन्न व्यक्ति होता है। शतभिषा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शनि लग्नेश भी है। अतः शनि की दशा शुभ फल देती है। राहु की स्वतंत्र दशा उत्तम फल देती है परन्तु राहु में शनि या शनि में राहु की अन्तर्दशा शत्रु तुल्य कष्ट देती है।।

चतुर्थ चरण:- शतभिषा नक्षत्र का स्वामी राहु है। इस शतभिषा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी बृहस्पति हैं। शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे जातक का पुत्र योग प्रबल होता है। शतभिषा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी बृहस्पति शनि का शत्रु है और राहु का भी शत्रु है। अतः बृहस्पति की दशा अपेक्षित फल नहीं देती है। लग्नेश शनि की दशा-अन्तर्दशा जातक को उत्तम स्वस्थ्य एवं उन्नत्ति देती है।।

Panchang 12 March 2021

शुक्रवार का विशेष – शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं – (मुहूर्तगणपति)।।

शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है।।

शुक्रवार का विशेष टिप्स – मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें। यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें। शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है। आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें।।

Panchang 12 March 2021

मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है। ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं। ऐसे लोग धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है। ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं।।

ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं। इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है। सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं। इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्स विशेषज्ञ, मनोचिकित्सरक अथवा ज्वेोलरी से सम्बन्धित व्यदवसायों में आजमाना चाहिये। इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है।।

आज का सुविचार – मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं। जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते।।

Panchang 12 March 2021

विवाह में हो रहे विलम्ब के लिये इन साधारण उपायों से अपने जीवन को रसमय बनायें।।…. आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें….. वेबसाईट पर पढ़ें:  & ब्लॉग पर पढ़ें:

“मंगल की महादशा में शनि अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

“मंगल की महादशा में बुध अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

“मंगल की महादशा में केतु अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

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Panchang 12 March 2021

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