पञ्चांग 14 मार्च 2021 दिन रविवार।।

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बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 14 मार्च 2021 दिन रविवार।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 14 March 2021

आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 14 मार्च 2021 दिन रविवार।।
Aaj ka Panchang 14 March 2021.

विक्रम संवत् – 2077.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – प्रमादी.

शक – 1941.

अयन – उत्तरायण.

गोल – दक्षिण.

ऋतु – बसन्त.

मास – फाल्गुन.

पक्ष – शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – फाल्गुन शुक्ल पक्ष.

Panchang 14 March 2021

तिथि – प्रतिपदा 17:07 PM बजे तक उपरान्त द्वितीया तिथि है।।

नक्षत्र – पूर्वाभाद्रपद 00:22 AM तक उपरान्त उत्तराभाद्रपद नक्षत्र है।।

योग – शुभ 07:39 AM तक उपरान्त शुक्ल योग है।।

करण – किन्स्तुघ्न 04:26 AM तक उपरान्त बव 17:07 PM तक उपरान्त बालव करण है।।

चन्द्रमा – मीन राशि पर।।

सूर्योदय – प्रातः 06:48:46

सूर्यास्त – सायं 18:45:54

राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:30 बजे से 18:00 बजे तक।।

विजय (शुभ) मुहूर्त – दोपहर 12.36 बजे से 13.00 बजे तक।।

Panchang 14 March 2021

प्रतिपदा तिथि विशेष – प्रतिपदा को कद्दू एवं कूष्माण्ड तथा द्वितीया तिथि को कटेरी के फल का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि और सिद्धिप्रद तिथि मानी जाती है। इसके स्वामी अग्नि देवता हैं और यह तिथि नन्दा नाम से विख्यात है।।

मित्रों, यह प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज अग्निदेव से धन एवं तेज प्राप्त करने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।।

मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग।।

Panchang 14 March 2021

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है तो आप स्वभाव से एक दयालु व्यक्ति होंगे। आप धार्मिक होने के साथ-साथ वैरागी भी होंगे। आप समाज में एक धार्मिक नेता, प्रसिद्द शास्त्र विद एवं मानव प्रेमी के रूप में प्रख्यात होंगे। आप कोमल हृदयी एवं दूसरों के साथ सदैव सद्भावना रखते हैं। यदि आपके साथ कोई दुर्व्यवहार भी करता है तो आप उसे क्षमा कर देते हैं।।

आप अपने दिल में भी किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं रखते। आप महत्वाकांक्षी व्यक्ति नहीं हैं परन्तु इच्छाएं बढ़ी-चढ़ी होती हैं। मन ही मन आप उन्नत्ति के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच भी जाते हैं। देश भक्ति एवं इमानदारी आपके प्रमुख गुण होंगे। आप मनमौजी परन्तु मजबूत विचारों वाले व्यक्ति होंगे। आप उन गिने चुने व्यक्तियों में से होंगे जिन्हें आम लोग आदर की दृष्टि से देखते हैं।।

उत्तराभाद्रपद में जन्मे जातक निष्पक्ष व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। आप किसी को भी उसकी आर्थिक एवं सामाजिक सम्पन्नता के आधार पर नहीं अपितु मानवता के आधार पर तौलते है। आप बहुत बुद्धिमान एवं विवेकशील व्यक्ति होंगे। एक प्रखर वक्ता होने के कारण अनायास ही लोग आपकी ओर खिचाव महसूस करते हैं। आपकी सबसे बड़ी कमी आपका क्रोध होगा जो किसी भी छोटी से छोटी बात पर आ जाता है।।

आप विपरीत लिंगियों के प्रति विशेष आकर्षण महसूस करते हैं और उनका साथ आपको बेहद प्रिय है। उत्तराभाद्रपद के जातक किसी भी कार्यक्षेत्र में उच्च पद को प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। आप अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नहीं अपितु अपने गुणों के कारण सफल होते हैं। आप अक्सर अपने से अधिक शिक्षित लोगों से भी अधिक सफलता पाते हैं। आप कठोर परिश्रमी एवं कार्य के प्रति बहुत अधिक समर्पित व्यक्ति होंगे।।

ऐसे लोग कभी भी किसी कार्य को बीच में छोड़ना पसंद नहीं करते। आप अपने करियर में बहुत मान-सम्मान और प्रशंसा पाते हैं। आप अधिक समय तक निचले पदों पर कार्यरत नहीं रहते हैं। अपनी लगन और मेहनत के कारण आपकी उच्च पदों के लिए तरक्की शीघ्र ही हो जाती है। आप अपने जीवन के 18वें या 19वें वर्ष से ही जीवन यापन में लग जाते हैं। जीवन के 19, 21, 28., 30, 35 और 42वां वर्ष आपके करियर में महतवपूर्ण बदलाव लायेगा।।

उत्तराभाद्रपद के जातक का बचपन कठिनाईयों में बीतता है। आपको अपने माता-पिता से अपेक्षित स्नेह नहीं प्राप्त होता है। हालाँकि पिता के कारण आप समाज में गौरवान्वित होते हैं। परन्तु पिता से आपको अपने जीवन में किसी भी प्रकार का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है। आपको सदा ही अपने जन्म स्थान से दूर रहना पड़ता है। आपका विवाह एक सुंदर और आज्ञाकारी स्त्री से होता है।।

इस कारण आपका दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी एवं समृद्ध होता है। आपकी आज्ञाकारी संतान आपकी प्रसन्नता का कारण बनती है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्मी जातिकायें बुद्धिमान और धर्म के प्रति रूचि रखने वाली होती हैं। आप धैर्यवान एवं गुणवान होती हैं। आप जीवन में सदा मान सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करती हैं। उत्तराभाद्रपद के जातकों का प्रमुख लक्षण है बातूनी होना। आपको पैरों से सम्बंधित रोग या चोट, हर्निया एवं बवासीर जैसी बीमारियाँ हो सकती है।।

प्रथम चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक राजा के समान पराक्रमी होता है। लग्न स्वामी शनि एवं चरण स्वामी स्वामी सूर्य में परस्पर शत्रुता है। अतः सूर्य की दशा अशुभ फल देगी। शनि की दशा भी प्रतिकूल फल देगी। शनि में सूर्य या सूर्य में शनि की अन्तर्दशा मारक दशा का फल देगी। गुरु की दशा उत्तम स्वास्थ्य एवं राजयोग देने वाली होगी।।

द्वितीय चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा जातक तस्करी में रूचि रखता है। लग्न नक्षत्र स्वामी शनि बुध का मित्र है। अतः शनि की दशा मध्यम, परन्तु बुध की दशा अति शुभ फल देगी। बुध की दशा में गृहस्थ सुख एवं भौतिक उपलब्धियां प्राप्त होंगी। गुरु की दशा भी जातक को उत्तम फल देगी।।

तृतीय चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक पुत्रवान होता है। तीसरे चरण का स्वामी शुक्र है जो नक्षत्र स्वामी शनि का मित्र है। अतः शनि की दशा मध्यम परन्तु शुक्र की दशा शुभ फल देगी। शुक्र की दशा में पराक्रम बढेगा। लग्नेश गुरु की दशा भी अति उत्तम फल देगी।।

चतुर्थ चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक संपूर्ण रूप से सुखी होता है। लग्नेश गुरु की शनि से शत्रुता है तथा लग्न नक्षत्र स्वामी शनि की नक्षत्र चरण स्वामी मंगल से भी शत्रुता है। अतः शनि की दशा अशुभ फल देगी एवं मंगल की दशा मध्यम फल देगी। जो लाभ मंगल की दशा में जातक को मिलना चाहिए था वह नहीं मिल पायेगा। गुरु की दशा राजयोग प्रदाता होती है।।

Panchang 14 March 2021

मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें। अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं।।

इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है। इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है। क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है।।

दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।

रविवार का विशेष – रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं – (मुहूर्तगणपति)।।

रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

विशेष जानकारी – मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये। साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये।।

Panchang 14 March 2021

मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है। इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है। इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं। इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं।।

रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं। इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है। महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं। उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं। ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते। ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं। इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है।।

आज का सुविचार – मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना। क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं। दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं। कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर।।

Panchang 14 March 2021

सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है ।।…. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें….  वेबसाईट पर पढ़ें:  &  ब्लॉग पर पढ़ें:

“मंगल की महादशा में बुध अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

“मंगल की महादशा में केतु अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

“मंगल की महादशा में शुक्र अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

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Panchang 14 March 2021

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