पञ्चांग 30 मार्च 2021 दिन मंगलवार।।

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Panchang 30 March 2021
Panchang 30 March 2021

बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 30 मार्च 2021 दिन मंगलवार।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

Panchang 30 March 2021

आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 30 मार्च 2021 दिन मंगलवार।।
Aaj ka Panchang 30 March 2021.

विक्रम संवत् – 2077.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर – प्रमादी.

शक – 1941.

अयन – उत्तरायण.

गोल – दक्षिण.

ऋतु – बसन्त.

मास – चैत्र.

पक्ष – कृष्ण.

गुजराती पंचांग के अनुसार – फाल्गुन कृष्ण पक्ष.

Panchang 30 March 2021

तिथि – द्वितीया 17:29 PM बजे तक उपरान्त तृतीया तिथि है।।

नक्षत्र – चित्रा 12:23 PM तक उपरान्त स्वाति नक्षत्र है।।

योग – व्याघात 13:55 PM तक उपरान्त हर्षण योग है।।

करण – तैतिल 07:12 AM तक उपरान्त गर 17:29 PM तक उपरान्त वणिज करण है।।

चन्द्रमा – कन्या राशि पर 01:43 AM तक उपरान्त तुला राशि पर।।

सूर्योदय – प्रातः 06:34:43

सूर्यास्त – सायं 18:50:30

राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:00 बजे से 16:30 बजे तक।।

शुभ मुहूर्त – दोपहर 12.31 बजे से 12.55 बजे तक।।

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द्वितीया तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी हैं। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।।

प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।।

मित्रों, ज्योतिषशास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस तिथि के जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई तभी करते हैं जबकि उससे अपना भी लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।।

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चित्रा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- चित्रा नक्षत्र में जन्म लेने वाला जातक शारीरिक रूप से मनमोहक एवं सुन्दर आँखों वाला होता है। आपको अनेक प्रकार की साज सज्जा का शौक होता है तथा अपने लिए नित नए आभूषण एवं वस्त्र आप खरीदते ही रहते हैं। आपका व्यक्तित्व आकर्षक एवं शारीरिक रूप से संतुलित होते हैं। व्यक्तित्व के यही गुण आपको भीड़ से अलग करते हैं। आपकी पसंद और सोंच में अनूठापन है जिससे अक्सर महिलाएं आकर्षित होती है। आप स्वभाव से कामुक एवं स्त्रियों में अधिक रूचि रखने वाले होते हैं।।

आप बेहद संवेदनशील होते हैं तथा अत्यधिक भावुक होते हैं। इसलिए आपकी बुद्धि अस्थिर रहती है और आपको निर्णय लेने में कठिनाई अक्सर आती है। आप एक शांतप्रिय व्यक्ति होंगे परन्तु अपनी स्पष्टवादिता के कारण विवादों में अक्सर फंस जाते हैं। आपमें सुन्दरता और गुणों का समावेश होता है। आप दयालु और गरीबों के मदद करने वालों में से होंगे। शत्रुओं को मुंहतोड़ जवाब देने की अपेक्षा आप अपने आप को बचाना बेहतर समझते हैं।।

चित्र नक्षत्र में जन्मा जातक परिश्रमी होता है और अपने इसी गुण के कारण अपने जीवन में आई कई कठिनाईयों को पार करते हुए उन्नति पाता है। कभी-कभी आपको अपने द्वारा की गई मेहनत से अधिक भी मिल जाता है। आपका जीवन 32 वर्ष तक उथल पुथल भरा रहता है परन्तु 32 से 52 वर्ष तक का समय आपके जीवन का बेहतर समय कहा जा सकता है।।

आप अपने पिता से अधिक माता के निकट होंगे। हालाँकि आपके पिता समाज में एक सम्माननीय व्यक्ति होंगे। परन्तु किसी कारणवश आपकी उनसे दूरी आजीवन बनी रहेगी। चित्रा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति अपने जन्म स्थान से दूर जाकर ही सफल होता है। वैवाहिक जीवन में कुछ खटास रहती है परन्तु पारिवारिक जीवन में स्थिरता रहेगी। चित्रा नक्षत्र में जन्मी महिलाएं सफ़ेद वस्त्र पहनना पसंद करती हैं।।

सुंदर तथा हंसमुख स्वभाव वाली चित्रा नक्षत्र की जातिकाएं ईश्वर में विश्वास रखने वाली होती हैं। आप माता-पिता की प्रिय तथा आपके नेत्र विशेष रूप से सुंदर होते हैं। अर्थात इस नक्षत्र की जातिकाएं अत्यन्त सुंदर नेत्रों वाली होती हैं। चित्रा नक्षत्र में जन्मे जातक अल्सर, किडनी सम्बंधित रोग, दिमागी बुखार, अपेंडिक्स जैसे रोगों के शिकार होने की ज्यादातर संभावनायें होती हैं।।

प्रथम चरण:- चित्रा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुए जातकों का झुकाव चोरी एवं तस्करी में अधिक होता है। लग्नेश बुध की दशा शुभ फल देगी। शुक्र की दशा में जातक का भाग्योदय होगा। परन्तु सूर्य की दशा अशुभ फलदायी होगी।।

द्वितीय चरण:- चित्रा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध होता हैं। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक सौंदर्य प्रेमी होता है। ऐसे जातकों की रूचि संगीत, कला, चित्रकारी या फोटोग्राफी जैसे विषयों में अधिक होती है। लग्नेश बुध की दशा माध्यम फलदायी होती है।।

तृतीय चरण:- चित्रा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र होता हैं। चित्रा नक्षत्र का स्वामी मंगल एवं लग्नेश तथा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र दोनों ही कामुक ग्रह हैं। फलतः जातक कामुक होगा तथा पराई स्त्री में रूचि रखने वाला होगा। लग्न बलि न होने के कारण जातक का विकास रुका हुआ रहेगा। लग्नेश शुक्र एवं मंगल की दशा में कोई काम नहीं बनेगा।।

चतुर्थ चरण:- चित्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल होता हैं। नक्षत्र स्वामी मंगल एवं नक्षत्र चरण स्वामी भी मंगल होने के कारण जातक के शरीर पर चोट अथवा पीड़ा का निशान रहेगा। लग्नेश शुक्र की दशा अच्छा फल देती है। मंगल की दशा-अन्तर्दशा भी उत्तम फलदायी होती है।।

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स्वाति नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म स्वाति नक्षत्र में हुआ है तो आप एक आकर्षक चेहरे और उससे भी अधिक आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी होंगे। आपका शरीर सुडौल एवं भरा हुआ है। इस कारण आप कहीं भी जाएँ भीड़ से अलग ही दिखते हैं। आप जैसा सोचते हैं वैसा करते हैं। दिखावा आपको पसंद नहीं होता है।

आप एक स्वतंत्र आत्मा के स्वामी होंगे जिसको किसी के भी आदेश का पालन करना कतई पसंद नहीं होगा। आप किसी पर भी तब तक मेहरबान रहते हैं जब तक कि सामने वाला आपकी आज़ादी में दखल न दे। जो भी आपकी आजादी को नुकसान पहुचाएगा वो आपके कोप भाजन का शिकार अवश्य होगा। वास्तविकता तो यह है, कि आप या तो किसी के परम मित्र हो सकते हैं या फिर परम शत्रु।।

आप स्वभाव से बहुत ही स्वाभिमानी और उच्च विचार धारा के व्यक्ति होंगे। न तो आपको किसी की संपत्ति में रूचि होगी और न ही अपनी संपत्ति में किसी की हिस्सेदारी आपको पसंद है। आपको अपने कार्यों पर किसी की टिप्पणी कतई पसंद नहीं है। यदि आपकी नज़र में सामने वाला दोषी है तो बदला लेने में आप किसी भी हद तक जा सकते हैं।।

आप अपने कार्यों को पूरे मन लगा कर मेहनत और इमानदारी के साथ करते है। आप अपने जीवन के शुरुआती 25 वर्षों में व्यवसायिक रूप से बहुत कठिनाईयां झेलेंगे। परिश्रम के अनुरूप फल प्राप्त नहीं होगा। परन्तु 30 वर्ष के उपरान्त आपको अपने किये हुए कार्यों का ब्याज समेत भुगतान मिलेगा। स्वाति नक्षत्र के जातकों के लिए न्यायिक व्यवस्था में कार्य करना सबसे अधिक लाभप्रद होता है। सैन्य क्षेत्र में आप अधिक तरक्की कर सकते है।।

आपका वैवाहिक जीवन बहुत सुखमय नहीं होगा। क्योंकि आपसी वैचारिक मतभेदों के कारण घर में शांति नहीं रहेगी। फिर भी आपकी आरती स्थिति स्थिर रहेगी, बिगड़ेगी नहीं। स्वाति नक्षत्र में जन्मी जातिकायें कभी न आलस करने वाली होती हैं। दिखने में साधारण शक्ल सूरत किन्तु बुद्धि से चपल एवं किसी भी स्थिति में अपने मनोरथ पूरे करने वाली होती हैं।।

चित्रा नक्षत्र में जन्मी जातिकायें जिद्दी होने के कारण कभी-कभी अच्छे बुरे कार्य में भेद नहीं कर पाती है। इस स्वाति नक्षत्र का जातक अपने स्वभाव से ही सभी को प्रसन्नता देनेवाला होता है। इस नक्षत्र के जातक ज्यादातर यौन रोग तथा मूत्र से सम्बंधित रोगों से ग्रसित देखे गए हैं।।

प्रथम चरण:- स्वाति नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी गुरु होता है। इस नक्षत्र चरण में पैदा हुआ जातक अधिकांशतः चोर प्रवृत्ति का होता है। नक्षत्र स्वामी राहु, गुरु को बिगाड़ कर अपना फल देता है अतः जातक चोर प्रवृत्ति का होता है।।

द्वितीय चरण:- स्वाति नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शनि होता है। राहु व् शनि दो पाप ग्रहों के प्रभाव में आने से जातक अल्पायु होता है। परन्तु लग्नेश शुक्र की दशा अच्छी जाएगी। राहु और शनि की मित्रता के कारण दोनों की दशाओं में जातक को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा।।

तृतीय चरण:- स्वाति नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मे जातक पर शनि और राहु के प्रभाव के कारण मन में वैराग्य आएगा। अतः जातक धार्मिक प्रवृत्ति का हो सकता है। राहु और शनि की मित्रता के कारण दोनों की दशाओं में जातक को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहना होगा।।

चतुर्थ चरण:- स्वाति नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी गुरु होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा व्यक्ति राजा समान होता है। साथ ही बहुत अधिक भू संपत्ति का स्वामी भी होता है। परन्तु राहु एवं गुरु की दशाएं अशुभ फल देंगी।।

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मंगलवार को नए कपड़े न ही खरीदना चाहिये और न ही पहली बार पहनना चाहिए। मंगलवार वाहन एवं भूमि-भवन आदि भी नहीं खरीदना चाहिये।।

मंगलवार का विशेष – मंगलवार के दिन तेल मर्दन (शरीर में तेल मालिश) करने से आयु घटती है – (मुहूर्तगणपति)।।

मंगलवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से भी आयु की हानि होती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।।

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मंगलवार को जिनका जन्म होता है, वो जातक स्वभाव से उग्र, साहसी, प्रयत्नशील एवं महत्वाकांक्षी होते हैं। इनमें नेतृत्व की क्षमता अन्यों के मुकाबले बहुत अधिक होती है। ऐसे लोग जिम्मेदा‍‍रियों के कार्य में सफल भी होते हैं। खिलाड़ी, पहलवान, सेना तथा पुलिस विभाग में सफल रहते हैं। यह जातक अधिकांशतः रक्तवर्ण या गेहूंआ रंग होता है।।

मंगलवार को जन्म लेनेवाला जातक जटिल बुद्धि वाला होता है। ये किसी भी बात को आसानी से नहीं मानते हैं। ऐसे लोग शक्की किस्म के होते हैं इसलिये सभी बातों में इन्हें कुछ न कुछ खोट दिखाई देता है। ये युद्ध प्रेमी और पराक्रमी होते हैं तथा अपनी बातों पर कायम रहने वाले होते हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसे जातक हिंसा पर भी उतर आते हैं। इनके स्वभाव की एक बड़ी विशेषता है कि ये अपने कुटुम्ब का पूरा ख्याल रखते हैं।।

मंगलवार को जन्‍म लेने वाले व्‍यक्ति स्‍वभावानुसार क्रोधी, उग्र, पराक्रमी, जुझारू, अदम्‍य साहसी, आलोचना सहन न करने वाले और सांग‍ठनिक क्षमता वाले होते हैं। नेतागिरी, पुलिस, सेना, नौकरशाह तथा खिलाड़ी के रूप में इनका कैरियर अधिक सफल रहता है। इनका शुभ अंक 3, 6, 9 तथा शुभ रंग लाल एवं मैरून और इनका शुभ दिन मंगलवार एवं शुक्रवार होता है।।

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मंगलवार का विशेष टिप्स – यदि आपके जीवन में कभी अचानक ज्यादा खर्च की स्थिति बन जाय, तो किसी भी मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में गुड़-चने का भोग श्रद्धापूर्वक लगाएं। भोग लगाने के बाद वहीँ बैठकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।।

मंगलवार के दिन ये विशेष उपाय करें – मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज हनुमान जी को चमेली का तेल चढ़ाना, चमेली के तेल का ही दीपक जलाना तथा माखन का भोग लगाना चाहिये, इससे हर प्रकार की मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।

आज का सुविचार – मित्रों, दुनिया में भगवान का संतुलन कितना अद्भुत हैं, 100 कि.ग्रा. अनाज का बोरा जो उठा सकता हैं वो खरीद नही सकता और जो खरीद सकता हैं वो उठा नही सकता। जब आप गुस्सें में हो तब कोई फैसला न लेना और जब आप खुश हो तब कोई वादा न करना, अगर ये याद रखेंगे तो कभी नीचा नही देखना पड़ेगा।।

Panchang 30 March 2021

अरिष्ट अर्थात एक्सिडेन्ट एवं चोट आदि लगने के योग ।।….. आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें…. वेबसाईट पर पढ़ें:  &  ब्लॉग पर पढ़ें:

“गुरु की महादशा में गुरु अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

“गुरु की महादशा में शनि अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

“गुरु की महादशा में बुध अन्तर्दशा फलम्।।” – My Latest video.

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