विपरीत राजयोग बहुत ही प्रभावी परन्तु कैसे?

0
747
Viparit Rajyoga Ke Fal
Viparit Rajyoga Ke Fal

विपरीत राजयोग एक बहुत ही प्रभावी राजयोग परन्तु कैसे?।। Viparit Rajyoga Ke Fal.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, दोनो लग्नों से बने विपरीत राजयोग के फल पूर्ण रूप से मिलते हैं। “विपरीत राजयोग” बनाने वाले ग्रह कम अंशो पर, दुर्बल होने तथा उन पर दुष्प्रभाव के अनुपात में अधिकाधिक शुभ फल देते हैं। परन्तु शक्तिशाली पापी ग्रह अशुभ भावों में स्थित होने पर जातक की हानि ही करते हैं।।

ज्योतिष के सूत्रों के गूढ़ अध्ययन से यह समझ में आता है, कि जातक की जन्म कुण्डली में स्थित “राजयोग” उसके पूर्वजन्म के अच्छे कर्मों का फल होता है। जबकि “विपरीत राजयोग” पूर्व जन्म में अच्छे कार्य, परिश्रम एवं तात्कालिक सामाजिक आचार संहिता के पालन के बावजूद पीड़ित रहने वाले जातक की इस जन्म की कुण्डली में पाये जाते हैं।।

ऐसा जातक पूर्व जन्म में जिन लोगों द्वारा सताया गया था। उन्हीं लोगों की ओर से इस जन्म में उसके वर्तमान कर्मों का कई गुना अधिक फल दिया जाता है। ऐसा क्यों होता है? ऐसा इसलिये क्योंकि उसकी जन्मकुंडली में स्थित “विपरीत राजयोग” ही फलित हो रहा है और वही ऐसा फल दे रहा है।।

इस जन्म में “विपरीत राजयोग” के कारण जातक को अत्यल्प कर्म (पारिश्रमिक) का अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है। परन्तु पूर्व संस्कार-वश उसकी नियति परमार्थिक हो जाती है। जिससे मृत्योपरान्त उसकी ख्याति काफी समय तक रहती है। स्वाभाविक जिज्ञासा होती है, कि छठे और आठवें जैसे दुष्ट भावों के स्वामी किस प्रकार “विपरीत राजयोग” बनाकर जातक को लाभ पहुंचाते हैं।।

यह कार्य प्रणाली इस प्रकार है, लग्न भाव जातक को दर्शाता है। सप्तम भाव उस व्यक्ति को जिससे वह सम्बन्ध रखता है। छठा भाव सप्तम से द्वादश (व्यय) भाव है, तथा अष्टम भाव सप्तम से द्वितीय (धन) भाव है। सम्बन्धी व्यक्ति के 2 एवं 12 भावों का विनिमय उसकी हानि करता है। और उसका लाभ जातक को मिलता है।।

उदाहरण के लिये- जब जातक के कुंडली के छठे और आठवें भाव के स्वामियों की दशा-भुक्ति चल रही हो उस समय पर कोई व्यक्ति अपनी किसी मजबूरी के वजह से अपनी प्रोपर्टी कम मूल्य में जातक को बेच देता है। कुछ समय बाद उसकी कीमत अत्यधिक ऊँची हो जाती है और जातक उसे बेच कर बहुत अधिक लाभ कमा लेता है।।

छठे और आठवें भाव के स्वामी पापी ग्रह हों। साथ ही उन पर जितना अधिक पाप ग्रहों का पाप प्रभाव होगा। जातक को उतना ही अधिक शुभ फल प्राप्त होगा। जन्म कुण्डली में “विपरीत राजयोग” का उत्कृष्ट उदाहरण पूर्व प्रधानमंत्री श्री चन्द्रशेखर सिंह की कुण्डली में मिलता है।।

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं – Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज – My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।

सिलवासा ऑफिस:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा।।

प्रतिदिन सिलवासा में मिलने का समय:

10:30 AM to 01:30 PM And 05: PM 08:30 PM

WhatsAap & Call: +91 – 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here